दरभंगा के केवटी की बेटी नादिया रोमान ने नीट (NEET) परीक्षा में लहराया परचम: 595 अंक और 4819 रैंक प्राप्त कर जिले का नाम किया रोशन

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले से एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और गौरवशाली सफलता की कहानी सामने आई है। जिले के केवटी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले पैगंबरपुर गांव की मेधावी बेटी नादिया रोमान ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) में शानदार सफलता हासिल की है। नादिया ने इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में 595 अंक प्राप्त करते हुए ऑल इंडिया स्तर पर 4819 रैंक हासिल की है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता से न केवल उनके परिवार और पैगंबरपुर गांव में बल्कि पूरे दरभंगा जिले में जश्न का माहौल है और हर कोई उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

अकादमिक सफर में पहले से ही अव्वल रही हैं नादिया

होनहार नादिया रोमान की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षा के प्रति अटूट लगन जुड़ी है। नादिया अपनी शुरुआती और स्कूली शिक्षा के दौरान से ही अकादमिक रूप से बेहद प्रतिभाशाली रही हैं।

मैट्रिक और इंटरमीडिएट में रह चुकी हैं टॉपर: नादिया की शैक्षणिक प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) दोनों ही कक्षाओं में अपने संस्थान और क्षेत्र की टॉपर रह चुकी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई के हर चरण में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा पहले ही मनवा लिया था।

शुरुआत से था डॉक्टर बनने का सपना: उनके परिवारजनों के अनुसार, नादिया बचपन से ही पढ़ाई में काफी अनुशासित थीं और उनका मुख्य लक्ष्य समाज की सेवा करना तथा एक कुशल चिकित्सक (Doctor) बनकर देश और समाज की सेवा करना था। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बिना विचलित हुए अपनी पूरी ऊर्जा नीट की तैयारी में झोंक दी थी।

नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता की राह

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) देश के सबसे टफ कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में गिनी जाती है, जिसमें हर साल लाखों की संख्या میں छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों और छोटे ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने के बावजूद नादिया ने जिस प्रकार 595 अंक और 4819 रैंक हासिल की है, वह अन्य छात्र-छात्राओं के लिए भी एक मिसाल बन गई है।

कड़ी मेहनत और स्वाध्याय (Self-Study): परीक्षा की तैयारी के दौरान नादिया ने अपनी दिनचर्या को बेहद सख्त रखा था। भौतिकी (Physics), रसायन शास्त्र (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) के जटिल सिद्धांतों को समझकर लगातार अभ्यास करना उनकी सफलता की मुख्य कुंजी रहा।

संकट और दबाव के बीच संतुलन: परीक्षा की लंबी तैयारी के दौरान आने वाले मानसिक दबाव और तनाव को उन्होंने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के आशीर्वाद को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।

परिवार और क्षेत्र में जश्न का माहौल, बधाई देने वालों का तांता

नादिया रोमान के नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पैगंबरपुर और केवटी प्रखंड में फैली, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

माता-पिता और परिजनों की खुशी: नादिया की इस सफलता पर उनके माता-पिता, भाई-बहन और अन्य सगे-संबद्ध बेहद गदगद हैं। परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी ने अपनी मेहनत से पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। माता-पिता ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में हरसंभव सहयोग दिया और आज उनकी मेहनत रंग लाई है।

स्थानीय प्रबुद्ध जनों और गणमान्य लोगों की प्रतिक्रिया: केवटी क्षेत्र के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने नादिया के घर पहुंचकर उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किए और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। लोगों का कहना है कि नादिया ने ग्रामीण परिवेश की बेटियों के लिए यह साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और सच्ची लगन हो, तो किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए बनी प्रेरणा स्रोत

नादिया रोमान की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन तमाम बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखती हैं। उनकी इस सफलता से यह संदेश जाता है कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और अपनी प्रतिभा के दम पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपने परिवार, समाज और जिले का नाम रोशन कर रही हैं। डॉक्टर बनकर गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करने का उनका संकल्प अब पूरा होने के करीब है, और पूरा दरभंगा जिला उनके मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने तथा भविष्य के सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दे रहा है।