बरारी DRCC में बड़ा फर्जीवाड़ा या सिस्टम की सुस्ती? संजय कुमार की ग्राउंड रिपोर्ट; युवाओं के भविष्य से खिलवाड़, नीतीश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल!

बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'सात निश्चय' के तहत युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थापित किया गया बरारी स्थित जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र (DRCC - District Registration and Counseling Centre) इस वक्त विवादों के घेरे में है। मुख्यमंत्री स्वयं सहायता भत्ता योजना (सिंहा), कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना (BSCC) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ देने वाला यह केंद्र अब छात्रों के लिए मदद का जरिया बनने के बजाय परेशानी का सबब बनता जा रहा है।

भागलपुर के बरारी स्थित इस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय से सीधे ग्राउंड जीरो की पड़ताल करते हुए हमारे विशेष संवाददाता संजय कुमार ने वहां चल रहे गंभीर प्रशासनिक गतिरोध, बिचौलियों (Agents) के बढ़ते हस्तक्षेप, तकनीकी खामियों और घंटों लाइनों में खड़े रहने को मजबूर बेबस छात्र-छात्राओं की जमीनी हकीकत को उजागर किया है।

इस विशेष खोजी रिपोर्ट (Investigative Report) के जरिए जानिए कि कैसे करोड़ों की लागत से बना यह आलीशान केंद्र प्रशासनिक लापरवाही और कछुआ गति से चल रहे काम के कारण अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है।

 ग्राउंड जीरो से संजय कुमार की लाइव रिपोर्ट: "सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े हैं छात्र"

जब हमारे संवाददाता संजय कुमार ने सुबह-सुबह बरारी स्थित डीआरसीसी केंद्र का दौरा किया, तो मुख्य गेट के बाहर का नजारा बेहद विचलित करने वाला था।

दूर-दराज से आए छात्र: भागलपुर जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों जैसे पीरपैंती, कहलगांव, नवगछिया, सुल्तानगंज और शाहकुंड से आए सैकड़ों छात्र-छात्राएं कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच सुबह 6 बजे से ही मुख्य गेट के बाहर कतारों में खड़े थे।

अधिकारियों की लेट-लतीफी : कार्यालय खुलने का समय सुबह 10 बजे निर्धारित है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 11 बजे तक कई काउंटरों पर न तो कोई ऑपरेटर मौजूद था और ना ही कोई जिम्मेदार अधिकारी। जब तक अफसर आते हैं, तब तक छात्रों का धैर्य जवाब दे चुका होता है।

 बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: लोन पास कराने के नाम पर 'कमिशन खोरी' का खेल?

डीआरसीसी केंद्र का सबसे महत्वपूर्ण काम उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए गरीब छात्रों को ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण (Student Credit Card) उपलब्ध कराना है। संजय कुमार की पड़ताल में इस विभाग के अंदर चल रहे एक बड़े नेक्सस (गठबंधन) का खुलासा हुआ है:

कागजी अड़ंगेबाजी और रिजेक्शन: छात्रों ने संवाददाता को बताया कि वे पिछले तीन महीने से केवल एक एनओसी (NOC) या कॉलेज बोनाफाइड सर्टिफिकेट के सत्यापन के लिए चक्कर काट रहे हैं। हर बार कोई न कोई मामूली तकनीकी कमी निकालकर फाइल को होल्ड (Pending) पर डाल दिया जाता है।

बिचौलियों की एंट्री: जैसे ही कोई छात्र परेशान होकर काउंटर से बाहर निकलता है, परिसर के बाहर सक्रिय दलाल और निजी कंसल्टेंसी के एजेंट उसे घेर लेते हैं।

संजय कुमार की पड़ताल में चौंकाने वाला दावा: कुछ छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीधे काउंटर पर जाने से फाइल आगे नहीं बढ़ती, लेकिन अगर किसी बिचौलिए के माध्यम से 'कमिशन' की सेटिंग कर दी जाए, तो वही रिजेक्टेड फाइल महज एक हफ्ते के भीतर अप्रूव (Pass) होकर मुख्यालय भेज दी जाती है।

 कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) और भत्ता योजना: सर्वर डाउन का परमानेंट बहाना

मुख्यमंत्री स्वयं सहायता भत्ता योजना (जिसके तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने ₹1000 दिए जाते हैं) और कंप्यूटर ट्रेनिंग (KYP) के सत्यापन के लिए आने वाले छात्रों की स्थिति भी बदतर है।

