पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप: 20 वर्षों का महा-मास्टरप्लान और भविष्य का पटना

बिहार की राजधानी पटना के शहरी विस्तार और बढ़ती आबादी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप परियोजना की रूपरेखा तैयार कर ली है। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना का मास्टर प्लान-2047 और इसका प्रारूप आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया गया है। यह टाउनशिप अगले 20 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएगी, जिसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक लगभग 66 लाख (6.6 मिलियन) की आबादी को विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं प्रदान करना है।

तीन चरणों में होगा 20 वर्षों का नियोजित विकास

इस विशाल टाउनशिप योजना को एक साथ लागू करने के बजाय सरकार ने इसे तीन चरणों में विभाजित किया है ताकि वित्तीय प्रबंधन सुचारू रहे और चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा सके:

पहला चरण (शुरुआती 5 वर्ष): इस शुरुआती चरण का मुख्य फोकस बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण, टाउनशिप की रीढ़ मानी जाने वाली 90 मीटर चौड़ी मुख्य सड़कों का निर्माण, मजबूत जलापूर्ति तंत्र (पेयजल), सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, निर्बाध बिजली आपूर्ति और आधुनिक ट्रांजिट हब विकसित करना होगा।

दूसरा और तीसरा चरण: अगले डेढ़ दशकों में आबादी के बढ़ने वाले दबाव और जरूरतों के अनुसार आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया जाएगा।

मास्टर प्लान-2047 और भूमि उपयोग का दायरा

यह टाउनशिप मुख्य रूप से पटना से सटे पुनपुन, नौबतपुर, संपतचक, फुलवारीशरीफ, मसौढ़ी और धनरुआ जैसे क्षेत्रों के विस्तृत भू-भाग पर बसाई जा रही है। इस योजना के तहत लगभग 81,730 एकड़ (विशेष क्षेत्र) भूमि को चिन्हित किया गया है। मास्टर प्लान के तहत भूमि के सटीक उपयोग का विवरण इस प्रकार तय किया गया है:

आवासीय क्षेत्र: लगभग 35.18% हिस्सा रिहायशी बस्तियों के लिए आरक्षित।

हरित पट्टी और पर्यावरण: लगभग 4.42% हरित क्षेत्र (Green Belt) और करीब 21.57% शहरी कृषि के लिए सुरक्षित रखा गया है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।

परिवहन और संचार: सड़कों और ट्रांजिट नेटवर्क के लिए 7.64% भूमि निर्धारित है।

वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र: व्यापारिक गतिविधियों के लिए लगभग 3.98% और उद्योगों के लिए 5.70% भूमि आवंटित की गई है।

 परिवहन और कनेक्टिविटी: 90 मीटर चौड़ी सड़कें और रैपिड रेल

नियोजित शहर की रीढ़ उसकी बेहतरीन कनेक्टिविटी होती है। पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप में यातायात को सुगम बनाने के लिए वृहद स्तर पर सड़कें बनाई जा रही हैं:

टाउनशिप के बिल्कुल बीच से 90 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क गुजरेगी जो उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम दिशा को जोड़ेगी।

इससे जुड़ी हुई रिंग रोड 60 मीटर चौड़ी होगी। इसके अलावा एसएच-1, एनएच-31 और अन्य प्रमुख राजमार्गों को भी 60 मीटर चौड़ाई के मानकों के साथ जोड़ा जा रहा है।

क्षेत्र में यातायात को रफ्तार देने के लिए पटना-गया रैपिड रेल कॉरिडोर और मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (MRTS) के लिए भी विशेष कॉरिडोर्स की योजना बनाई गई है।

 जल प्रबंधन और 'स्पंज सिटी' का कॉन्सेप्ट

भविष्य में जलभराव या शहरी बाढ़ की समस्याओं से निपटने के लिए इस टाउनशिप को 'स्पंज सिटी' के मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। प्राकृतिक जल स्रोतों और बहाव से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

विशाल जलाशय (Reservoir): पुनपुन और दरधा नदी के बीच वाले क्षेत्र में 25 बिलियन लीटर की क्षमता वाला एक विशाल जलाशय प्रस्तावित किया गया है। आपात स्थिति या गर्मियों में यह जलाशय 66 लाख आबादी के लिए एक महीने तक पानी की जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा। इसमें गंगा नदी से भी पानी ले जाने की व्यवस्था जोड़ी जाएगी।

 सामाजिक बुनियादी ढांचा: शिक्षा और स्वास्थ्य

बस्ती की अनुमानित आबादी के अनुपात में उच्च कोटि की सामाजिक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं:

शिक्षा: हर 2,500 की आबादी पर नर्सरी/प्री-प्राइमरी स्कूल, 5,000 पर प्राइमरी स्कूल, 7,500 पर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सवा लाख की आबादी पर एक कॉलेज और 10 लाख की आबादी पर एक पूर्ण विश्वविद्यालय का प्रावधान है।

स्वास्थ्य: हर 30 हजार की आबादी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), एक लाख तक की आबादी पर नर्सिंग होम और 2.5 लाख की आबादी पर एक बड़े मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल की रूपरेखा तैयार की गई है।

जमीन की खरीद-बिक्री पर से रोक समाप्त

सरकार द्वारा मास्टर प्लान का प्रारूप जारी होने के साथ ही इस क्षेत्र के भू-स्वामियों और आम नागरिकों के लिए एक राहत भरा कदम उठाया गया है। इस विशेष क्षेत्र में पहले भूमि के क्रय-विक्रय और हस्तांतरण पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उन्हें अब तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। अब लोग अपनी जमीन का स्वतंत्र रूप से लेन-देन कर सकेंगे। इसके साथ ही सरकार ने इस प्रारूप पर आम जनता, किसानों और हितधारकों से अगले 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा