उत्तरवाहिनी गंगा तट पर उमड़ी शिवभक्तों की भारी भीड़, धार्मिक अनुष्ठान से भक्तिमय हुआ पूरा इलाका

कहलगांव (निज प्रतिनिधि): भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले बटेश्वर स्थान में इन दिनों आस्था का महासागर उमड़ पड़ा है। उत्तरवाहिनी गंगा के पावन तट पर अवस्थित बटेश्वर नाथ धाम में इन दिनों विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और रुद्राभिषेक का दौर जारी है, जिससे पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंज उठा है। दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु मां गंगा में डुबकी लगाने के बाद देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक कर अपने जीवन की मंगलकामना कर रहे हैं।

पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है बटेश्वर स्थान

कहलगांव का बटेश्वर स्थान सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इसका प्राचीन काल से गहरा ऐतिहासिक महत्व रहा है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय के खंडहरों के ठीक पास स्थित यह पावन स्थल सदियों से साधु-संतों, तंत्र साधकों और शिवभक्तों की साधना स्थली रहा है। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस क्षेत्र में उत्तर दिशा की ओर बहने वाली मां गंगा का तट साक्षात मोक्षदायिनी माना गया है।

सावन के पवित्र महीने या अन्य विशेष धार्मिक अवसरों पर बटेश्वर स्थान पर लगने वाले मेलों और आयोजनों का एक अलग ही महत्व होता है। वर्तमान में यहाँ चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष पूजा-पाठ में हिस्सा लेने के लिए बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह से ही गंगा घाटों पर हर-हर गंगे की गूंज सुनाई देने लगती है।

भव्य रुद्राभिषेक और हवन का चल रहा है दौर

बटेश्वर स्थान के मुख्य मंदिर परिसर में इन दिनों प्रख्यात आचार्यों और विद्वान पंडितों के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, महामृत्युंजय जाप और सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर कमेटियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के सहयोग से चल रहे इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना करना है।

पवित्र जलाभिषेक: अहले सुबह से ही भक्तजन उत्तरवाहिनी गंगा के ठंडे और पवित्र जल को तांबे के लोटे में भरकर लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं।

वैदिक मंत्रोच्चार: बटेश्वर नाथ के गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक घंट-घड़ियाल, शंखनाद और वेदों के मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा वातावरण पूरी तरह ऊर्जावान और आध्यात्मिक बन गया है।

संध्या आरती का विहंगम दृश्य: संध्या के समय उत्तरवाहिनी गंगा तट पर होने वाली महाआरती इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होती है। सैकड़ों दीपों के प्रकाश से जगमगाता गंगा घाट और उस पर गूंजते भजन-कीर्तन का स्वर हर श्रद्धालु के मन को मोह लेता है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से स्थानीय बाजारों में भी रौनक

बटेश्वर स्थान में चल रहे इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान के कारण कहलगांव के स्थानीय बाजारों और आसपास के इलाकों में भी भारी रौनक देखने को मिल रही है। दूर-दराज से आने वाले कांवरियों और पर्यटकों के कारण पूजा-सामग्री, फूल-माला, प्रसाद, और मिष्ठान की दुकानों पर खरीदारों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। होटल और धर्मशालाएं भी पूरी तरह गुलजार नजर आ रही हैं।

स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल धार्मिक भावनाएं प्रस्फुटित होती हैं, बल्कि स्थानीय आर्थिकी को भी एक नया बल मिलता है। हालांकि, भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।

आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम

बटेश्वर स्थान में चल रहा यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आज भी हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ें कितनी गहरी हैं। आधुनिकता की दौड़ के बीच जब लोग अपनी परंपराओं से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे धार्मिक अनुष्ठान नई पीढ़ी को उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।

श्रद्धालुओं का तांता सुबह से लेकर देर रात तक बटेश्वर नाथ के दरबार में लगा हुआ है। हर कोई भगवान शिव की आराधना में लीन होकर अपने दुखों को भूलकर बस भोलेनाथ की भक्ति में गोता लगा रहा है। बटेश्वर स्थान की यह पावन धरा एक बार फिर से अपनी पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ शिवमय हो उठी है।