कानून के शिकंजे में फरार अपराधी; 10 वर्षों से फरार दो आरोपियों के घरों पर पुलिस ने चस्पा किया इश्तेहार

कहलगांव/भागलपुर: लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों के खिलाफ कहलगांव पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, बुधवार को कहलगांव पुलिस ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए 2016 के उत्पाद अधिनियम (Excise Act) मामले में पिछले करीब 10 वर्षों से फरार चल रहे दो आरोपितों के घरों पर इश्तेहार चस्पा किया। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके के अन्य फरार अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में कहलगांव थाना अंतर्गत उत्पाद अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को नामजद किया था, जिनमें से दो मुख्य आरोपित गिरफ्तारी के डर से घटना के तुरंत बाद ही घर छोड़कर फरार हो गए थे। पिछले एक दशक से ये दोनों आरोपित कानून की नजरों से बचकर भागते फिर रहे थे।

इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई बार छापेमारी की, लेकिन आरोपित हर बार चकमा देने में सफल रहे। पुलिस की बार-बार की नाकामियों के बाद, मामले की सुनवाई कर रही स्थानीय अदालत ने इन दोनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। न्यायालय ने पुलिस को धारा 82 (CrPC) के तहत इश्तेहार चस्पा करने का आदेश दिया।

पुलिस की चेतावनी: हाजिर न होने पर होगी कुर्की-जब्ती

बुधवार की सुबह कहलगांव थाना की एक टीम दलबल के साथ आरोपितों के पैतृक आवास पर पहुंची। पुलिस ने ढोल-नगाड़े बजाकर और गांव में मुनादी कराते हुए दोनों आरोपितों के घरों के मुख्य द्वारों पर न्यायालय का इश्तेहार चस्पा किया।

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ये दोनों आरोपित न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो अगली कार्रवाई के तौर पर उनकी चल-अचल संपत्ति की कुर्की-जब्ती की जाएगी। इश्तेहार चस्पा करने की इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी वहां जमा हो गए, जो पुलिस की इस कार्रवाई को गंभीरता से देख रहे थे।

कानून का लंबा हाथ: "अपराधी कहीं भी छिपें, बच नहीं पाएंगे"

पुलिस उपाधीक्षक (SDPO) ने इस कार्रवाई पर कहा, "न्यायालय का आदेश सर्वोपरि है। हम उन सभी फरार अपराधियों की सूची तैयार कर रहे हैं जो लंबे समय से मामलों में वांछित हैं। 2016 के इस पुराने मामले को अब प्राथमिकता पर लिया गया है। यह इश्तेहार उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो सोचते हैं कि समय बीतने के साथ अपराध की फाइलें बंद हो जाती हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि पुलिस की तकनीक और सर्विलांस टीम लगातार ऐसे लोगों पर नजर रख रही है। उन्होंने फरार आरोपितों को सलाह दी है कि वे खुद को कानून के हवाले कर दें, अन्यथा पुलिस की अगली कार्रवाई उनकी संपत्ति को नीलाम करने और उनके सामाजिक बहिष्कार की दिशा में होगी।

10 साल का लंबा इंतजार और अब तेजी

10 साल का समय किसी भी आपराधिक मामले के अनुसंधान के लिए काफी लंबा होता है। इस मामले में इतनी देरी होने पर भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे थे। हालांकि, अब कहलगांव पुलिस की सक्रियता को देखकर लोगों में कानून के प्रति भरोसा फिर से बढ़ता दिख रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि ये आरोपित फरार होने के बाद से ही इलाके से गायब थे, लेकिन उनकी धमकियों और प्रभाव के कारण लोग खुलकर बात करने से कतराते थे। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब स्थानीय लोगों का डर भी कम हुआ है।

आगे की रणनीति और पुलिस का संदेश

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कहलगांव अनुमंडल के सभी थानों में दर्ज पुराने लंबित मामलों का निष्पादन करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो केवल उन मामलों की समीक्षा करेगी जिनमें आरोपित लंबे समय से फरार हैं।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें इन फरार आरोपितों के वर्तमान ठिकाने के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वे बिना डरे स्थानीय थाने को सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

एक कड़ा संदेश

यह कार्रवाई उन सभी अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक है जो यह मान बैठे थे कि वे पुलिस की पहुंच से दूर हो गए हैं। इश्तेहार चस्पा होना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव बनाने का भी एक जरिया है।

अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद ये दोनों आरोपित न्यायालय में सरेंडर करते हैं या फिर पुलिस को कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। कहलगांव पुलिस का यह कदम पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और यह सुनिश्चित करता है कि न्याय मिलने में देरी भले हो सकती है, लेकिन न्याय का पहिया रुकता नहीं है।