आद्रा नक्षत्र में धान की बिचड़ा बोआई ने पकड़ी रफ्तार, झारखंड से बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे गया की बीज मंडी; महिला किसानों की बढ़ी भागीदारी

संवाददाता | गया

धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले आद्रा नक्षत्र की शुरुआत होते ही गया जिले में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले के किसान अपने-अपने खेतों में धान की बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करने में जुट गए हैं, वहीं पड़ोसी राज्य झारखंड के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में किसान गया की प्रसिद्ध बीज मंडी पहुंच रहे हैं। धान की अच्छी उपज के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज खरीदने की होड़ इन दिनों बीज बाजार में साफ दिखाई दे रही है।

इस बार सबसे खास बात यह है कि बीज खरीदने आने वाले किसानों में महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। महिलाएं स्वयं बीज की गुणवत्ता, किस्म और कीमत की जानकारी लेकर खरीदारी कर रही हैं। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और वे खेती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

हर दिन सुबह झारखंड के धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो और आसपास के जिलों से किसान धनबाद-गया इंटरसिटी एक्सप्रेस के माध्यम से गया जंक्शन पहुंचते हैं। स्टेशन से निकलते ही अधिकांश किसान सीधे किरानी घाट स्थित बीज मंडी की ओर रुख करते हैं। यहां स्थित दर्जनों बीज दुकानों पर सुबह से ही किसानों की भीड़ लग जाती है। किसान अपनी आवश्यकता, खेत की मिट्टी और मौसम को ध्यान में रखते हुए विभिन्न किस्मों के धान बीजों की खरीदारी कर रहे हैं।

बीज दुकानदारों का कहना है कि आद्रा नक्षत्र शुरू होते ही बिक्री में कई गुना वृद्धि हुई है। स्थानीय किसानों के साथ-साथ झारखंड से आने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। रोजाना सैकड़ों किसान बीज खरीदने पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। कई दुकानदारों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार महिलाओं की संख्या अधिक है और वे पूरी जानकारी लेकर ही बीज का चयन कर रही हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आद्रा नक्षत्र को धान की बिचड़ा बोआई के लिए अत्यंत शुभ और उपयुक्त समय माना जाता है। इस दौरान तैयार की गई नर्सरी से पौधों का विकास बेहतर होता है और बाद में खेतों में रोपाई के बाद अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि किसान इस समय का पूरा लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।

गया की बीज मंडी वर्षों से बिहार और झारखंड के किसानों के बीच अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां सरकारी प्रमाणित एवं निजी कंपनियों के उच्च गुणवत्ता वाले धान बीज उपलब्ध रहते हैं। किसान अपनी भूमि की प्रकृति, सिंचाई की सुविधा और मौसम के अनुसार विभिन्न किस्मों का चयन करते हैं। बाजार में कम अवधि, मध्यम अवधि और अधिक अवधि में तैयार होने वाली धान की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं।

झारखंड से आए कई किसानों ने बताया कि गया की बीज मंडी में गुणवत्तापूर्ण बीज उचित कीमत पर मिल जाते हैं। इसके अलावा यहां विभिन्न किस्मों की उपलब्धता भी अधिक रहती है, जिससे उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार बीज चुनने में सुविधा होती है। किसानों का कहना है कि अच्छे बीज से ही अच्छी फसल की नींव पड़ती है, इसलिए वे हर वर्ष गया आकर बीज खरीदना पसंद करते हैं।

महिला किसानों ने बताया कि अब वे खेती के हर कार्य में पुरुषों के साथ बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। बीज का चयन, बिचड़ा तैयार करना, रोपाई, निराई-गुड़ाई और कटाई तक हर चरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में वे स्वयं बाजार पहुंचकर बीज खरीदना अधिक उचित समझती हैं ताकि गुणवत्तापूर्ण बीज का चुनाव किया जा सके।

बीज मंडी में इन दिनों सुबह से शाम तक किसानों की चहल-पहल बनी रहती है। दुकानदार किसानों को विभिन्न बीजों की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा खेती की तकनीक के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। कई दुकानों पर कृषि विशेषज्ञ किसानों को बीज उपचार और आधुनिक खेती के तरीकों के संबंध में भी सलाह दे रहे हैं।

जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि प्रमाणित बीजों के उपयोग से उत्पादन बढ़ता है, रोगों का प्रकोप कम होता है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है। विभाग किसानों को समय पर नर्सरी तैयार करने, बीज उपचार करने तथा संतुलित उर्वरकों के प्रयोग की भी सलाह दे रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बदलते मौसम और अनियमित वर्षा को देखते हुए किसानों को ऐसी धान किस्मों का चयन करना चाहिए जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। साथ ही खेतों की उचित तैयारी, समय पर सिंचाई और वैज्ञानिक पद्धति से रोपाई करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे उत्पादन लागत कम होगी और उपज में वृद्धि होगी।

व्यापारियों का कहना है कि इस बार धान बीज की मांग पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसके चलते कई लोकप्रिय किस्मों की बिक्री तेजी से हो रही है। हालांकि बाजार में पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध है और फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। दुकानदारों ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत दुकानों से ही प्रमाणित बीज खरीदें और खरीदारी के समय रसीद अवश्य लें।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धान की खेती बिहार और झारखंड के लाखों किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता और समय पर बिचड़ा तैयार होना पूरे कृषि सत्र की सफलता तय करता है। यही कारण है कि गया की बीज मंडी इन दिनों किसानों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

कुल मिलाकर, आद्रा नक्षत्र के आगमन के साथ धान की खेती की तैयारियां पूरे जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। गया की बीज मंडी में स्थानीय किसानों के साथ-साथ झारखंड से आने वाले किसानों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि गुणवत्तापूर्ण बीजों की मांग लगातार बढ़ रही है। महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी भी कृषि क्षेत्र में बदलते सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य का संकेत दे रही है। आने वाले दिनों में यदि मौसम अनुकूल रहा, तो किसान बेहतर उत्पादन और अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे हैं।