पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र में चेहलुम की तैयारियां जोर-शोर से शुरू; अकीदतमंदों में जबरदस्त उत्साह, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजन को लेकर प्रशासन और कमेटियां सतर्क
पीरपैंती/भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र में इस्लामिक इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण और गमगीन पर्व 'चेहलुम' को लेकर तैयारियां पूरी भव्यता और उत्साह के साथ शुरू हो चुकी हैं। हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों में भारी अकीदत और जोश देखा जा रहा है। प्रखंड के विभिन्न गांवों, कस्बों और मोहल्लों में ताजिया निर्माण, अखाड़ा समितियों की बैठकों और जुलूस के मार्गों की साफ-सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को शांतिपूर्ण, भाईचारे और आपसी सौहार्द के साथ संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है।
विभिन्न गांवों में ताजिया निर्माण का कार्य अंतिम चरण में
चेहलुम के अवसर पर निकलने वाले जुलूस और झांकियों की शान बढ़ाने के लिए पीरपैंती के विभिन्न इलाकों में कारीगरों द्वारा कलात्मक ताजियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है:
हुनर और आस्था का मेल: प्रखंड के शेरमारी, बाखरपुर, ईशीपुर, मेदिनीवृत्त और पीरपैंती बाजार सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में युवा कारीगर बांस, रंग-बिरंगे कागज, फॉयल और गत्ते की मदद से आकर्षक और भव्य ताजियों का निर्माण कर रहे हैं। ताजियों की सजावट देखते ही बन रही है।
युवाओं में भारी उमंग: ताजिया निर्माण समितियों से जुड़े युवाओं का कहना है कि चेहलुम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सच्चाई, न्याय और बलिदान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसे लेकर नई पीढ़ी में भी विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
अखाड़ा समितियों की बैठकें और लाठी-डंडों के करतब का अभ्यास
चेहलुम के जुलूस के दौरान परंपरागत हथियारों से अपने हुनर का प्रदर्शन करने वाली अखाड़ा समितियों ने अभी से ही अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं:
पारंपरिक कलाओं का रिहर्सल: पीरपैंती के विभिन्न अखाड़ों में युवा और उस्ताद पारंपरिक हथियारों जैसे लाठी, तलवार, और बनैटी के करतबों का अभ्यास कर रहे हैं। ढोल-ताशों और ताशों की गूंज के बीच युवा अपनी कला का प्रदर्शन कर जुलूस की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।
शांति और अनुशासन पर जोर: समितियों के वरिष्ठ सदस्यों ने बैठकें आयोजित कर सभी युवाओं को निर्देश दिया है कि जुलूस के दौरान पूरी तरह से अनुशासन बनाए रखा जाए और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचा जाए जिससे सामाजिक सौहार्द पर आंच आए।
प्रशासनिक चौकसी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
त्योहार के दौरान विधि-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पीरपैंती स्थानीय प्रशासन ने भी कमर कस ली है:
शांति समिति की बैठकें: स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, दोनों समुदायों के गणमान्य लोगों और पूजा-ताजिया कमेटियों के सदस्यों के साथ लगातार शांति समितियों (Peace Committee) की बैठकें की जा रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हुड़दंगियों पर पैनी नजर रखी जाएगी।
संवेदनशील बिंदुओं पर पुलिस बल की तैनाती: जुलूस के तय मार्गों, संवेदनशील इलाकों और चौराहों पर पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पीरपैंती अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है और चेहलुम का यह पर्व भी आपसी भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।
बाजारों में रौनक और पारंपरिक खरीदारी
चेहलुम के नजदीक आते ही पीरपैंती बाजार में भी खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है:
दुकानों पर उमड़ी भीड़: कपड़े, बच्चों के खिलौने और पूजन-अर्चन की सामग्री बेचने वाली दुकानों पर लोगों की चहल-पहल बढ़ गई है। पर्व को लेकर घरों में विशेष पकवानों जैसे सेवई और खीर आदि की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।
आपसी भाईचारे का संदेश: इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, जो पीरपैंती की साझी संस्कृति की मिसाल पेश करता है।
पीरपैंती प्रखंड में चेहलुम को लेकर चल रही जोर-शोर से तैयारियां इस बात की गवाही देती हैं कि पारंपरिक पर्वों के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह आज भी उतनी ही गहरी है। भव्य ताजियों के निर्माण, अखाड़ों के पारंपरिक अभ्यास और प्रशासन की मुस्तैदी के बीच यह उम्मीद की जा रही है कि पीरपैंती में चेहलुम का यह पर्व पूरी तरह शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के माहौल में ऐतिहासिक रूप से संपन्न होगा।