सन्हौला में मुहर्रम मेले का आयोजन: पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दिखा सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा नजारा
सन्हौला (भागलपुर): सन्हौला थाना परिसर में शुक्रवार को मुहर्रम के अवसर पर विशेष मेले का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि क्षेत्र में शांति और आपसी भाईचारे की मिसाल के रूप में भी सामने आया। अकीदत और उल्लास के साथ संपन्न हुए इस मुहर्रम मेले में भारी संख्या में स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों ने शिरकत की।
थाना परिसर बना मिलन का केंद्र
आमतौर पर कानूनी कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले थाना परिसर को मुहर्रम मेले के दौरान एक सौहार्दपूर्ण केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। सन्हौला प्रशासन और शांति समिति के संयुक्त प्रयासों से इस मेले का आयोजन किया गया था। इमाम हुसैन की शहादत की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मेले में मिठाइयों, खिलौनों और स्थानीय उत्पादों की दुकानें सजी थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल था। हालांकि, यह आयोजन पूरी तरह से मर्यादित और शांतिपूर्ण रहा।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
सन्हौला के इस मुहर्रम मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू समुदाय के लोगों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे को गले लगाकर मुहर्रम की गंभीरता और इसके संदेशों पर चर्चा करते दिखे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस आयोजन को सन्हौला की 'गंगा-जमुनी संस्कृति' का प्रतीक बताया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में एकता की भावना मजबूत होती है और नफरत के लिए कोई जगह नहीं बचती।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा इंतजाम
मेले के आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सन्हौला थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा।
सीसीटीवी निगरानी: मेला स्थल के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे और पुलिस पिकेट की तैनाती की गई थी।
शांति समिति की भूमिका: स्थानीय शांति समिति के सदस्यों ने पूरे दिन पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और भीड़ को अनुशासित रखने में सहयोग दिया।
ट्रैफिक प्रबंधन: भारी भीड़ के कारण संभावित जाम को रोकने के लिए थाना परिसर के बाहर ट्रैफिक को नियंत्रित करने की विशेष व्यवस्था की गई थी।
कर्बला की याद में मातम और दुआएं
मेले के दौरान जहां एक ओर उत्सव का माहौल था, वहीं दूसरी ओर कर्बला के शहीदों के प्रति गहरा सम्मान भी देखने को मिला। इमामबाड़ों से आए अकीदतमंदों ने मातम मनाया और देश में अमन-चैन के लिए विशेष दुआएं मांगी। देर शाम तक चले इस मेले का समापन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, जिससे प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
सन्हौला में मुहर्रम मेले का आयोजन क्षेत्र की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करने वाला रहा। यह आयोजन संदेश देता है कि जब प्रशासन और समाज के गणमान्य व्यक्ति मिलकर प्रयास करते हैं, तो कोई भी त्योहार शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो सकता है। सन्हौला प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से मुहर्रम संपन्न कराने के लिए सभी अखाड़ा समितियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया है।