पटना नगर निगम का बड़ा 'पॉकेट अटैक'! 30 साल बाद प्रॉपर्टी टैक्स में 15% का तगड़ा उछाल, अब मकान-दुकान सब महंगा!

 राजधानी पटना में रहने वाले मकान मालिकों, दुकानदारों और किराएदारों के लिए एक बेहद 'महंगी' खबर है! पटना नगर निगम (PMC) ने शहरवासियों को 'जोर का झटका बहुत धीरे से' दिया है। नगर विकास एवं आवास विभाग से ग्रीन सिग्नल मिलते ही पटना में प्रॉपर्टी टैक्स (संपत्ति कर) में सीधे 15 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू भी हो चुकी हैं।

सबसे बड़ा झटका तो यह है कि पटना में पूरे 30 साल बाद (साल 1995 के बाद) वार्षिक किराया मूल्य (ARV) के इस मूल ढांचे में इतना बड़ा बदलाव किया गया है। अब पटना में अपनी छत रखना हो या बिजनेस करना—जेब का ढीला होना तय है!

सीधा गणित: आपकी जेब पर कैसे चलेगा निगम का 'बुलडोजर'?

टैक्स का यह नया नियम आवासीय (Residential) और व्यावसायिक (Commercial) दोनों तरह की प्रॉपर्टीज पर लागू होगा। इसे बिल्कुल आसान भाषा में ऐसे समझिए:

पहले का टैक्स: ₹1,000 सालाना अब का नया टैक्स: सीधे ₹1,150 सालाना!

यानी आपकी प्रॉपर्टी का जो भी सालाना टैक्स बनता था, उसमें चुपचाप 15% एक्स्ट्रा जोड़ लीजिए।

 नया टैक्स चार्ट: सड़क देखकर कटेगी जेब!

नगर निगम ने सड़कों की चौड़ाई और मकान की कंडीशन (आरसीसी पक्की छत या एस्बेस्टस/कच्चा मकान) के हिसाब से नया रेट कार्ड जारी किया है:

सड़क की श्रेणीप्रॉपर्टी का प्रकारनया रेट (व्यावसायिक)नया रेट (आवासीय)
1. प्रधान मुख्य सड़क (VIP/मेन रोड्स)पक्का मकान (RCC)₹62.10 प्रति वर्ग फीट₹20.70 प्रति वर्ग फीट
 एस्बेस्टस/चादर छत₹41.40 प्रति वर्ग फीट₹13.80 प्रति वर्ग फीट
2. मुख्य सड़क (कनेक्टिंग रोड्स)पक्का मकान (RCC)₹41.40 प्रति वर्ग फीट₹13.80 प्रति वर्ग फीट
 एस्बेस्टस/चादर छत₹27.60 प्रति वर्ग फीट₹9.20 प्रति वर्ग फीट
3. अन्य अंदरूनी सड़कें (मोहल्ले की गलियां)पक्का मकान (RCC)₹20.70 प्रति वर्ग फीट₹6.90 प्रति वर्ग फीट

 

 30 साल बाद अचानक क्यों बढ़ा टैक्स?

जनता सोच रही होगी कि अचानक नगर निगम को हमारी याद क्यों आई? दरअसल, इसके पीछे बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा 127 का कानूनी पेंच है।

इस कानून के मुताबिक, हर 5 साल में प्रॉपर्टी टैक्स की समीक्षा करना और टैक्स में न्यूनतम 15% की बढ़ोतरी करना अनिवार्य है। हालांकि, पटना में राजनीति और अन्य कारणों से 1995 के बाद से इस बेस रेट को छुआ नहीं गया था। निगम ने साल 2021 में ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, जिस पर अब फाइनल मुहर लगाकर इसे जनता के सिर मढ़ दिया गया है।

 निगम की दलील: "टैक्स बढ़ाएंगे, तभी तो पटना चमकाएंगे!"

इस भारी बढ़ोतरी पर पटना नगर निगम के अफसरों का अपना अलग ही तर्क है। उनका कहना है कि:

शहर का विकास: इस टैक्स से निगम का खजाना भरेगा, जिसका सीधा इस्तेमाल पटना को 'स्मार्ट सिटी' बनाने में होगा।

हाई-टेक सुविधाएं: जलजमाव (Waterlogging) से मुक्ति के लिए नए ड्रेनेज सिस्टम, चमचमाती स्ट्रीट लाइट्स और वर्ल्ड-क्लास साफ-सफाई की व्यवस्था की जाएगी।

ईमानदारों को डिस्काउंट: जो लोग बिना किसी देरी के समय पर ईमानदारी से टैक्स भरेंगे, उन्हें 5% की स्पेशल छूट भी दी जाएगी। जनता का गुस्सा: "सुविधाएं कचरा जैसी, टैक्स सीधे वीआईपी!"

भले ही निगम विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन बोरिंग रोड, कंकड़बाग, बेली रोड और डाकबंगला जैसे इलाकों के आम लोगों और व्यापारियों में भारी उबाल है।

महंगाई की डबल मार : पहले से मंदी की मार झेल रहे दुकानदारों का कहना है कि व्यावसायिक टैक्स बढ़ने से दुकान चलाना मुश्किल होगा। इसका सीधा असर सामानों की कीमतों पर पड़ेगा।

किराएदार भी नपेंगे : मकान मालिकों ने साफ कर दिया है कि अगर निगम टैक्स बढ़ाएगा, तो वे अपनी जेब से क्यों भरेंगे? वे सीधे किराएदारों का रूम रेंट (Flat Rent) बढ़ाएंगे।

मानसून का दर्द : पटनावासियों का कहना है कि पहली ही बारिश में पूरा शहर डूब जाता है। जलजमाव की समस्या दूर करने के बजाय सीधे टैक्स थोप देना मिडिल क्लास के बजट पर अत्याचार है।

पटना नगर निगम का यह 15% टैक्स हाइक कानूनी रूप से भले ही सही हो, लेकिन जनता के लिए यह किसी 'करंट' से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस कड़क टैक्स के बाद क्या वाकई पटना की बदहाल सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम सुधरते हैं, या फिर पटनावासियों की गाढ़ी कमाई सिर्फ फाइलों में ही तैरती नजर आएगी!