पूर्णिया विश्वविद्यालय की बड़ी लापरवाही: छात्रों का शैक्षणिक डेटा डिजिलाॅकर पर नहीं है अपडेट, करियर और उच्च शिक्षा पर मंडराया संकट
पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया प्रमंडल के सबसे बड़े उच्च शिक्षा संस्थान यानी पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक और गंभीर खबर सामने आ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित उदासीनता और लचर व्यवस्था के कारण पूर्णिया विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले विभिन्न अंगीभूत (Constituent) और संबद्ध (Affiliated) कॉलेजों के हजारों छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक डेटा (Academic Data) देश के राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डिजिलाॅकर' (DigiLocker) पर पूरी तरह से अप-टू-डेट नहीं है। डेटा अपडेट न होने के कारण छात्र-छात्राओं को देश-विदेश में नौकरियां पाने, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के सत्यापन और आगे की उच्च शिक्षा के लिए देश के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में नामांकन लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर छात्र वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है, और छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
छात्र नेता सौरभ का कड़ा रुख: विश्वविद्यालय प्रशासन को दी चेतावनी
छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को देखते हुए छात्र नेता सौरभ ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया है। छात्र नेता सौरभ ने पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय की यह तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ सीधा कुठाराघात है।
भविष्य के साथ खिलवाड़: छात्र नेता सौरभ ने मीडिया और विश्वविद्यालय के अधिकारियों से बात करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में जब पूरा देश और शिक्षा व्यवस्था ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर है, ऐसे में पूर्णिया विश्वविद्यालय का डिजिलाॅकर प्लेटफॉर्म पर छात्रों के अंकपत्र (Marksheets), प्रोविजनल सर्टिफिकेट और डिग्री अपलोड न करना अत्यंत शर्मनाक है।
अल्टीमेटम और मांग: छात्र नेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द सभी सत्रों के छात्रों का शैक्षणिक डेटा डिजिलाॅकर पर अपलोड कर उसे पूरी तरह से अपडेट नहीं किया गया, तो छात्र संगठन पूर्णिया विश्वविद्यालय मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन और तालाबंदी करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
क्या है समस्या और छात्रों को हो रही किन कठिनाइयों का सामना?
डिजिलाॅकर सरकार का एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और कहीं भी आसानी से सत्यापित करा सकते हैं। लेकिन पूर्णिया विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यह प्लेटफॉर्म फिलहाल किसी काम का साबित नहीं हो रहा है।
उच्च शिक्षा में बाधा: जो छात्र पूर्णिया विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) या अन्य पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईएम, आईआईटी या अन्य उच्च संस्थानों में मास्टर्स या प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशन के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें अपने दस्तावेजों के डिजिटल वेरिफिकेशन में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर डेटा न मिलने के कारण उनका एडमिशन तक अधर में लटक जाता है।
नौकरी और प्लेसमेंट की राह में रोड़ा: आज की तारीख में सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों (Jobs & Placements) में दस्तावेजों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन अनिवार्य हो गया है। डिजिलाॅकर पर डेटा अपडेट न होने के कारण कई छात्र दस्तावेजों की कमी या सत्यापन न हो पाने की वजह से नौकरी के अवसरों से वंचित हो रहे हैं।
दौड़-भाग की मजबूरी: डिजिटल माध्यम होने के बावजूद छात्रों को अपने ही छोटे-छोटे कार्यों और प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए पूर्णिया विश्वविद्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई और आगे की सुस्ती
जब इस मामले ने तूल पकड़ा और छात्र नेता सौरभ तथा अन्य छात्रों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, तो विश्वविद्यालय के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
आईटी सेल और परीक्षा विभाग की जिम्मेदारी: जानकारों का कहना है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय का आईटी सेल और परीक्षा विभाग (Examination Department) तकनीकी समन्वय की कमी के कारण छात्रों के डेटा को समय पर नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) या डिजिलाॅकर के पोर्टल पर सिंक (Sync) करने में विफल रहा है।
सुधार का आश्वासन: हालांकि, बढ़ते दबाव को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि वे इस तकनीकी समस्या से अवगत हैं और जल्द ही संबंधित एजेंसी से बात करके डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया तेज करवा देंगे ताकि छात्रों को राहत मिल सके।
पूर्णिया विश्वविद्यालय के हजारों छात्र इस समय अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छात्र नेता सौरभ की चेतावनी और छात्रों के बढ़ते दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन कितनी जल्दी इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाता है।