वार्ड 13 में पिछले 15 दिनों से ठप है नल-जल योजना, कम वोल्टेज का बहाना बना रहे पंप चालक से त्रस्त ग्रामीण
भागलपुर/शाहकुंड: भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड अंतर्गत आने वाली जगरिया पंचायत के वार्ड संख्या 13 में पिछले 15 दिनों से पीने के पानी के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है। पिछले दो हफ्तों से जलापूर्ति पूरी तरह बाधित होने के कारण स्थानीय ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस भरे इस मौसम में पानी न मिलने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, और ग्रामीणों का गुस्सा अब धीरे-धीरे प्रशासनिक व्यवस्था पर फूटने लगा है।
पिछले 15 दिनों से क्यों ठप है जलापूर्ति?
ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड संख्या 13 में स्थापित जलापूर्ति योजना का मोटर और पंप पिछले 15 दिनों से एक बूंद भी पानी नहीं उगल पाया है। जब स्थानीय लोगों ने इस समस्या की तह तक जाने की कोशिश की और पंप चालक से संपर्क किया, तो एक अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना जवाब सामने आया। पंप चालक का कहना है कि इलाके में बिजली का वोल्टेज बहुत कम रहता है, जिसके कारण वह भारी मोटर को चलाने में असमर्थ है और इसी वजह से उसने सेवा को पूरी तरह बाधित कर रखा है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कम वोल्टेज का बहाना महज एक छलावा और लापरवाही पर पर्दा डालने का जरिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में वोल्टेज की समस्या थी, तो इसकी सूचना तुरंत बिजली विभाग या पंचायत के जनप्रतिनिधियों को दी जानी चाहिए थी, लेकिन किसी ने भी इस दिशा में कोई सुधि नहीं ली। पिछले 15 दिनों से बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पानी की आपूर्ति बंद रखना विभाग और संबंधित कर्मियों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
महिलाओं और बच्चों की बढ़ गई है मुश्किलें
नल-जल योजना के बंद होने से सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति घरों की महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों की हो गई है। अमूमन हर घर में सुबह और शाम नल से पानी आने का जो समय निर्धारित था, वह अब पूरी तरह बंद है।
दूर-दराज से पानी लाने की मजबूरी: पीने और खाना बनाने के लिए पानी जुटाने के वास्ते महिलाओं को अपने दैनिक घरेलू कामों को छोड़कर काफी दूर स्थित चापाकल या निजी बोरिंगों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
खराब पड़े चापाकल: ग्रामीणों का यह भी दर्द है कि इलाके में लगे कई सरकारी चापाकल या तो पहले से खराब पड़े हैं या फिर उनका जलस्तर नीचे चला गया है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है या फिर दूसरों की मिन्नतें करनी पड़ती हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर असर: सुबह-सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था करना माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से आक्रोश
जगरिया पंचायत के वार्ड संख्या 13 के निवासियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि समस्या को डेढ़ हफ्ता से अधिक बीत जाने के बावजूद न तो पंचायत के मुखिया ने और न ही वार्ड सदस्य ने इस गंभीर समस्या की सुध ली है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) या पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के कानों पर भी जूं तक नहीं रेंगी है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठा आश्वासन ही मिला। पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए तरस रहे लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो उन्हें प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
स्थानीय बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और शाहकुंड के प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
वार्ड संख्या 13 के जलापूर्ति पंप को तुरंत चालू कराया जाए।
यदि वोल्टेज की कोई वास्तविक समस्या है, तो वहां स्टेबलाइजर या वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था की जाए।
जनता को गुमराह करने वाले और अपनी जिम्मेदारी से भागने वाले पंप चालक तथा संबंधित लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के अभाव में जगरिया पंचायत के वार्ड 13 के लोग हर दिन संघर्ष करने को विवश हैं। देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन इस गंभीर जलसंकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।