गैस एजेंसी पर बड़ा फर्जीवाड़ा! लाइसेंस एक जमीन पर, गोदाम दूसरी जगह बनाया; शिकायत के बाद जांच शुरू
नाथनगर (भागलपुर)। बिहार के भागलपुर जिले के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र से कथित जालसाजी और नियमों की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कंझिया स्थित ‘अजय इंडेन गैस एजेंसी’ ने जिस भूमि के खाता-खेसरा के आधार पर तेल एवं गैस सुरक्षा संगठन (PESO) और संबंधित विभागों से गैस गोदाम का लाइसेंस प्राप्त किया, वास्तविक गोदाम उस भूमि पर न बनाकर दूसरी जगह खड़ा कर दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब उस भूमि के वास्तविक मालिक शिवम कुमार भारती ने प्रशासन को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की।
शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। प्रारंभिक स्तर पर संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सरकारी नियमों के उल्लंघन का होगा, बल्कि दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से भी जुड़ा माना जा सकता है।
शिकायत से खुला कथित फर्जीवाड़ा
जानकारी के अनुसार, शिवम कुमार भारती ने जिला प्रशासन को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी जमीन के खाता-खेसरा का उपयोग कर गैस एजेंसी ने कंपनी और संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कीं, लेकिन गोदाम उस जमीन पर कभी बनाया ही नहीं गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि गोदाम किसी दूसरी जगह बनाया गया है, जबकि लाइसेंस और स्वीकृति के दस्तावेजों में उनकी जमीन का उल्लेख किया गया है। उन्होंने इसे गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है PESO लाइसेंस?
PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) भारत सरकार के अधीन कार्य करने वाला वह संस्थान है, जो पेट्रोलियम, गैस और विस्फोटक पदार्थों के भंडारण एवं संचालन के लिए सुरक्षा मानकों के अनुरूप लाइसेंस जारी करता है।
किसी भी एलपीजी गैस गोदाम के निर्माण और संचालन के लिए निर्धारित भूमि, सुरक्षा दूरी, संरचना और तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि स्वीकृत स्थल से अलग स्थान पर गोदाम बनाया गया हो, तो यह नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
जमीन मालिक ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता शिवम कुमार भारती का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली, जब उन्होंने संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। जांच के दौरान उन्हें पता चला कि उनकी जमीन का विवरण लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों में दर्ज है, जबकि वास्तविक गोदाम कहीं और संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना उनकी जमीन के विवरण का उपयोग किया गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन ने शुरू की प्रारंभिक जांच
लिखित शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, राजस्व अभिलेख, भूमि के खाता-खेसरा, लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज और गोदाम के वास्तविक स्थान का मिलान किया जा रहा है।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि लाइसेंस किस आधार पर जारी किया गया, निरीक्षण रिपोर्ट में कौन-सी जमीन का उल्लेख है और वर्तमान में गोदाम किस स्थान पर संचालित हो रहा है।
कई विभागों की भूमिका की होगी जांच
इस मामले में केवल गैस एजेंसी ही नहीं, बल्कि लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यदि जांच में दस्तावेजों में हेराफेरी या तथ्य छिपाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गैस गोदाम जैसी संवेदनशील परियोजनाओं में प्रत्येक स्वीकृति सुरक्षा मानकों और स्थल निरीक्षण के बाद ही दी जाती है। ऐसे में यदि वास्तविक निर्माण स्वीकृत स्थल से अलग स्थान पर हुआ है, तो इसकी विस्तृत जांच आवश्यक होगी।
सुरक्षा मानकों पर भी उठे सवाल
एलपीजी गैस गोदामों का निर्माण सुरक्षा नियमों के अनुसार किया जाता है ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जनहानि की संभावना न्यूनतम रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गोदाम वास्तव में स्वीकृत स्थान से अलग जगह पर संचालित हो रहा है, तो यह आसपास के लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए प्रशासन को तकनीकी और सुरक्षा दोनों पहलुओं की जांच करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों में चर्चा
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत सही साबित होती है, तो यह सरकारी प्रक्रियाओं में बड़ी लापरवाही या कथित फर्जीवाड़े का उदाहरण होगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दस्तावेजों की होगी गहन पड़ताल
जांच एजेंसियां अब भूमि अभिलेख, स्वीकृति पत्र, नक्शा, निरीक्षण रिपोर्ट, कंपनी की अनुमति और अन्य संबंधित रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन करेंगी। साथ ही गोदाम के वर्तमान स्थान का भौतिक सत्यापन भी कराया जा सकता है।
यदि दोनों स्थानों में अंतर पाया जाता है, तो आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनों के अनुसार की जाएगी।
एजेंसी का पक्ष आना बाकी
समाचार लिखे जाने तक गैस एजेंसी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसी भी अपना पक्ष प्रशासन के समक्ष रखेगी।
प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भागलपुर के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में सामने आया यह मामला कथित तौर पर भूमि विवरण, लाइसेंस प्रक्रिया और गैस गोदाम के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी जमीन के खाता-खेसरा का उपयोग कर लाइसेंस हासिल किया गया, जबकि गोदाम दूसरी जगह बनाया गया। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।