शिक्षा के आधुनिकीकरण की ओर बड़ा कदम; हाईस्कूल के शिक्षकों के लिए शुरू हुआ पांच दिवसीय आईसीटी लैब प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर संचालन में हो रहे हैं दक्ष
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बदलते दौर के साथ शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में सिल्क सिटी भागलपुर में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की शुरुआत की गई है। जिले के उच्च माध्यमिक विद्यालयों (हाईस्कूलों) में पठन-पाठन के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और आधुनिक तकनीक का लाभ सीधा विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार से पांच दिवसीय आईसीटी लैब (ICT Lab) प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आगाज किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों—गणपति सिंह हाईस्कूल और रामधारी हाईस्कूल—में चुनिंदा शिक्षकों को कंप्यूटर, डिजिटल प्रोजेक्टर, स्मार्ट क्लास और अन्य अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की गहन ट्रेनिंग दी जा रही है।
डिजिटल शिक्षा समय की मांग: क्यों पड़ी इस प्रशिक्षण की जरूरत?
आज का युग सूचना और प्रौद्योगिकी (Information and Technology) का युग है, और शिक्षा क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह सकता। सरकार और शिक्षा विभाग का स्पष्ट मानना है कि ब्लैकबोर्ड और किताबों के पारंपरिक दौर से आगे बढ़कर अब कक्षाओं को स्मार्ट और विजुअल लर्निंग से लैस करने की आवश्यकता है:
पारंपरिक शिक्षण से स्मार्ट क्लास की ओर सफर: आज के छात्र तकनीक के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। जब पढ़ाई को ग्राफिक्स, वीडियो, डिजिटल प्रोजेक्टर और कंप्यूटर के माध्यम से रोचक बनाया जाता है, तो छात्रों की समझने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
शिक्षकों का तकनीकी रूप से सक्षम होना: इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यही है कि जो आईसीटी लैब्स सरकारी विद्यालयों में स्थापित की गई हैं, वे धूल फांकने के बजाय पूरी क्षमता से संचालित हो सकें। शिक्षक जब खुद कंप्यूटर और प्रोजेक्टर चलाने में पारंगत होंगे, तभी वे बच्चों को सही ढंग से प्रशिक्षित कर सकेंगे।
गणपति सिंह हाईस्कूल और रामधारी हाईस्कूल में चल रहा विशेष सत्र
इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन दोनों निर्धारित केंद्रों—गणपति सिंह हाईस्कूल और रामधारी हाईस्कूल—पर शिक्षकों का भारी उत्साह देखने को मिला:
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर: प्रशिक्षण शिविर के दौरान मास्टर ट्रेनर्स और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा शिक्षकों को थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल जानकारी भी दी जा रही है। शिक्षकों को सिखाया जा रहा है कि कैसे कंप्यूटर ऑन करने से लेकर इंटरनेट का उपयोग करते हुए ऑनलाइन एजुकेशनल कंटेंट (शैक्षणिक सामग्री) को स्मार्ट बोर्ड या प्रोजेक्टर पर प्रदर्शित किया जाए।
लैब के बेहतर संचालन और रखरखाव के गुर: केवल उपकरण चलाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, रखरखाव (Maintenance) और तकनीकी खराबी आने पर प्राथमिक स्तर पर उसका समाधान कैसे किया जाए, इसकी भी विस्तृत जानकारी प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षकों को दी जा रही है। इससे स्कूलों में स्थापित करोड़ों रुपये की तकनीकी संपत्तियों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
शिक्षकों में दिखा खासा उत्साह, बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और इसे शिक्षण कार्य में मील का पत्थर बताया है:
शिक्षकों की प्रतिक्रिया: शिक्षकों का कहना है कि शुरुआती दौर में तकनीक को लेकर थोड़ी झिझक जरूर रहती है, लेकिन इस पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण के बाद वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वे अपने-अपने विद्यालयों के बच्चों को आधुनिक तकनीक के जरिए और अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे।
छात्रों का भविष्य होगा उज्ज्वल: इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मेधावी छात्र भी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर स्मार्ट क्लास का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनके विज्ञान, गणित और अन्य विषयों की समझ और अधिक गहरी होगी।
भागलपुर में आयोजित यह पांच दिवसीय आईसीटी लैब प्रशिक्षण कार्यक्रम महज एक ट्रेनिंग कैंप नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का ठोस प्रयास है। गणपति सिंह हाईस्कूल और रामधारी हाईस्कूल से शुरू हुआ यह कारवां आने वाले दिनों में जिले के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। जब शिक्षक तकनीक से लैस होकर क्लासरूम में उतरेंगे, तो डिजिटल बिहार और डिजिटल इंडिया का सपना वास्तव में साकार होता नजर आएगा।