बीईओ तनु कुमारी का स्कूलों में औचक निरीक्षण; अव्यवस्था देख गनगनिया स्कूल पर जताई नाराजगी, प्रधानों को दिए सुधार के कड़े निर्देश

सुल्तानगंज/भागलपुर: शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने और सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन का स्तर सुधारने के उद्देश्य से सुल्तानगंज की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) तनु कुमारी ने मंगलवार को एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने गनगनिया, कमरगंज और जहांगीरा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कहीं संतोषजनक स्थिति मिली, तो कहीं खामियां देख बीईओ का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

गनगनिया विद्यालय में दिखी भारी लापरवाही

निरीक्षण की शुरुआत गनगनिया स्थित विद्यालय से हुई। बीईओ तनु कुमारी जैसे ही विद्यालय परिसर में दाखिल हुईं, उन्हें अव्यवस्था के कई नमूने देखने को मिले। विद्यालय की साफ-सफाई से लेकर वर्ग कक्ष के संचालन तक में काफी कोताही बरती जा रही थी। बीईओ ने जब पंजियों (रजिस्टर) की जांच की, तो उपस्थिति और शिक्षण कार्य में मिलान नहीं होने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।

विद्यालय के परिसर में फैली गंदगी और बच्चों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था न होने पर बीईओ ने प्रधानाध्यापक को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। उन्होंने प्रधानाध्यापक को स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर विद्यालय परिसर की स्वच्छता और बच्चों की पढ़ाई के स्तर में सुधार नहीं दिखा, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

कमरगंज और जहांगीरा में मिला-जुला असर

गनगनिया के बाद बीईओ का काफिला कमरगंज और जहांगीरा के विद्यालयों की ओर बढ़ा। यहां की स्थिति गनगनिया की तुलना में कुछ बेहतर पाई गई। बीईओ ने कक्षा में जाकर बच्चों से पठन-पाठन संबंधित सवाल भी किए। कुछ छात्रों द्वारा सही जवाब दिए जाने पर उन्होंने शिक्षकों की सराहना की, लेकिन साथ ही हिदायत दी कि केवल कुछ होनहार छात्रों पर ध्यान केंद्रित न करें, बल्कि कक्षा के प्रत्येक बच्चे को मुख्यधारा से जोड़ना शिक्षकों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

जहांगीरा के विद्यालयों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता की भी जांच की गई। बीईओ ने रसोइयों को साफ-सफाई के साथ भोजन बनाने का निर्देश दिया और बच्चों को मिलने वाले भोजन की थाली की खुद जांच की। उन्होंने प्रधान शिक्षकों से कहा कि रसोइयों की वर्दी और भोजन में पौष्टिकता का विशेष ख्याल रखा जाए।

प्रधानाध्यापकों को दिए गए विशेष दिशा-निर्देश

निरीक्षण के दौरान बीईओ तनु कुमारी ने सभी विद्यालय प्रधानों को सुधार के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने का कड़ा निर्देश दिया:

उपस्थिति में पारदर्शिता: शिक्षकों और छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और बायोमेट्रिक या रजिस्टर में किसी भी प्रकार की हेराफेरी न करने का आदेश दिया गया।

पर्यावरण और स्वच्छता: विद्यालय परिसर को 'नो प्लास्टिक जोन' घोषित करने और नियमित सफाई के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

शैक्षणिक कैलेंडर का पालन: सभी शिक्षकों को विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार ही पाठ्यक्रम पूरा करने का निर्देश दिया गया।

बच्चों का सर्वांगीण विकास: केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि खेल-कूद और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी जोर देने की बात कही गई।

शिकायत निवारण: विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक नियमित रूप से करने और अभिभावकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए।

अव्यवस्था पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बीईओ तनु कुमारी ने कहा कि सुल्तानगंज प्रखंड के सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना ही उनका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा, "निरीक्षण का उद्देश्य किसी को डराना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है। जो प्रधानाध्यापक या शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं करेंगे, उनके साथ विभाग किसी भी प्रकार का नरमी का बर्ताव नहीं करेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि गनगनिया विद्यालय की रिपोर्ट वे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को सौंपेंगी, ताकि वहां के स्थिति में स्थायी सुधार हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का यह क्रम आगे भी जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना निरीक्षण

बीईओ के इस औचक निरीक्षण की चर्चा पूरे प्रखंड क्षेत्र में है। स्थानीय अभिभावकों ने बीईओ के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि अधिकारियों की इस सक्रियता से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने उम्मीद जताई है कि यदि शिक्षा पदाधिकारी इसी प्रकार नियमित अंतराल पर स्कूलों का जायजा लेती रहीं, तो सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत दोनों जल्द बदल जाएगी।

आगामी समय में अन्य विद्यालयों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण होने की संभावना है, जिससे शिक्षकों में भी एक सकारात्मक डर और जिम्मेदारी का भाव पैदा हुआ है।