दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ बनमा ईटहरी में उबाल: विपक्ष के संयुक्त प्रदर्शन से गरमाई सियासत
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में देश के अन्य हिस्सों की तरह बिहार में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में सहरसा जिले के बनमा ईटहरी प्रखंड में विपक्षी दलों द्वारा एक जोरदार और व्यापक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया।
शनिवार को आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जन अधिकार पार्टी (JAP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता सड़कों पर उतरे। इस दौरान केंद्र और दिल्ली प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, जिससे पूरा इलाका सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा।
बनमा ईटहरी में प्रदर्शन का मुख्य नजारा
शनिवार की सुबह से ही बनमा ईटहरी प्रखंड मुख्यालय और मुख्य बाजारों में विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। हाथों में अपने-अपने दलों के झंडे, बैनर और जंतर-मंतर की घटना के विरोध से संबंधित तख्तियां थामे युवाओं और नेताओं ने मार्च निकाला।
सड़कों पर उतरा विपक्ष: तमाम विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर प्रमुख चौराहों पर पहुंचे और वहां एक विरोध सभा का आयोजन किया।
केंद्र सरकार पर निशाना: प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की तानाशाही रवैये की कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि देश में छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिसिया बल का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यापक जनसमर्थन: इस विरोध प्रदर्शन को स्थानीय स्तर पर भी अच्छा-खासा समर्थन मिला, और बाजार के कई हिस्सों में लोग इस विरोध के समर्थन में अपनी दुकानों के बाहर खड़े नजर आए।
प्रमुख विपक्षी दलों की सहभागिता और उनके तीखे तेवर
बनमा ईटहरी में हुए इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत विभिन्न विपक्षी दलों का एक मंच पर आना रहा। महाठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि छात्रों पर अत्याचार के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है।
कांग्रेस पार्टी की भूमिका
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर इस अधिकार को कुचलना चाहती है।
राजद का आक्रामक रुख
राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार युवाओं और छात्रों से डर गई है। जंतर-मंतर पर छात्रों का खून बहाया जाना इस सरकार के पतन की शुरुआत है।
जन अधिकार पार्टी (JAP) और भाकपा का समर्थन
JAP और भाकपा के स्थानीय नेताओं ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा जैसे बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाने के लिए छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों पर अत्याचार बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन प्रखंड स्तर से निकलकर जिला और राज्य स्तर पर और अधिक उग्र रूप ले लेगा।
जंतर-मंतर की घटना और उसका राष्ट्रीय प्रभाव
यह पूरा विरोध प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई उस घटना की प्रतिक्रिया थी, जहां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्र हित और अन्य प्रशासनिक विसंगतियों के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। आरोप है कि बिना किसी उकसावे के दिल्ली पुलिस ने वहां लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इस घटना की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और लोकतांत्रिक तरीकों से किए जाने वाले हर विरोध को कुचलने के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
प्रशासनिक चौकसी और शांतिपूर्ण समापन
बनमा ईटहरी में विपक्षी दलों के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय थाना और प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने और विधि-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मुख्य चौराहों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
हालांकि, विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में यह पूरा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा। कार्यकर्ताओं ने केवल नारेबाजी की और सभा के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रशासन के सहयोग और नेताओं के संयम के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बनमा ईटहरी प्रखंड में विपक्षी दलों द्वारा किया गया यह संयुक्त प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली की घटना का असर अब ग्रामीण और प्रखंड स्तर तक पहुंच चुका है। छात्र उत्पीड़न के मुद्दे पर विपक्ष का यह एकजुट होना आगामी राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंत में, नेताओं ने संकल्प लिया कि वे छात्रों के अधिकारों की इस लड़ाई में हर कदम पर उनके साथ खड़े रहेंगे और जब तक केंद्र सरकार इस दमनकारी नीति के लिए माफी नहीं मांगती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक उनका यह वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष विभिन्न रूपों में जारी रहेगा।