जोगबनी के प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी की बदहाली, कीचड़ और पानी के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जोगबनी (अररिया): जिले के जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-11 स्थित प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को जहां सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए, वहीं वे आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं।

विद्यालय तक पहुंचने के लिए सुरक्षित सड़क या सुगम रास्ता नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को हर दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चारों ओर फैले पानी, कीचड़ और दलदली रास्तों के बीच से गुजरकर बच्चे और शिक्षक स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब रास्ता पूरी तरह खतरनाक हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से स्कूल की इस समस्या को लेकर आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

स्कूल पहुंचना बना चुनौती

प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकलते हैं, लेकिन रास्ते में उन्हें पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।

कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं और उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं। बारिश के मौसम में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर महसूस करते हैं, क्योंकि रास्ते में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

शिक्षकों को भी इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है। समय पर विद्यालय पहुंचने के लिए उन्हें भी खराब रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।

जलजमाव और दलदल बनी बड़ी समस्या

विद्यालय के आसपास जलजमाव की समस्या काफी गंभीर बताई जा रही है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में आसपास का क्षेत्र दलदल में बदल जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर इतना पानी भर जाता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में अधिकतर छोटे बच्चे हैं, जो इस तरह के खतरनाक रास्ते को पार करने में सक्षम नहीं होते।

शिक्षा पर पड़ रहा असर

विद्यालय की खराब स्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।

जब बच्चे कठिन परिस्थितियों से गुजरकर स्कूल पहुंचते हैं, तो उनका ध्यान पढ़ाई की बजाय रास्ते की परेशानी और असुविधाओं पर अधिक रहता है।

कई अभिभावक खराब रास्ते के कारण बच्चों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी परेशान हैं। खासकर बारिश के मौसम में स्कूल में बच्चों की संख्या कम हो जाती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर शिक्षा के लिए केवल स्कूल भवन और शिक्षक ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल मिलना भी जरूरी है।

गुरु-शिष्य परंपरा पर भी असर

स्थानीय लोगों ने स्कूल की स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में इस तरह की समस्या होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

शिक्षकों को भी मजबूरी में खराब रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

स्थानीय ग्रामीणों ने जोगबनी नगर परिषद और प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय तक जाने के लिए जल्द से जल्द पक्की सड़क या सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए यह समस्या प्राथमिकता के आधार पर दूर की जानी चाहिए।

उन्होंने जल निकासी की व्यवस्था करने और स्कूल परिसर के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, गर्मी के मौसम में किसी तरह रास्ते से आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही समस्या कई गुना बढ़ जाती है।

बारिश के बाद सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल जाती है और जगह-जगह पानी जमा हो जाता है।

ऐसे समय में बच्चों और शिक्षकों को कपड़े खराब होने के साथ-साथ गिरने और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

विद्यालय की स्थिति को लेकर अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय से स्कूल तक पहुंचने की समस्या बनी हुई है, तो इसका समाधान पहले ही किया जाना चाहिए था।

स्थानीय प्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलने से लोगों में नाराजगी है।

बच्चों के भविष्य की चिंता

अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी उनके प्रयासों में बाधा बन रही है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

यदि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही सुरक्षित नहीं होगा, तो बच्चों की शिक्षा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

जल्द समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को जल्द संज्ञान में लेगा और विद्यालय तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ते की व्यवस्था करेगा।

यदि सड़क निर्माण, जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं, तो बच्चों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।

जोगबनी नगर परिषद के वार्ड संख्या-11 स्थित प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी की स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाती है। जहां बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा दी जा रही है, वहीं स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

गहरे पानी, कीचड़ और दलदली रास्तों के बीच बच्चों और शिक्षकों का रोजाना स्कूल पहुंचना प्रशासनिक उपेक्षा की ओर इशारा करता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकाले, ताकि नौनिहालों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का अधिकार मिल सके।