मानसून बेअसर, बिहार में फिर बढ़ी गर्मी; कई जिलों में बारिश के बादल गायब, किसान और आम लोग परेशान

पटना। बिहार में मानसून के आगमन के बावजूद मौसम का मिजाज लोगों को राहत देने के बजाय चिंता बढ़ा रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है और आसमान से वर्षा वाले बादल लगभग गायब हो गए हैं। नतीजतन तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उमस भरी गर्मी और तेज धूप ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, जबकि बारिश के इंतजार में बैठे किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को उत्तर बिहार के कुछ जिलों में हल्के से मध्यम स्तर तक मेघ गर्जन और छिटपुट वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। ऐसे में लोगों को अभी गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद कम है।

मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी

बिहार में मानसून के प्रवेश के बाद शुरुआती दिनों में कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन इसके बाद मानसून कमजोर पड़ गया। लगातार कई दिनों से पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम होती जा रही है और जलस्तर पर भी असर पड़ने लगा है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता कमजोर होने के कारण वर्षा वाले बादल बिहार की ओर पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहे हैं। यही वजह है कि अधिकांश जिलों में धूप और उमस का असर लगातार बढ़ रहा है।

बढ़ते तापमान से लोग बेहाल

बारिश नहीं होने के कारण दिन के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। दोपहर के समय तेज धूप लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। शहरों में सड़कें दोपहर के समय अपेक्षाकृत सुनसान नजर आ रही हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग अत्यधिक गर्मी से परेशान हैं।

उमस के कारण लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही। बिजली की खपत बढ़ गई है क्योंकि पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का उपयोग पहले की तुलना में अधिक हो रहा है।

किसानों की चिंता बढ़ी

मानसून की बेरुखी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की रोपनी कई इलाकों में प्रभावित हो रही है। जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है, वे पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण रोपाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

कई स्थानों पर किसानों को डीजल पंप के जरिए सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी चुनौती बन गया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उत्तर बिहार में बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार रविवार को उत्तर बिहार के कुछ जिलों में बादल गरजने, बिजली चमकने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हालांकि यह वर्षा सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जहां बारिश होगी वहां तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की जा सकती है, लेकिन जिन जिलों में बारिश नहीं होगी वहां गर्मी और उमस बनी रहने की संभावना है।

दक्षिण बिहार में अधिक गर्मी

दक्षिण बिहार के कई जिलों में फिलहाल बारिश की संभावना अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। वहां तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है। तेज धूप और नमी के कारण लोगों को हीट स्ट्रेस जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है।

खेती पर पड़ सकता है व्यापक असर

यदि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक कमजोर बनी रहती है तो इसका असर केवल धान ही नहीं बल्कि मक्का, दलहन और अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर वर्षा नहीं होने से फसल की वृद्धि प्रभावित होगी और उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ जाएगी। इससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

जल संकट की भी बढ़ी आशंका

बारिश की कमी केवल खेती तक सीमित नहीं है। यदि यही स्थिति बनी रही तो तालाब, पोखर और छोटे जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से घट सकता है। भूजल स्तर पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है।

प्रशासन की नजर मौसम पर

राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कृषि विभाग भी जिलों से फसल और वर्षा की नियमित रिपोर्ट ले रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को उचित सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

मौसम विभाग भी लगातार पूर्वानुमान जारी कर रहा है और लोगों से बिजली गिरने तथा मेघ गर्जन के दौरान सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

अगले कुछ दिन होंगे अहम

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि मानसून दोबारा सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है तो खेती को राहत मिल सकती है तथा तापमान में भी गिरावट आएगी। लेकिन यदि वर्षा की कमी बनी रहती है तो गर्मी, उमस और सूखे जैसी परिस्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।

फिलहाल बिहार के किसान, आम नागरिक और प्रशासन सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। अच्छी बारिश ही खेती को नई उम्मीद दे सकती है और लोगों को भी भीषण गर्मी से राहत दिला सकती है।