MGNREGA का बदला नाम: अब 'जी राम जी' के नाम से जानी जाएगी ग्रामीण रोजगार योजना, 2026 से लागू होगी नई पहचान
सिकटी (अररिया)। ग्रामीण भारत में रोजगार उपलब्ध कराने वाली देश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब एक नए नाम और नई पहचान के साथ आगे बढ़ेगी। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के तहत शुरू हुई और वर्ष 2010 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम से प्रसिद्ध हुई इस योजना का नाम अब केंद्र सरकार ने बदल दिया है।
सरकार के नए निर्णय के अनुसार वर्ष 2026 से यह योजना 'जी राम जी (G-RAM-JI)' के नाम से जानी जाएगी। इसका पूरा नाम "विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण" (Viksit Bharat Guarantee for Rural Employment and Livelihood Mission – Rural) रखा गया है। इस बदलाव को ग्रामीण विकास और रोजगार योजनाओं को नई दिशा देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
दो दशक पुरानी योजना को मिली नई पहचान
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और बेरोजगार परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराना था।
बाद में वर्ष 2010 में इस योजना का नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) कर दिया गया। पिछले डेढ़ दशक में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई और करोड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार बनी।
अब वर्ष 2026 से इसे एक बार फिर नई पहचान दी जा रही है।
क्या है G-RAM-JI?
नई व्यवस्था के तहत योजना का नाम G-RAM-JI रखा गया है, जिसका विस्तृत रूप है—
G – Guarantee
R – Rozgar (Employment)
A – Aajeevika (Livelihood)
M – Mission
JI – Gramin India / ग्रामीण भारत के विकास का मिशन
हिंदी में इसे "विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण" कहा जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इस नए नाम के माध्यम से केवल मजदूरी आधारित रोजगार ही नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, टिकाऊ विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देना है।
केवल नाम नहीं, सोच में भी बदलाव
ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार योजना को आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर निगरानी व्यवस्था के साथ जोड़ने की तैयारी कर रही है।
नई प्रणाली के तहत कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डिजिटल भुगतान, भू-अभिलेख आधारित परियोजना चयन, जियो-टैगिंग और समयबद्ध भुगतान व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
इसके अलावा ग्रामीण विकास से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के साथ भी इस योजना का बेहतर समन्वय स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
रोजगार के साथ आजीविका पर रहेगा जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि G-RAM-JI नाम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार केवल अस्थायी मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीण परिवारों की स्थायी आजीविका को भी मजबूत बनाना चाहती है।
इसके तहत जल संरक्षण, सिंचाई परियोजनाएं, ग्रामीण सड़कें, वृक्षारोपण, सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण, कृषि आधारित विकास कार्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कार्यों को अधिक प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
करोड़ों ग्रामीण परिवार होंगे प्रभावित
मनरेगा देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है। बिहार सहित देश के लगभग सभी राज्यों में करोड़ों ग्रामीण परिवार इस योजना के माध्यम से रोजगार प्राप्त करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य कम होने के दौरान यह योजना गरीब परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनती है। ऐसे में योजना के नाम में बदलाव का असर देशभर के लाभार्थियों पर दिखाई देगा।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना के मूल उद्देश्य और पात्रता नियमों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। केवल इसकी नई ब्रांडिंग और प्रशासनिक स्वरूप को आधुनिक बनाया जा रहा है।
तकनीक आधारित होगी पूरी व्यवस्था
सरकार ग्रामीण रोजगार योजनाओं में डिजिटल तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ा रही है। भविष्य में G-RAM-JI के अंतर्गत कार्यों की स्वीकृति, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान प्रक्रिया और कार्यों की निगरानी पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा सकती है।
इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने, भुगतान में पारदर्शिता लाने और योजनाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नई व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ आधारभूत संरचना के विकास को भी गति मिलेगी।
जल संरक्षण, तालाब निर्माण, सड़क निर्माण, भूमि सुधार, वृक्षारोपण और कृषि से जुड़े स्थायी कार्यों पर अधिक ध्यान दिए जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा भी तेज
योजना के नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे सरकार की नई विकास रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे केवल नाम बदलने तक सीमित मान रहे हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य पहले की तरह ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना ही रहेगा और नई पहचान के साथ इसे अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
लाभार्थियों को क्या करना होगा?
ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान लाभार्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। योजना के नाम में बदलाव के कारण किसी को दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
जॉब कार्ड, मजदूरी भुगतान और रोजगार की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। यदि भविष्य में किसी प्रशासनिक बदलाव की आवश्यकता होगी तो उसकी जानकारी संबंधित पंचायतों और अधिकारियों के माध्यम से दी जाएगी।
ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा (MGNREGA) अब 'जी राम जी (G-RAM-JI)' के नाम से नई पहचान हासिल करने जा रही है। वर्ष 2026 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल योजना का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, आजीविका, डिजिटल पारदर्शिता और विकास कार्यों को एक नए स्तर पर ले जाना है। करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना पहले की तरह रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनी रहेगी, जबकि सरकार को उम्मीद है कि नई पहचान और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था के साथ ग्रामीण विकास को और अधिक गति मिलेगी।