बेनीपुर-मनीगाछी में सड़कों पर बढ़ता 'मौत का तांडव': NH-27 और स्टेट हाईवे पर जानलेवा बने ‘ब्लाइंड स्पॉट’

दरभंगा: दरभंगा जिले के बेनीपुर और मनीगाछी प्रखंडों के अंतर्गत गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) और विभिन्न राज्य राजमार्गों (SH) पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ महीनों में इन सड़कों पर हुई दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने प्रशासन की कार्यशैली और सड़क सुरक्षा के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सड़कों पर मौजूद 'ब्लाइंड स्पॉट' (अंधे मोड़) अब यमदूत बन गए हैं, जो आए दिन किसी न किसी की जान ले रहे हैं।

सड़क सुरक्षा की अनदेखी: समस्या की जड़

बेनीपुर और मनीगाछी क्षेत्र से गुजरने वाली इन सड़कों का निर्माण तो विकास की उम्मीद लेकर हुआ था, लेकिन वर्तमान में ये सड़कें असुरक्षा का पर्याय बन चुकी हैं। स्थानीय निवासियों और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ताओं के अनुसार, दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:

खतरनाक ब्लाइंड स्पॉट: सड़कों के घुमावदार मोड़ों पर दूर तक दिखाई न देने के कारण तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर आम बात हो गई है। यहाँ न तो कोई चेतावनी बोर्ड है और न ही मोड़ को स्पष्ट करने वाले रिफ्लेक्टर्स।

सड़क किनारे अतिक्रमण: हाईवे और स्टेट हाईवे के किनारे अवैध रूप से बनी दुकानें और बाजार के विस्तार ने सड़क की चौड़ाई को काफी कम कर दिया है, जिससे दो वाहनों का एक साथ गुजरना जोखिम भरा हो गया है।

अनियंत्रित गति: हाईवे होने के कारण यहाँ भारी वाहनों का भारी दबाव रहता है। चालकों की लापरवाही और गति सीमा (Speed Limit) का पालन न करना हादसों को और भयावह बना देता है।

यातायात संकेतों का अभाव: संवेदनशील स्थानों पर जेब्रा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, और रात में दिखने वाले साइन बोर्ड्स की घोर कमी है।

बढ़ती दुर्घटनाएं: एक भयावह तस्वीर

बेनीपुर और मनीगाछी के निवासियों का कहना है कि वे हर दिन अपने किसी न किसी परिचित को इन सड़कों पर घायल या मृत होते देख रहे हैं। पिछले एक पखवाड़े में ही दर्जनों दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं।

स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता राम रतन महतो कहते हैं:

"हमने कई बार जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को पत्र लिखा है कि कम से कम खतरनाक मोड़ों पर बड़े आईने (Convex Mirrors) लगवाए जाएं और साइन बोर्ड्स लगाए जाएं, लेकिन हमारी आवाज किसी दफ्तर की फाइलों में दबकर रह गई है। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में है?"

प्रशासनिक निष्क्रियता और जनता का आक्रोश

जनता का मानना है कि बेनीपुर और मनीगाछी क्षेत्र की इन सड़कों पर हो रही मौतों के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है।

सुरक्षा उपायों का अभाव: एनएचएआई (NHAI) और पीडब्ल्यूडी (PWD) द्वारा सड़क सुरक्षा ऑडिट (Road Safety Audit) कराए जाने के बावजूद, सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

दोषपूर्ण इंजीनियरिंग: सड़कों के निर्माण के दौरान ही मोड़ों और ढलानों (Slopes) को वैज्ञानिक तरीके से नहीं बनाया गया, जो अब एक बड़ी समस्या बन गया है।

सड़क सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधार: विशेषज्ञों की राय

दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ तत्काल सुझाव दिए हैं:

ब्लैक स्पॉट का चिह्नीकरण: पूरे बेनीपुर-मनीगाछी रूट का एक व्यापक सर्वे कर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) को चिह्नित कर वहाँ तत्काल 'रंबल स्ट्रिप्स' लगाई जानी चाहिए।

स्ट्रीट लाइट का प्रबंधन: मुख्य चौराहों और खतरनाक मोड़ों पर हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था की जाए।

अतिक्रमण हटाओ अभियान: सड़क किनारे लगी अवैध दुकानों को हटाकर किनारे की पटरी को साफ किया जाए ताकि इमरजेंसी में वाहनों को जगह मिल सके।

जागरूकता अभियान: स्कूलों और स्थानीय चौपालों के माध्यम से सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए लोगों को शिक्षित किया जाए।

महिला और बाल सुरक्षा: एक गंभीर चिंता

इन सड़कों के किनारे स्थित स्कूलों में जाने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा एक सबसे बड़ा मुद्दा है। अक्सर देखा गया है कि स्कूल बसों और ऑटो के पास होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती, जिससे बच्चों की जान हमेशा खतरे में रहती है। माता-पिता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच पाएंगे या नहीं, यह घर से निकलते ही एक संशय बन जाता है।

बेनीपुर और मनीगाछी की सड़कों पर हर दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है। प्रशासनिक तंत्र का यह कर्तव्य है कि वह सड़कों को केवल यातायात का साधन न समझे, बल्कि जीवन बचाने वाली बुनियादी सुविधाओं के रूप में विकसित करे।

स्थानीय लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले एक महीने के भीतर इन सड़कों पर सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो वे व्यापक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब समय आ गया है कि सरकार 'विकास' के साथ-साथ 'सुरक्षा' को भी प्राथमिकता दे।