"सर्वर डाउन है, कल आना" : डीआरसीसी के काउंटरों पर तैनात ऑपरेटरों का यह सबसे पसंदीदा जुमला बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों से ₹100 से ₹200 का किराया लगाकर आने वाले गरीब छात्र जब काउंटर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें कह दिया जाता है कि पटना से ही लिंक फेल है।

टोकन सिस्टम में धांधली: केंद्र के नियमों के अनुसार पारदर्शिता के लिए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर टोकन दिया जाना चाहिए। लेकिन धरातल पर टोकन वितरण में भी अपनों और रसूखदारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आम मेधावी छात्र पीछे छूट जाते हैं।

 डीआरसीसी की चार प्रमुख योजनाएं और जमीनी हकीकत का रिपोर्ट कार्ड

योजना का नामसरकार का उद्देश्यबरारी डीआरसीसी की जमीनी हकीकत (Status)
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्डगरीब बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए ₹4 लाख का लोन।महीनों तक फाइलें पेंडिंग, दलालों का बोलबाला और वेरिफिकेशन की धीमी गति।
स्वयं सहायता भत्ता योजनानौकरी ढूंढ रहे युवाओं को 2 साल तक ₹1000/माह आर्थिक मदद।समय पर बैंक खातों में पैसे न आना और बार-बार भौतिक सत्यापन का चक्कर।
कुशल युवा कार्यक्रम (KYP)युवाओं को मुफ्त कंप्यूटर, भाषा और व्यवहार कौशल की ट्रेनिंग।ग्रामीण सेंटरों से समन्वय की कमी और सर्टिफिकेट जारी होने में भारी देरी।
कौंसलिंग और गाइडेंसछात्रों को करियर चुनने के लिए सही सलाह देना।कौंसलिंग डेस्क पर विशेषज्ञों की कमी, काउंटर अक्सर खाली रहते हैं।

 छात्राओं और दिव्यांगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव

संजय कुमार की इस ग्राउंड रिपोर्ट का एक और काला पक्ष यह है कि करोड़ों रुपये के बजट से संचालित इस वातानुकूलित (AC) भवन में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

पीने के पानी का संकट: केंद्र पर आने वाले हजारों छात्रों के लिए स्वच्छ पेयजल की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर या तो खराब पड़े हैं या उनमें पानी की सप्लाई बंद रहती है।

शौचालय की बदहाली: महिला विंग और छात्राओं के लिए बने टॉयलेट्स में इस कदर गंदगी और बदबू है कि वहां जाना मुमकिन नहीं है। दूर से आने वाली छात्राओं को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

दिव्यांगों के लिए रैंप नहीं: व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए काउंटरों तक पहुंचने की सुगम व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता है।

 प्रबंधन का गोलमोल जवाब: "मैनपावर की कमी है, जल्द सुधार होगा"

जब हमारे संवाददाता संजय कुमार ने इस पूरे अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बरारी डीआरसीसी के मुख्य प्रबंधक (Manager) और जिला नोडल अधिकारी से तीखे सवाल किए, तो उन्होंने सीधे तौर पर अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया।

प्रबंधक का आधिकारिक बयान:

"भ्रष्टाचार और बिचौलियों के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। यदि कोई दलाली की शिकायत लिखित में देता है, तो हम तुरंत कानूनी कार्रवाई करेंगे। जहां तक फाइलों के पेंडिंग होने और लाइनों का सवाल है, हमारे पास स्वीकृत पदों के मुकाबले ऑपरेटरों (Manpower) की भारी कमी है। इसके अलावा, राज्य स्तरीय सर्वर पर लोड बढ़ने के कारण कभी-कभी तकनीकी व्यवधान आता है। हम जल्द ही अतिरिक्त काउंटर खोलने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं।"

 निष्कर्ष: नीतीश सरकार के 'सुशासन' को जिला स्तर पर लग रहा है दाग

भागलपुर के बरारी से संजय कुमार की यह विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट साफ तौर पर यह दर्शाती है कि पटना के वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाई गई शानदार और जनकल्याणकारी योजनाएं जब जिला स्तर के अधिकारियों के हाथों में पहुंचती हैं, तो उनका क्या हश्र होता है। बिहार का युवा जो पहले से ही रोजगार की कमी से जूझ रहा है, उसे अपनी ही सरकार से मिलने वाली छोटी सी मदद के लिए इस कदर जलील होना पड़े, यह सुशासन की व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है।

जिलाधिकारी (DM) भागलपुर को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। बरारी डीआरसीसी में अचानक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर दलालों के सिंडिकेट को ध्वस्त करने और काम में लापरवाही बरतने वाले बाबुओं पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि भागलपुर के युवाओं का सरकारी तंत्र पर भरोसा बहाल हो सके!