टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले प्रशासनिक भवन पर विशाल महाधरना; नई नियुक्ति नियमावली-2026 और प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ फूटा गुस्सा, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बचाने का आह्वान

भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर इन दिनों उच्च शिक्षा से जुड़े नीतिगत बदलावों और विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया है। राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए लाए गए प्रस्तावित नए विश्वविद्यालय अधिनियम और सहायक प्राध्यापकों की बहाली के लिए बनाई गई नई नियुक्ति नियमावली-2026 के विरोध में मंगलवार को टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के समक्ष एक भव्य और उग्र महाधरना का आयोजन किया गया। इस महाधरना में न केवल बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक और शोधार्थी शामिल हुए, बल्कि विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक संघ, सीनेट व सिंडिकेट सदस्यों के अलावा विश्वविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारी संघ, चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ और बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं कॉलेज कर्मचारी महासंघ की प्रक्षेत्रीय इकाई ने भी खुलकर अपना समर्थन दिया।

प्रशासनिक भवन परिसर में गूंजे सरकार विरोधी नारे

मंगलवार सुबह से ही टीएमबीयू प्रशासनिक भवन के बाहर शिक्षकों और कर्मचारियों का जुटना शुरू हो गया था। हाथों में मांग से संबंधित तख्तियां लिए और बांहों पर काली पट्टी बांधकर पहुंचे शिक्षकों ने सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि सरकार विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त करने की साजिश रच रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

महाधरना की अध्यक्षता करते हुए अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने कहा कि यूजीसी (UGC) रेगुलेशन-2018 को दरकिनार कर तैयार की गई नई नियुक्ति नियमावली-2026 पूरी तरह से अवैधानिक है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने अपनी इस जिद को नहीं छोड़ा, तो भागलपुर सहित पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र बनाया जाएगा। महाधरना का कुशल संचालन डॉ. पवन कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आनंद सौमित्र ने किया।

नई नियुक्ति नियमावली और प्रस्तावित अधिनियम पर उठाए गए गंभीर सवाल

महाधरना के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में सरकार द्वारा लाई गई नई नियमावली और प्रस्तावित अधिनियम की खामियों को उजागर किया:

यूजीसी नियमों का खुला उल्लंघन: वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नई नियुक्ति नियमावली यूजीसी के स्थापित मानकों के विरुद्ध है। स्थायी और संविदा आधारित शिक्षकों के लिए अलग-अलग मानक तय करना और चयन प्रक्रिया में भारी बदलाव करना सीधे तौर पर केंद्रीय उच्च शिक्षा के नियमों की अवहेलना है।

आयु सीमा में कटौती पर रोष: अतिथि शिक्षकों ने कहा कि नई नियमावली के तहत आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा को घटाकर बेहद कम कर दिया गया है, जबकि पहले यह सीमा 55 वर्ष हुआ करती थी। इससे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे योग्य शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला: सिंडिकेट सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये उच्चस्तरीय शिक्षण, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण और बौद्धिक विकास के केंद्र हैं। प्रस्तावित अधिनियम से इन सभी शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

सेवा समायोजन और प्रमुख मांगें

धरना-प्रदर्शन के माध्यम से संघ और समर्थन दे रहे बुद्धिजीवियों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:

सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ कार्यरत अतिथि शिक्षकों का स्थायी सेवा समायोजन किया जाए।

नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा को पुनः बढ़ाकर 55 वर्ष किया जाए।

नई नियुक्ति नियमावली-2026 और प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

पुरानी और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं (जैसे एपीआई स्कोर और साक्षात्कार आधारित व्यवस्था) को ही बहाल रखा जाए।

विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन और भारी पुलिस बल की तैनाती

इस महाधरना को सफल बनाने में सीनेटर रंजीत कुमार, असीम कुमार, सुशील मंडल, डॉ. स्वीटी कुमारी, डॉ. एके दत्ता, डॉ. दिव्या रानी, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. नूरजहां, डॉ. प्रियतम कुमार, डॉ. सर्पराज रामानंद सागर, डॉ. आदित्य नारायण, डॉ. अविनाश कुमार, खेल सचिव डॉ. संजय कुमार जायसवाल, डॉ. मुश्फिक आलम और डॉ. निर्लेश कुमार सहित बड़ी संख्या में नियमित, सेवानिवृत्त शिक्षकों व महिला शिक्षिकाओं ने अपने विचार रखे।

किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति या विधि-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय परिसर और प्रशासनिक भवन के चारों ओर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विश्वविद्यालय थाना पुलिस के साथ-साथ पुलिस लाइन से अतिरिक्त दंगा रोधी बलों और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित यह महाधरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार के शिक्षक वर्ग में नई नियुक्ति नियमावली और प्रशासनिक बदलावों को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों और विभिन्न शिक्षक संघों के एक मंच पर आने से यह आंदोलन अब और अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है। यदि समय रहते सरकार इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो उच्च शिक्षा का यह माहौल आने वाले दिनों में और अधिक संघर्षपूर्ण हो सकता है।