लोकसभा में गूंजी नवगछिया और विक्रमशिला की आवाज; सांसद अजय कुमार मंडल ने केंद्र सरकार से की नए केंद्रीय विद्यालय और विश्वविद्यालय निर्माण की पुरजोर मांग

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में भागलपुर संसदीय क्षेत्र के विकास और यहां की शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी क्रम में भागलपुर के लोकप्रिय सांसद अजय कुमार मंडल ने संसद के सत्र के दौरान लोकसभा में एक जोरदार आवाज उठाई। सांसद ने सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए भागलपुर जिले के महत्वपूर्ण नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में नए केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) की स्थापना तथा ऐतिहासिक व पौराणिक धरोहर विक्रमशिला विश्वविद्यालय के शीघ्र और सुचारू निर्माण की मांग प्रमुखता से रखी। सांसद की इस मांग के बाद भागलपुर और नवगछिया के राजनीतिक व शैक्षणिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, और स्थानीय युवाओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया है।

क्या है पूरा मामला और संसद में क्या बोले सांसद?

संसद की कार्यवाही के दौरान भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने अपने संबोधन में क्षेत्र की भौगोलिक और शैक्षणिक स्थिति का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भागलपुर सिर्फ बिहार का एक ऐतिहासिक जिला ही नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र का प्रमुख व्यावसायिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है।

सांसद ने सदन को बताया कि नवगछिया एक विस्तृत और घनी आबादी वाला अनुमंडल क्षेत्र है, जहाँ दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से छात्र उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं। लेकिन केंद्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों की कमी के कारण यहाँ के मेधावी बच्चों को उचित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मांग की कि नवगछिया में अविलंब एक नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की जाए ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी केंद्रीय स्तर की बेहतरीन शिक्षा सुलभ हो सके।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण में तेजी लाने की पुरजोर मांग

अपने संबोधन का एक बड़ा हिस्सा सांसद अजय कुमार मंडल ने प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार और नए केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण को समर्पित किया। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष यह बात मजबूती से रखी कि प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म और शिक्षा का एक विश्व प्रसिद्ध केंद्र रहा है, और इसके गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए आधुनिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।

शैक्षणिक विकास को गति: सांसद ने कहा कि विक्रमशिला के निर्माण से न केवल भागलपुर बल्कि पूरे सीमांचल और कोसी क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।

रोजगार और क्षेत्र का विकास: इस विश्वविद्यालय के बन जाने से इस पिछड़े और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और वैश्विक स्तर पर अकादमिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

भागलपुर के मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों का दिया हवाला

सांसद ने सदन में यह भी बताया कि भागलपुर में पहले से ही तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU), भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (BCE), और जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLNMC) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं, जो दशकों से इस क्षेत्र के साथ-साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल के छात्रों को भी शिक्षा दे रहे हैं।

लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी और आधुनिक शिक्षा की बदलती माँगों को पूरा करने के लिए अब नए और अत्याधुनिक संस्थानों की आवश्यकता है।

सांसद ने तर्क दिया कि यदि भागलपुर और नवगछिया जैसे उप-क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार किया जाता है, तो यहाँ का छात्र पलायन करने के लिए विवश नहीं होगा।

स्थानीय जनता और शिक्षाविदों में जगी उम्मीद

सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा लोकसभा में नवगछिया में केंद्रीय विद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण का मुद्दा उठाए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर खुशी की लहर दौड़ गई है। शहर के शिक्षकों, शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने इस कदम की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इस दिशा में सकारात्मक और त्वरित कदम उठाती है, तो भागलपुर एक बार फिर से देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल कर सकेगा।

भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा लोकसभा में उठाया गया यह कदम इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय विकास और शिक्षा का मुद्दा अब नीति निर्माताओं की प्राथमिकता में है। नवगछिया में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना और विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण की यह मांग यदि धरातल पर उतरती है, तो यह भागलपुर के शैक्षणिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय इस दिशा में क्या और कब तक ठोस कदम उठाते हैं।