सात महीने बाद घर लौटे मानसिक रूप से अस्वस्थ नंद किशोर प्रसाद, परिवार से मिलन का भावुक दृश्य देख नम हुईं आंखें

गया: बिहार के गया जिले के मानपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या-49 स्थित शिवचरण लेन मोहल्ले में बुधवार का दिन एक परिवार के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था। करीब सात महीने से लापता 56 वर्षीय नंद किशोर प्रसाद आखिरकार अपने घर लौट आए। जैसे ही उनके घर पहुंचने की खबर मोहल्ले में फैली, परिजन, पड़ोसी और परिचित उन्हें देखने के लिए पहुंचने लगे। लंबे समय बाद परिवार से उनका मिलन बेहद भावुक रहा और इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं।

नंद किशोर प्रसाद के पुत्र अर्जुन कुमार ने बताया कि उनके पिता पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। इसी कारण वे 23 दिसंबर को अचानक घर से निकल गए थे। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। कई महीनों तक इंतजार और लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार उनकी सकुशल घर वापसी हुई, जिससे पूरे परिवार में खुशी और राहत का माहौल है।

23 दिसंबर को अचानक घर से हुए थे लापता

परिवार के अनुसार, 23 दिसंबर की सुबह नंद किशोर प्रसाद बिना किसी को बताए घर से निकल गए थे। पहले तो परिजनों ने सोचा कि वे आसपास कहीं गए होंगे और कुछ देर में वापस आ जाएंगे, लेकिन जब काफी समय तक उनका कोई पता नहीं चला तो परिवार की चिंता बढ़ गई।

उन्होंने रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के क्षेत्रों में उनकी तलाश शुरू की। कई स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

मानसिक रूप से अस्वस्थ थे नंद किशोर प्रसाद

अर्जुन कुमार ने बताया कि उनके पिता मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। इसी वजह से उनके अचानक घर से चले जाने की आशंका पहले भी परिवार को रहती थी।

परिजनों ने बताया कि उनके लापता होने के बाद परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना करता रहा और हर संभावित जगह पर उनकी तलाश की गई।

सात महीने तक चलता रहा खोज अभियान

परिवार ने अपने स्तर पर लगातार खोजबीन जारी रखी। रिश्तेदारों से संपर्क किया गया, विभिन्न शहरों में जानकारी भेजी गई और परिचितों की मदद ली गई।

परिजनों ने बताया कि हर दिन उन्हें उम्मीद रहती थी कि शायद कोई सूचना मिले और नंद किशोर प्रसाद घर लौट आएं।

आखिरकार लौट आए घर

करीब सात महीने बाद नंद किशोर प्रसाद के घर लौटने की खबर मिली। उनके घर पहुंचते ही परिवार के सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

परिवार के लोगों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। लंबे समय बाद अपने प्रियजन को सुरक्षित देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।

मोहल्ले में खुशी का माहौल

नंद किशोर प्रसाद की घर वापसी की खबर पूरे मोहल्ले में तेजी से फैल गई।

पड़ोसी और स्थानीय लोग परिवार से मिलने पहुंचे और नंद किशोर प्रसाद के सकुशल लौटने पर खुशी जताई। कई लोगों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।

भावुक कर देने वाला मिलन

करीब सात महीने के इंतजार के बाद जब परिवार के सदस्य नंद किशोर प्रसाद से मिले तो माहौल बेहद भावुक हो गया।

परिवार के कई सदस्य अपने आंसू नहीं रोक सके। पड़ोसियों ने भी इस पल को भावनात्मक बताया और परिवार को शुभकामनाएं दीं।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष देखभाल और नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है।

ऐसे लोगों के अकेले बाहर जाने की स्थिति में परिवार को सतर्क रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह भी लेनी चाहिए।

लापता व्यक्तियों की तलाश में समाज की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना समय पर पुलिस और समाज तक पहुंचे, तो उसे खोजने की संभावना बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संगठनों और प्रशासन के सहयोग से कई परिवार अपने बिछड़े सदस्यों तक दोबारा पहुंचने में सफल हुए हैं।

परिवार ने जताया आभार

नंद किशोर प्रसाद के सकुशल लौट आने के बाद परिवार ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने खोजबीन के दौरान उनका सहयोग किया।

परिजनों ने कहा कि पिछले सात महीने उनके लिए बेहद कठिन रहे, लेकिन अब उनके पिता की वापसी से पूरा परिवार राहत महसूस कर रहा है।

समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश

यह घटना इस बात का भी संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। कई बार लंबे समय बाद भी बिछड़े लोग अपने परिवार तक वापस पहुंच जाते हैं।

साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और ऐसे लोगों की देखभाल की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

निष्कर्ष

गया जिले के मानपुर स्थित शिवचरण लेन में रहने वाले 56 वर्षीय नंद किशोर प्रसाद करीब सात महीने बाद अपने परिवार से मिल गए। वे 23 दिसंबर को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण घर से निकल गए थे और तब से लापता थे। उनकी सुरक्षित घर वापसी से पूरे परिवार, पड़ोस और परिचितों में खुशी का माहौल है। यह भावुक मिलन न केवल परिवार के लिए राहत लेकर आया, बल्कि समाज को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील और जागरूक रहने का संदेश भी देता है।