केनगर प्रखंड में पंचायत समिति की आम बैठक बना अखाड़ा: बिजली विभाग की मनमानी और लचर कार्यशैली पर फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा; कनीय अभियंता के साथ तीखी नोकझोंक से मचा हड़कंप

पूर्णिया (केनगर): बिहार के पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित पंचायत समिति की आम बैठक उस समय हंगामेदार अखाड़े में तब्दील हो गई, जब बैठक के दौरान क्षेत्र में व्याप्त बिजली संकट और विद्युत विभाग की कार्यशैली का मुद्दा उठा। बैठक की अध्यक्षता संबंधित पदाधिकारियों द्वारा की जा रही थी, जिसमें प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान जैसे ही बिजली विभाग की लापरवाह कार्यशैली और मनमाने रवैये का मामला सामने आया, सदन में बैठे जनप्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हालात तब और अधिक तनावपूर्ण हो गए जब सदन में मौजूद बिजली विभाग के कनीय अभियंता (Junior Engineer) के साथ जनप्रतिनिधियों की तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

बिजली विभाग की कार्यशैली पर क्यों भड़के जनप्रतिनिधि?

बैठक की शुरुआत में विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की जा रही थी, लेकिन जैसे ही विद्युत आपूर्ति (Power Supply) और ट्रांसफॉर्मर खराब होने की समस्याओं पर चर्चा शुरू हुई, माहौल गरमा गया।

बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से त्रस्त जनता: जनप्रतिनिधियों का आरोप था कि केनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। बिजली की आंख मिचौली, अघोषित और लंबी कटौती तथा लो-वोल्टेज की समस्या से आम जनता के साथ-साथ छात्र और किसान भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

जल्द ट्रांसफॉर्मर नहीं बदलने का आरोप: सदस्यों का कहना था कि क्षेत्र में यदि कोई ट्रांसफॉर्मर जल जाता है या खराब हो जाता है, तो उसे बदलवाने के लिए विभाग के चक्कर काटते-काटते हफ्तो बीत जाते हैं, लेकिन कनीय अभियंता और विभागीय कर्मचारी कान में तेल डालकर बैठे रहते हैं। रिश्वतखोरी और बिना सुविधा शुल्क दिए काम न होने के आरोप भी खुलकर सदन में लगाए गए।

कनीय अभियंता और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक

हंगामे के बीच जब बिजली विभाग के कनीय अभियंता ने अपनी सफाई पेश करने की कोशिश की और विभागीय मजबूरियों का हवाला दिया, तो जनप्रतिनिधि और अधिक भड़क उठे।

सदन में बढ़ा पारा: कनीय अभियंता के टालमटोल वाले रवैये को देखकर समिति के सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सदस्यों ने दोटूक शब्दों में कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को झूठे आश्वासन देना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में अफरा-तफरी: तीखी नोकझोंक के दौरान सदन में कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और अध्यक्ष ने बीच-ब बचाव कर मामले को शांत कराया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो विभाग के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

अन्य विकास योजनाओं पर भी हुई चर्चा, कई मुद्दों पर बनी सहमति

विद्युत विभाग के हंगामे के अलावा बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, मनरेगा, पेयजल और सड़क जैसी अन्य बुनियादी विकास योजनाओं की भी गहन समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा: सदस्यों ने प्रखंड के अस्पतालों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति तथा दवाओं की उपलब्धता पर चर्चा की। साथ ही स्कूलों में पठन-पाठन की स्थिति को सुधारने के निर्देश दिए गए।

योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की मांग: बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पंचायत स्तर पर चल रही सभी सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और समय सीमा के भीतर किया जाए, ताकि आम जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके

केनगर प्रखंड की यह पंचायत समिति बैठक इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब प्रशासनिक अधिकारी जनता की बुनियादी जरूरतों के प्रति उदासीन रवैया अपनाते हैं, तो जनप्रतिनिधियों और जनता का आक्रोश फूट पड़ता है। बिजली विभाग के खिलाफ उठी यह आवाज इस बात का संकेत है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों की जनता अपनी समस्याओं को लेकर चुप बैठने वाली नहीं है। बैठक के अंत में अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि जल्द ही विद्युत व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा और खराब ट्रांसफॉर्मरों को बदला जाएगा, लेकिन यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में यह विरोध और अधिक उग्र हो सकता है।