बीएमपी-13 लहेरियासराय में 952 महिला सिपाहियों की दीक्षांत परेड संपन्न, जोश और अनुशासन का दिखा अद्भुत संगम
दरभंगा: लहेरियासराय स्थित बीएमपी-13 (बिहार सैन्य पुलिस) का परेड ग्राउंड रविवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। यहाँ आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड में 952 महिला प्रशिक्षु सिपाहियों ने अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया और बिहार पुलिस बल का अभिन्न अंग बन गईं। इन महिला सिपाहियों की आंखों में देश सेवा का जज्बा और चेहरे पर अनुशासन का ओज साफ झलक रहा था।
36 महीने का कठिन अनुशासन
इन महिला सिपाहियों का सफर आसान नहीं था। पिछले 36 महीनों तक चले कठोर प्रशिक्षण के दौरान इन्होंने शारीरिक दक्षता, हथियार चलाने, कानून की बारीकियों, और विषम परिस्थितियों से निपटने के गुर सीखे हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाया गया, बल्कि मानसिक रूप से भी देश की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है।
परेड के दौरान जब इन सिपाहियों ने कदम से कदम मिलाकर मार्च पास्ट किया, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उनके द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया कि अब बिहार की बेटियाँ हर क्षेत्र में सुरक्षा की कमान संभालने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
डीएम कौशल कुमार की गौरवमयी उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली। डीएम ने अपने संबोधन में कहा:
"आज का दिन बिहार पुलिस और इन 952 महिला सिपाहियों के लिए गर्व का क्षण है। ये प्रशिक्षु बिहार के विभिन्न जिलों से यहाँ आई थीं, जहाँ इन्होंने तीन वर्षों तक कड़ी मेहनत की है। अब ये अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जाकर कानून व्यवस्था को मजबूत करने और समाज में सुरक्षा का वातावरण बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगी।"
जिलाधिकारी ने आगे कहा कि पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का एक महान मार्ग है, जिसे इन महिलाओं ने चुना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे अपनी कार्यकुशलता और निष्ठा से विभाग का नाम रोशन करेंगी।
प्रशिक्षण का स्वरूप: क्या-क्या सीखा?
बीएमपी-13 के अधिकारियों ने बताया कि 36 महीने के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्हें कई स्तरों पर तैयार किया गया:
शारीरिक प्रशिक्षण: लंबी दौड़, बाधा पार करना (Obstacle course) और शारीरिक सहनशीलता का अभ्यास।
शस्त्र प्रशिक्षण: आधुनिक हथियारों को चलाने, उनकी देखभाल और युद्ध कौशल का अभ्यास।
कानूनी शिक्षा: भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया और पुलिस आचरण से संबंधित कानूनी ज्ञान।
जन-संपर्क: आम जनता के साथ शालीनता और संवेदनशीलता से व्यवहार करने का प्रशिक्षण।
विभिन्न जिलों की बेटियाँ, एक संकल्प
खास बात यह है कि ये 952 महिलाएँ बिहार के अलग-अलग कोनों से आईं हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर पुलिस की वर्दी तक का यह सफर उनके परिवारों के लिए भी गर्व का विषय है। परेड के बाद जब इन महिला सिपाहियों ने अपने परिवारजनों को देखा, तो खुशी के आँसू छलक पड़े। उनके माता-पिता के लिए यह देखना एक सपने के सच होने जैसा था कि उनकी बेटियाँ अब राज्य की रक्षक बन चुकी हैं।
पुलिस बल में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में महिला सिपाहियों के शामिल होने से पुलिस थानों और सुरक्षा बलों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जिससे महिला पीड़ितों को अपनी बात रखने में अधिक सुविधा होगी। यह बदलाव राज्य के पुलिस बल को अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाएगा।
भविष्य की चुनौतियाँ और कर्तव्यनिष्ठा
पासिंग आउट परेड के समापन के साथ ही इन सिपाहियों की पहली पोस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बीएमपी-13 के कमांडेंट ने बताया कि ये जवान अब बिहार के विभिन्न जिलों में तैनात की जाएंगी, जहाँ उन्हें कानून-व्यवस्था के साथ-साथ त्योहारों, चुनाव और अन्य संवेदनशील मौकों पर शांति बनाए रखने का दायित्व सौंपा जाएगा।
समारोह के अंतिम चरणों में राष्ट्रगान के साथ परेड का समापन हुआ। लहेरियासराय का बीएमपी-13 परिसर आज नई ऊर्जा और उम्मीदों से सराबोर था। इन 952 महिला सिपाहियों का संकल्प बिहार पुलिस की ताकत को नई दिशा देगा।