सहरसा में रेल हादसा टला या बड़ी लापरवाही?: सिमरी बख्तियारपुर में समस्तीपुर-सहरसा मेमू ट्रेन के मोटरकोच में लगी आग; पाँच तकनीकी टीमों ने शुरू की गहन जाँच, डीआरएम को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर (बिहार): भारतीय रेलवे के पूर्व मध्य रेल (ECR) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सहरसा-समस्तीपुर रेलखंड पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के पास समस्तीपुर-सहरसा मेमू ट्रेन (MEMU Train) के मोटरकोच (Motor Coach) में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। गनीमत यह रही कि समय रहते ट्रेन को रोक लिया गया और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा जानमाल का नुकसान होने से बच गया।
'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस दुर्घटना के कारणों की तह तक जाने और तकनीकी खामियों का पता लगाने के लिए रेलवे द्वारा पाँच विशेष तकनीकी टीमों (Technical Teams) का गठन किया गया है। इन टीमों ने घटनास्थल पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए हैं, और जले हुए मोटरकोच को फिलहाल उसी लाइन पर सुरक्षित रखा गया है। रेलवे के इस उच्चस्तरीय घटनाक्रम, तकनीकी जाँच के दायरे, और सुरक्षा मानकों से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
घटना की पृष्ठभूमि: कैसे लगी मेमू ट्रेन के मोटरकोच में आग?
दैनिक यात्रियों और लंबी दूरी के सफर करने वालों के लिए मेमू ट्रेनें बेहद लोकप्रिय और सुगम मानी जाती हैं, लेकिन इस प्रकार की तकनीकी दुर्घटनाएं रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अचानक धुआँ और लपटें उठना: समस्तीपुर से सहरसा की ओर आ रही मेमू ट्रेन जब सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन के नजदीक पहुँची, तभी अचानक ट्रेन के मोटरकोच वाले हिस्से से संदिग्ध धुआँ निकलने लगा। कुछ ही क्षणों में धुएँ ने विकराल रूप ले लिया और आग की लपटें दिखाई देने लगीं।
सूझबूझ से टला बड़ा हादसा: ट्रेन के ड्राइवर (लोको पायलट) की सूझबूझ और तत्परता के कारण समय रहते ट्रेन की गति धीमी कर उसे रोक दिया गया। यदि यह आग चलती ट्रेन में या किसी दुर्गम खंड पर लगती, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे। यात्रियों ने जल्दी से कोच से कूदकर अपनी जान बचाई।
पाँच तकनीकी टीमों द्वारा साक्ष्य संकलन (Evidence Collection)
घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मध्य रेल प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए जाँच के आदेश दिए। रेलवे के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों की कुल पाँच तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया।
साक्ष्यों की बारीकी से जाँच: इन टीमों ने मोटरकोच के जले हुए हिस्सों, विद्युत सर्किट (Electrical Circuits), ट्रैक्शन मोटर और बैटरी बॉक्स का बारीकी से निरीक्षण किया। फोरेंसिक एंगल से भी यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) के कारण लगी या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी विफलता (Technical Failure) थी।
मोटरकोच का सुरक्षित रखा जाना: दुर्घटनाग्रस्त जले हुए मोटरकोच को सुरक्षा की दृष्टि से फिलहाल सिमरी बख्तियारपुर के पास उसी लाइन पर सुरक्षित रखा गया है ताकि जाँच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो सके।
डीआरएम को सौंपी जाएगी रिपोर्ट और सीआरएस (CRS) की भूमिका
तकनीकी टीमों द्वारा की जा रही इस जाँच के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
डीआरएम (DRM) को रिपोर्ट: जाँच पूरी होने के बाद पाँचों तकनीकी टीमें अपनी संयुक्त रिपोर्ट समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को सौंपेंगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि यह हादसा किन कारणों से हुआ और इसमें किसकी लापरवाही थी या यह महज़ एक तकनीकी खराबी थी।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) की जाँच की संभावना: चूंकि मामला एक यात्री ट्रेन के मोटरकोच में आग लगने से जुड़ा है, इसलिए रेलवे सुरक्षा आयोग (Commissioner of Railway Safety - CRS) स्तर पर भी इस मामले की गहन संवीक्षा किए जाने की संभावना है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे की जवाबदेही पर सवाल
इस घटना के बाद से ट्रेन यात्रियों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और रोष देखा जा रहा है।
रखरखाव पर गंभीर सवाल: यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों के रैक (Rakes) के नियमित रखरखाव और फिटनेस जाँच में कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है। यदि समय पर बैटरियों और वायरिंग की जाँच की जाए, तो ऐसी आग लगने की घटनाओं से बचा जा सकता है।
रेलवे का आश्वासन: रेलवे अधिकारियों ने मीडिया को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जाँच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सिमरी बख्तियारपुर में समस्तीपुर-सहरसा मेमू ट्रेन के मोटरकोच में आग लगने की यह घटना रेलवे के तकनीकी और सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी है। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन इसने रेल यात्रा की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाँच तकनीकी टीमों द्वारा की जा रही जाँच और डीआरएम को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट से यह उम्मीद की जा रही है कि सच सामने आएगा और भविष्य के लिए कड़े सुरक्षा मानक तय किए जाएंगे। रेलवे प्रशासन को चाहिए कि वह सभी मेमू और पैसेंजर ट्रेनों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम का विशेष ऑडिट कराए ताकि यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।