गोघट्टा गांव में छापेमारी कर छह लीटर महुआ शराब बरामद, एक गिरफ्तार
बुद्धूचक/भागलपुर: बिहार में पूर्ण शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए भागलपुर जिला पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बुद्धूचक थाना पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने गोघट्टा गांव में छापेमारी कर अवैध रूप से बनाई गई महुआ शराब बरामद की है। इस कार्रवाई में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इलाके में शराब कारोबारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
छापेमारी और बरामदगी का घटनाक्रम
मिली जानकारी के अनुसार, बुद्धूचक थाना अध्यक्ष को यह पुख्ता सूचना मिली थी कि गोघट्टा गांव में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध रूप से महुआ शराब का निर्माण और भंडारण किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई और सादे लिबास में पुलिस बल ने गोघट्टा गांव को घेर लिया।
बुधवार देर शाम पुलिस जब गणेश सिंह के आवास पर पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। पुलिस की तलाशी के दौरान घर के एक कोने में छिपाकर रखे गए प्लास्टिक के गैलन बरामद हुए। जब इन गैलनों की जांच की गई, तो उनसे कुल छह लीटर महुआ शराब (देसी शराब) प्राप्त हुई। शराब मिलते ही पुलिस ने मौके पर ही जब्ती सूची तैयार की और शराब को अपने कब्जे में ले लिया।
रितेश कुमार की गिरफ्तारी
इस छापेमारी में पुलिस ने गणेश सिंह के पुत्र रितेश कुमार को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि शराब का यह कारोबार घर के अंदर ही संचालित किया जा रहा था। गिरफ्तारी के बाद रितेश को बुद्धूचक थाना लाया गया, जहां उससे कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उसने शराब के कारोबार से जुड़े अपने नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में भी पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।
बुद्धूचक थाना अध्यक्ष ने बताया कि आरोपी रितेश कुमार के खिलाफ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम (Bihar Prohibition and Excise Act) की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गुरुवार को उसे पुलिस अभिरक्षा में न्यायिक हिरासत के लिए भागलपुर भेजा जाएगा।
पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
बुद्धूचक पुलिस की इस कार्रवाई को स्थानीय स्तर पर काफी सराहा जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शराब माफियाओं के खिलाफ पुलिस की यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया, "हमारा लक्ष्य केवल शराब बरामद करना नहीं है, बल्कि उस पूरे आपूर्ति तंत्र (Supply Chain) को ध्वस्त करना है जो ग्रामीण इलाकों में जहर बेचने का काम कर रहे हैं। गोघट्टा में की गई यह छापेमारी उसी रणनीति का एक हिस्सा है।"
पुलिस ने यह भी बताया कि क्षेत्र के उन तमाम ठिकानों की निगरानी बढ़ाई गई है जहां पहले भी शराब के धंधे की शिकायतें मिली थीं। तकनीक और मुखबिर तंत्र का उपयोग करते हुए ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है जो कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
ग्रामीणों का समर्थन और चिंताएं
गोघट्टा गांव के जागरूक निवासियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब के कारण आए दिन परिवारों में कलह बढ़ रही थी और युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही थी। हालांकि, ग्रामीणों ने पुलिस से यह भी अपील की है कि केवल छोटे विक्रेताओं को नहीं, बल्कि शराब के इस पूरे कारोबार को मुख्य रूप से संचालित करने वाले 'माफिया' को पकड़ा जाए, जो पर्दे के पीछे से ग्रामीण युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कानूनी परिणाम और चेतावनी
बिहार में शराब पीना या बेचना एक गैर-जमानती अपराध माना जाता है, जिसमें लंबे कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस अवैध धंधे में शामिल पाया जाता है, तो न केवल उसे जेल भेजा जाएगा, बल्कि उसकी संपत्ति भी कुर्क की जा सकती है।
थाना प्रशासन ने गोघट्टा और आसपास के ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने इलाके में शराब बनाने या बेचने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले का नाम और पता पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा, ताकि किसी भी नागरिक को सुरक्षा का खतरा न हो।
भविष्य की रणनीति
आगामी दिनों में बुद्धूचक थाना क्षेत्र के अंतर्गत सघन छापेमारी अभियान जारी रहेगा। विशेष रूप से गंगा के दियारा क्षेत्रों और झाड़ियों वाले इलाकों में पुलिस ड्रोन और अन्य उपकरणों की मदद से निगरानी रखेगी। इस मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद महुआ शराब के लिए कच्चा माल कहां से लाया जा रहा था और इसका वितरण कहां-कहां किया जाना था।
यह छापेमारी एक बार फिर यह साबित करती है कि प्रशासन नशामुक्त समाज बनाने के अपने संकल्प पर दृढ़ है। रितेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके उन साथियों की तलाश में जुटी है जो इस अवैध धंधे को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे थे।