करोड़ों की परियोजना रखरखाव के अभाव में बेकार, दाह संस्कार करने आने वाले लोग भी परेशान

पटना। राजधानी पटना के ऐतिहासिक पटना सिटी क्षेत्र स्थित खाजेकलां घाट की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। नगर निगम के अजीमाबाद अंचल अंतर्गत आने वाले इस घाट को इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस कर विकसित किया गया था, ताकि स्थानीय लोगों, पर्यटकों और अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन वर्तमान में रखरखाव के अभाव में यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।

घाट पर विकसित की गई अधिकांश सुविधाएं या तो बंद पड़ी हैं या जर्जर हो चुकी हैं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जो अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए यहां पहुंचते हैं। शोक में डूबे परिवारों को यहां पीने के पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं सुबह-शाम गंगा किनारे टहलने आने वाले स्थानीय नागरिक और शहर घूमने आने वाले पर्यटक भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में निराश लौट रहे हैं।

करोड़ों की लागत से हुआ था विकास

खाजेकलां घाट को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए इंडियन ऑयल फाउंडेशन ने यहां करोड़ों रुपये खर्च कर व्यापक विकास कार्य कराया था। घाट की सीढ़ियों का सौंदर्यीकरण, आकर्षक बैठने की व्यवस्था, पेयजल की सुविधा, आधुनिक शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, हरियाली और अन्य जनसुविधाओं का निर्माण किया गया था। उद्देश्य था कि गंगा तट पर आने वाले लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

शुरुआती दिनों में यह घाट स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग यहां सैर करने, गंगा दर्शन करने और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने आते थे। लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी ने इस पूरे परिसर की तस्वीर बदल दी।

पेयजल और शौचालय की सुविधा ठप

घाट पर सबसे गंभीर समस्या पेयजल और शौचालय की है। यहां लगाए गए वाटर कूलर और पेयजल पाइपलाइन लंबे समय से बंद पड़े हैं। गर्मी और उमस के मौसम में लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

इसी प्रकार आधुनिक शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं। कहीं ताले लगे हैं तो कहीं सफाई के अभाव में उनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज से आने वाले लोगों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह समस्या और भी गंभीर बन गई है।

अंतिम संस्कार करने आने वाले परिवारों की बढ़ी परेशानी

पटना सिटी समेत आसपास के कई इलाकों से लोग अंतिम संस्कार के लिए खाजेकलां घाट पहुंचते हैं। ऐसे समय में परिवार पहले से ही मानसिक रूप से बेहद दुखी होता है। लेकिन घाट पर मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।

शव यात्रा के साथ आने वाले लोगों को घंटों घाट पर रुकना पड़ता है, लेकिन पीने के पानी और स्वच्छ शौचालय जैसी सामान्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कई लोगों ने बताया कि मजबूरी में उन्हें आसपास की दुकानों या निजी प्रतिष्ठानों का सहारा लेना पड़ता है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी

खाजेकलां घाट सिर्फ श्मशान घाट नहीं बल्कि गंगा तट का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सुबह की सैर, योग और गंगा दर्शन के लिए यहां आते हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों और शहरों से आने वाले पर्यटक भी इस घाट का भ्रमण करते हैं।

लेकिन खराब रखरखाव, गंदगी और सुविधाओं के अभाव के कारण पर्यटकों पर शहर की नकारात्मक छवि बन रही है। कई लोगों का कहना है कि यदि नियमित सफाई और रखरखाव हो तो यह घाट राजधानी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।

साफ-सफाई पर भी उठ रहे सवाल

घाट परिसर में कई स्थानों पर कूड़े का अंबार देखा जा सकता है। नियमित सफाई नहीं होने से वातावरण प्रभावित हो रहा है। कुछ स्थानों पर उगी झाड़ियां और टूटी हुई संरचनाएं भी प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां करती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यदि उसकी नियमित देखरेख नहीं की जाए तो पूरी परियोजना का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग समय-समय पर निरीक्षण भी नहीं करता।

स्थानीय लोगों ने उठाई रखरखाव की मांग

इलाके के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से घाट की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।

लोगों का यह भी सुझाव है कि घाट के रखरखाव के लिए एक स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना फिर से लोगों के लिए उपयोगी बन सके।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है

खाजेकलां घाट का धार्मिक महत्व भी काफी अधिक है। गंगा स्नान, पूजा-पाठ, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और पर्व-त्योहारों पर यहां हजारों लोगों की भीड़ जुटती है।

ऐसे महत्वपूर्ण स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए तो यहां आने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।

नगर निगम से लोगों की अपेक्षा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को केवल निर्माण कार्य कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं माननी चाहिए। किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता उसके नियमित रखरखाव पर निर्भर करती है।

लोगों ने मांग की है कि घाट पर बंद पड़ी पेयजल व्यवस्था को तुरंत चालू कराया जाए, शौचालयों की सफाई और मरम्मत कराई जाए, नियमित सफाई अभियान चलाया जाए तथा सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए।

जल्द कार्रवाई की उम्मीद

खाजेकलां घाट की बदहाल स्थिति अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी।

अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं और घाट पर मूलभूत सुविधाओं को बहाल कर आम लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, खाजेकलां घाट पर आने वाले लोग बेहतर व्यवस्था की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।