केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भागलपुर में उग्र प्रदर्शन; तिलकामांझी से मनाली चौक तक बंद समर्थकों ने काटा हंगामा, पुलिस प्रशासन के छूटे पसीने
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और गर्माए हुए राष्ट्रीय मुद्दे की गूंज अब रेशमी नगरी भागलपुर में भी जोर-शोर से सुनाई देने लगी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भागलपुर शहर के विभिन्न हिस्सों में आज बंद समर्थकों और विभिन्न राजनीतिक-छात्र संगठनों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। विरोध प्रदर्शनकारियों ने सुबह से ही शहर के प्रमुख चौराहों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम शहर के अति-व्यस्त माने जाने वाले तिलकामांझी चौक से लेकर मनाली चौक तक सड़कों पर उतर आया और केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस उग्र प्रदर्शन के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के हाथ-पैर फूल गए हैं, और विधि-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है।
क्या है विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण और क्यों सुलग रहा है मामला?
पिछले कुछ हफ्तों से देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन, पेपर लीक मामलों और शिक्षा प्रणाली में कथित धांधली को लेकर छात्रों और युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी राष्ट्रव्यापी असंतोष और विरोध की कड़ी में आज भागलपुर में भी विभिन्न विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और युवा मंचों के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन व मार्च निकाला गया।
प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बार-बार हो रही प्रशासनिक लापरवाहियों के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं।
इसी नैतिक जिम्मेदारी को आधार बनाते हुए प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
उनका यह भी आरोप है कि सरकार शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुधार करने के बजाय समस्याओं से पल्ला झाड़ रही है, जिसे युवा वर्ग और छात्र अब कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
तिलकामांझी चौक से मनाली चौक तक दिखा उग्र नजारा
शुक्रवार को सुबह होते ही बंद समर्थक और कार्यकर्ता हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर शहर के ऐतिहासिक तिलकामांझी चौक पर इकट्ठा होने शुरू हो गए। धीरे-धीरे यह भीड़ एक बड़े जुलूस में तब्दील हो गई और नारेबाजी करते हुए मनाली चौक की ओर बढ़ने लगी।
सड़कों पर यातायात ठप: जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर बैठकर टायर जलाए और सरकार विरोधी नारे लगाए, जिससे तिलकामांझी से मनाली चौक और उसके आसपास के तमाम संपर्क मार्ग पूरी तरह से जाम हो गए।
दुकानें और प्रतिष्ठान बंद कराने की कोशिश: प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर जोश में आए कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे खुली दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी बंद कराने का प्रयास किया, जिससे दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की नोकझोंक की स्थिति भी उत्पन्न हुई।
आम नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें: सड़क मार्ग पूरी तरह से बाधित होने के कारण अपने दफ्तरों, स्कूलों और अस्पतालों की ओर जा रहे आम नागरिकों, मरीजों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई एंबुलेंस भी इस जाम में काफी देर तक फंसी रहीं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में
शहर के बीचों-बीच इस प्रकार के अचानक और उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस के अलावा जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए। स्थिति के बेकाबू होने की आशंका को देखते हुए तिलकामांझी चौक और मनाली चौक के बीच भारी मात्रा में पुलिस बल, वज्र वाहन (Vajra Vehicle) और महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
प्रशासनिक अपील: पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की।
बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा: प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि प्रदर्शनकारी उग्र होकर किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुँचा सकें या किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दे सकें। हालांकि, पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा था और वे लगातार केंद्रीय मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
राजनीतिक सरगर्मी तेज, विपक्षी दलों का समर्थन
भागलपुर की सड़कों पर उतरे इस उग्र प्रदर्शन को स्थानीय स्तर पर कई राजनीतिक दलों और वामपंथी छात्र संगठनों का खुला समर्थन प्राप्त था। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि देशव्यापी स्तर पर युवा और छात्र संगठन इस मांग को लेकर लगातार लामबंद हो रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यदि समय रहते सरकार और प्रशासन ने इस असंतोष को बातचीत या ठोस कदमों से शांत नहीं किया, तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
भागलपुर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर तिलकामांझी से मनाली चौक तक दिखा यह उग्र प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की राष्ट्रीय राजनीति की तपिश अब मैदानी इलाकों और छोटे शहरों तक पूरी शिद्दत के साथ पहुंच चुकी है। पुलिस प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन इस हंगामे ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र और व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या राजनीतिक स्तर पर इस विरोध का कोई समाधान निकलता है।