पटना में साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश: चार आरोपी गिरफ्तार, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजी जा रही थी ठगी की रकम
पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर क्राइम यूनिट (CCU) ने पटना साइबर थाना के सहयोग से एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो देशभर में साइबर ठगी कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करता था और फिर उस रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में भेज देता था। इस कार्रवाई में पुलिस ने कंकड़बाग के तीन और नालंदा जिले के हिलसा के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। चारों आरोपियों से पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं और पुलिस को उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों तक भी जल्द पहुंचा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बनाता था। ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद उस पैसे को अलग-अलग माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेशी वॉलेट में भेज दिया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसों का स्रोत और गंतव्य पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, साइबर क्राइम यूनिट को पिछले कुछ दिनों से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। तकनीकी निगरानी, बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों की पहचान की। इसके बाद पटना साइबर थाना और सीसीयू की संयुक्त टीम ने कंकड़बाग और नालंदा के हिलसा में एक साथ छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे गिरोह के पूरे नेटवर्क और लेनदेन का पता लगाया जा सके।
साइबर ठगी का था सुनियोजित नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह साइबर ठगी के लिए कई अलग-अलग तरीके अपनाता था। इनमें फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर जानकारी लेना, निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देना, ऑनलाइन नौकरी का झांसा, सोशल मीडिया पर फर्जी लिंक भेजना और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल शामिल था।
जैसे ही पीड़ित उनके झांसे में आते थे, उनके बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती थी। इसके बाद पैसे को कई बैंक खातों में घुमाया जाता और अंत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदकर विदेश भेज दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में कई फर्जी बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया जाता था।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए छिपाई जाती थी रकम
जांच एजेंसियों के अनुसार, साइबर अपराधी अब पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था की बजाय क्रिप्टोकरेंसी का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पैसों के लेनदेन को ट्रैक करना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों ने कई क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का उपयोग किया। ठगी की रकम को पहले डिजिटल करेंसी में बदला जाता था और फिर विदेशी डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया जाता था। प्रारंभिक जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं। इस पहलू की जांच केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से की जा रही है।
बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की हो रही जांच
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी, आईपी एड्रेस और क्रिप्टो वॉलेट का विश्लेषण कर रही है। कई बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इन खातों का इस्तेमाल किन-किन राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किया गया।
इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए थे, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका है कि कुछ लोग कमीशन लेकर अपने खाते उपलब्ध कराते थे।
अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं तार
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था। पुलिस को संदेह है कि देश के कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं से भी इनका संबंध हो सकता है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और साइबर सेल से जानकारी साझा की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े मामलों की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसियों को भी कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा।
डिजिटल सबूत जुटाने में जुटी जांच एजेंसियां
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है। विशेषज्ञ इन उपकरणों से चैट हिस्ट्री, ईमेल, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी की।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन, डेबिट या क्रेडिट कार्ड का विवरण साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और निवेश या नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऑनलाइन प्रस्तावों की पूरी तरह जांच करें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करे। समय पर शिकायत मिलने पर ठगी गई रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
साइबर अपराधियों पर लगातार शिकंजा
बिहार पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रही है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई तेज की गई है। हाल की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस मामले में जल्द ही अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क, ठगी की कुल राशि और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।