तमाशा देखती रही पुलिस, अस्पताल से गायब हो गया जख्मी रेल यात्री!
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बार फिर पुलिसिया संवेदनहीनता और 'सीमा विवाद' (Jurisdiction Dispute) का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शहर के भगवानपुर गुमटी संख्या दो के पास चलती ट्रेन से झपटमारी (Snatching) का शिकार होकर गंभीर रूप से जख्मी हुए एक रेल यात्री का बयान शुक्रवार को भी दर्ज नहीं किया जा सका।
वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर रेल पुलिस (GRP) और सदर थाने की पुलिस के बीच छिड़ी 'सरहद की जंग' है। दोनों थाने की पुलिस यह तय करने में जुटी रही कि घटना की जमीन किसके नक्शे में आती है। इसी खींचतान के बीच, सरकारी अस्पताल (SKMCH) में भर्ती जख्मी यात्री को उसके परिजन एक निजी अस्पताल ले गए, और पुलिस हाथ मलती रह गई।
क्या है पूरा मामला? चलती ट्रेन में वारदात और दर्दनाक हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटना भगवानपुर रेलवे गुमटी संख्या दो के पास की है। एक रेल यात्री ट्रेन में सवार होकर यात्रा कर रहा था, तभी घात लगाए बैठे शातिर झपटमारों ने उसका सामान या मोबाइल झपट लिया।
संतुलन बिगड़ा और गिरे: झपट्टा इतना जोरदार था कि यात्री खुद को संभाल नहीं पाया और चलती ट्रेन से नीचे ट्रैक के पास गिर गया।
गंभीर चोटें: गिरने के कारण यात्री को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों और तत्परता दिखाते हुए सदर थाने की पुलिस ने उसे इलाज के लिए आनन-फानन में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में भर्ती कराया।
लेकिन असली ड्रामा अस्पताल के बेड पर शुरू हुआ, जब पुलिस को पीड़ित का बयान दर्ज करना था ताकि अपराधियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कार्रवाई की जा सके।
'होम सिग्नल' का पेंच: कौन नापेगा सरहद?
अस्पताल में जब बयान दर्ज करने की बारी आई, तो सदर थाना और रेल थाना आमने-सामने आ गए। दोनों थानों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं, जो पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं:
सदर पुलिस का पक्ष:
सदर थानेदार नवलेश आजाद ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला पूरी तरह से रेल पुलिस (GRP) के अधिकार क्षेत्र का है। वारदात चलती ट्रेन या रेलवे ट्रैक के पास की है, इसलिए बयान दर्ज करने और केस दर्ज करने की जिम्मेदारी रेल पुलिस की ही बनती है।
रेल पुलिस (GRP) का पक्ष:
दूसरी तरफ, रेल थानेदार रंजीत कुमार ने अपनी दलील दी। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद जीआरपी की टीम ने मौके पर जाकर गहन जांच की। जांच में पाया गया कि घटना भगवानपुर स्थित रेलवे गुमटी संख्या दो के पास हुई है, जो रेलवे के 'होम सिग्नल' के बाहर का क्षेत्र है। चूंकि जख्मी को सदर थाने की पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है, इसलिए बयान लेने का पहला अधिकार और कानूनी जिम्मेदारी सदर पुलिस की ही है।
दोनों थानों की दलीलें: एक नजर में
| थाना | पुलिस अधिकारी | मुख्य दलील | जिम्मेदारी |
|---|---|---|---|
| सदर थाना | नवलेश आजाद (थानेदार) | मामला रेलवे ट्रैक और रेल यात्री से जुड़ा है, इसलिए जीआरपी केस संभाले। | रेल पुलिस की |
| रेल थाना (GRP) | रंजीत कुमार (थानेदार) | घटनास्थल 'होम सिग्नल' के बाहर है और सदर पुलिस ने भर्ती कराया है। | सदर पुलिस की |
एसकेएमसीएच से गायब हुआ जख्मी, परिजन ले गए निजी अस्पताल
पुलिस की इस कागजी और सीमाई नूराकुश्ती का असर यह हुआ कि पीड़ित को समय पर कानूनी न्याय मिलना तो दूर, उसका बयान तक नहीं हो सका। इस बीच, अस्पताल में पुलिस के टालमटोल वाले रवैये और इलाज की स्थिति को देखते हुए जख्मी यात्री के परिजन बेहद नाराज और परेशान हो गए।
शुक्रवार को परिजन बिना पुलिस को बताए जख्मी यात्री को SKMCH (मेडिकल कॉलेज) से लेकर चले गए और उसे किसी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। फिलहाल पुलिस को यह भी स्पष्ट नहीं है कि जख्मी यात्री किस निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है, जिससे मामला पूरी तरह से अधर में लटक गया है।
पुराना इतिहास: पहले भी इसी गुमटी पर हुआ था 'खूनी' सीमा विवाद
यह पहली बार नहीं है जब भगवानपुर गुमटी संख्या दो पुलिस के लिए 'सरहदी जंग' का मैदान बनी हो। इतिहास खुद को दोहरा रहा है:
दो बैंककर्मियों की मौत का मामला: कुछ महीने पहले इसी भगवानपुर रेल गुमटी संख्या दो के पास एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ था। पटना की रहने वाली और मुजफ्फरपुर के एक बैंक में कार्यरत दो सगी बहनें इंटरसिटी एक्सप्रेस से उतरने के दौरान दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गई थीं, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
उस वक्त भी दोनों सगी बहनों के शव ट्रैक पर पड़े रहे और रेल पुलिस व सदर पुलिस घंटों तक सीमा विवाद में उलझी रही। बाद में जब मामला जिले के वरीय अधिकारियों (Senior Officers) के हस्तक्षेप तक पहुंचा, तब जाकर जांच के बाद सदर पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया गया था।
जनता का सवाल: खाकी की संवेदनशीलता कहां है?
भगवानपुर गुमटी के पास लगातार बढ़ रही झपटमारी की घटनाएं स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस सीमाओं के फेर में उलझी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब कोई बड़ी वारदात होती है, तो पुलिस को सीमा नापने के बजाय पीड़ित को न्याय दिलाने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मुजफ्फरपुर के भगवानपुर गुमटी संख्या दो की यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि आज भी सिस्टम में कागजी लकीरें इंसानी जान और न्याय से बड़ी हो जाती हैं। अब देखना यह है कि मुजफ्फरपुर के एसएसपी या रेल एसपी इस मामले में दखल देकर किस थाने की जवाबदेही तय करते हैं और पीड़ित का बयान कब दर्ज हो पाता है।