अकबरनगर क्षेत्र में चरमराई बिजली व्यवस्था; श्रीरामपुर, खेरैहिया और बसंतपुर समेत कई गांवों में पांच घंटे गुल रही बिजली, चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से बेहाल रहे ग्रामीण
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अकबरनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। स्थानीय उपभोक्ताओं को उस समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा जब अचानक और बिना किसी पूर्व सूचना के क्षेत्र के कई प्रमुख गांवों में लगभग पांच घंटे तक बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। सुबह से लेकर दोपहर तक बिजली गुल रहने के कारण भीषण गर्मी और उमस से लोगों का हाल बेहाल हो गया। एक तरफ जहां बिजली विभाग बेहतर और निर्बाध बिजली देने के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं धरातल पर मामूली तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काट देना आम बात हो गई है, जिससे ग्रामीण जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
किन-किन गांवों में प्रभावित रही बिजली आपूर्ति?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकबरनगर क्षेत्र के जिन ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट का यह गंभीर असर देखने को मिला, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित गांव शामिल रहे:
श्रीरामपुर (Shrirampur)
खेरैहिया (Kherahiya)
बसंतपुर (Basantpur)
भुवालपुर (Bhuwalpur)
इसके अलावा इन गांवों से सटी कई अन्य छोटी बस्तियां और टोले भी इस पांच घंटे के लंबे पावर कट (Power Cut) की चपेट में रहे।
सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक छाया रहा अंधेरा और सन्नाटा
गुरुवार का दिन इन ग्रामीण इलाकों के रहवासियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं रहा। सुबह ठीक 10:00 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कोई सामान्य ट्रिपिंग होगी जो कुछ ही मिनटों में ठीक हो जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, बिजली आने की उम्मीदें धूमिल होती गईं।
दोपहर 3:00 बजे तक यानी लगातार पांच घंटे तक ट्रांसफार्मर और ग्रिड से बिजली की सप्लाई पूरी तरह बंद रही। इस दौरान उमस भरा मौसम और चिलचिलाती धूप ने लोगों की परेशानियों को और अधिक बढ़ा दिया। पंखे और कूलर बंद होने के कारण घरों के अंदर बैठना दूभर हो गया था।
आम जनजीवन पर पड़ा बुरा असर, घरों से लेकर दुकानों तक मचा हाहाकार
लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण अकबरनगर के इन ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया:
छात्रों और पढ़ाई पर असर: दोपहर का समय स्कूली बच्चों की पढ़ाई और ऑनलाइन कार्यों का होता है, लेकिन बिजली न होने के कारण विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी। इनवर्टर भी लंबे पावर कट के आगे जवाब दे गए।
छोटा कारोबार और कामकाज ठप: ग्रामीण बाजारों में आटा चक्की, वेल्डिंग शॉप, सिलाई केंद्र और साइबर कैफे चलाने वाले छोटे दुकानदारों का रोजगार पूरी तरह प्रभावित हुआ। बिजली न होने से दिनभर का कामकाज ठप रहा, जिससे दुकानदारों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
पेयजल की समस्या: ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति के लिए अधिकांश लोग सबमर्सिबल पंप या मोटर पर निर्भर रहते हैं। बिजली न रहने के कारण पानी की टंकियां खाली हो गईं और लोगों को पीने के पानी के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ी।
बीमार और बुजुर्गों की दुर्दशा: गर्मी और उमस के कारण घरों में लेटे बुजुर्गों, बच्चों और बीमार मरीजों का बुरा हाल हो गया। पसीने से तरबतर लोग छांव और ठंडी हवा की तलाश में पेड़ों के नीचे या खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर दिखे।
ग्रामीणों में पनप रहा आक्रोश, विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
बिजली कटने की इस समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में विद्युत विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग बिना किसी पूर्व सूचना या शिड्यूल के जब चाहे बिजली काट देता है। यदि मेंटेनेंस का काम करना भी होता है, तो उसकी सूचना समय से पहले सार्वजनिक नहीं की जाती है, जिससे लोग अपनी आवश्यक तैयारियां नहीं कर पाते हैं।
अकबरनगर के उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया है कि शहरी क्षेत्रों की तर्ज पर क्या ग्रामीण इलाकों को सुचारू रूप से बिजली पाने का अधिकार नहीं है? बार-बार इस तरह के अघोषित पावर कट से लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
अकबरनगर के श्रीरामपुर, खेरैहिया, बसंतपुर और भुवालपुर जैसे गांवों में पांच घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वितरण प्रणाली की स्थिति अभी भी दयनीय बनी हुई है। यदि बिजली विभाग ने अपनी व्यवस्था में सुधार नहीं किया और ट्रांसफार्मर व लाइनों के रखरखाव में लापरवाही जारी रखी, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए विवश हो सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि विभाग रोस्टर के अनुसार काम करे और जनता को इस तरह की अमानवीय परेशानियों से मुक्ति दिलाए।