नवगछिया में बाढ़ का खतरा गंगा और कोसी के उफान ने बढ़ाई तटवर्ती इलाकों की चिंता, प्रशासन अलर्ट
नवगछिया (भागलपुर): बिहार के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में हो रही निरंतर वृद्धि ने स्थानीय निवासियों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी के कारण दोनों प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, गंगा और कोसी का जलस्तर न्यूनतम जलस्तर (Danger Level) से काफी ऊपर बह रहा है, जिससे तटबंधों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
जलस्तर की स्थिति: खतरनाक स्तर की ओर अग्रसर
बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, नवगछिया में गंगा नदी का जलस्तर वर्तमान में 27.67 मीटर पर दर्ज किया गया है, जो इसके न्यूनतम निर्धारित जलस्तर से 3.67 मीटर ऊपर है। वहीं, कोसी नदी की स्थिति और भी विकट बनी हुई है। कोसी का जलस्तर 28.40 मीटर तक पहुंच गया है, जो इसके न्यूनतम जलस्तर से 3.90 मीटर ऊपर है। नदियों का यह बढ़ता हुआ रुख आने वाले दिनों में और अधिक तबाही का संकेत दे रहा है।
तटबंधों पर बढ़ा दबाव: 'गस्ती' तेज
गंगा और कोसी के जलस्तर में वृद्धि के कारण नवगछिया के निचले इलाकों के तटबंधों पर पानी का जबरदस्त दबाव बन गया है। गोपालपुर, रंगरा और नवगछिया प्रखंड के कई संवेदनशील तटबंधों पर स्थानीय प्रशासन ने विशेष निगरानी बढ़ा दी है। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम चौबीसों घंटे तटबंधों की 'पेट्रोलिंग' (गस्ती) कर रही है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जहां कहीं भी कटाव या रिसाव की हल्की सी भी संभावना दिख रही है, वहां तुरंत 'एंटी-इरोजन' (कटाव निरोधी) कार्य शुरू कर दिए जा रहे हैं।
निचले इलाकों में दहशत का माहौल
नदियों के उफान ने नवगछिया के दियारा क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। गंगा और कोसी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। मवेशियों के चारे और उनके आश्रय की व्यवस्था करना ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कई गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट चुका है, और नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन रह गई है।
प्रशासनिक तैयारियां और राहत कार्य
अनुमंडल प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली है। जिलाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
नावों का परिचालन: बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में सरकारी और निजी नावों को चिह्नित कर लिया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में लोगों को निकाला जा सके।
बाढ़ राहत शिविर: ऊंचे स्थानों पर राहत शिविरों को तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। वहां पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन, शुद्ध पेयजल, और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
पशु चिकित्सा: मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था और टीकाकरण के लिए पशुपालन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
'नजर रखें और सतर्क रहें'
प्रशासन ने दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की अफवाओं पर ध्यान न दें और नदी के पास जाने से बचें। स्थानीय मुखियाओं और जनप्रतिनिधियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखें और किसी भी असामान्य गतिविधि या तटबंध में दरार की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को दें।
जलवायु परिवर्तन और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में गंगा और कोसी के जलस्तर में होने वाली यह अप्रत्याशित वृद्धि जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। जलप्रवाह की अनिश्चितता और गाद (Silt) के जमाव के कारण नदियों की धारण क्षमता कम हो गई है, जिससे कम पानी आने पर भी जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ जाता है।
नवगछिया में बाढ़ का यह तांडव न केवल फसलों को बर्बाद कर रहा है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा रहा है। अब सबकी निगाहें आसमान और जल संसाधन विभाग के उन दावों पर टिकी हैं, जिनमें तटबंधों की मजबूती का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हर संभावित खतरे से निपटने के लिए संसाधन तैनात कर दिए गए हैं।