शिक्षा विभाग का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; सजौर फतेहपुर इंटर स्तरीय विद्यालय में लिपिक मणि कमल त्रिमूर्ति को मिला वित्तीय और प्रशासनिक प्रभार

शाहकुंड (भागलपुर): शिक्षा विभाग ने शाहकुंड प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सजौर फतेहपुर स्थित इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय में व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर विद्यालय के लिपिक मणि कमल त्रिमूर्ति को संस्थान का संपूर्ण प्रभार सौंपने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद अब विद्यालय के दैनिक कामकाज और कार्यालयी कार्यों में एक नई स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रशासनिक आदेश के मुख्य बिंदु

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल प्रभाव से विद्यालय से संबंधित सभी प्रकार के लिपिकीय कार्य, कागजी दस्तावेज, पत्राचार और अन्य कार्यालयी जिम्मेदारियां लिपिक मणि कमल त्रिमूर्ति को हस्तांतरित करें।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:

शिक्षक को शिक्षण कार्यों पर केंद्रित रहने का निर्देश: वर्तमान में जो शिक्षक अतिरिक्त प्रभार के रूप में लिपिकीय कार्य देख रहे थे, उन्हें इन कार्यों से मुक्त कर दिया गया है। उन्हें अब पूर्ण रूप से केवल शैक्षणिक गतिविधियों और छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन पर अपना ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।

पूर्ण प्रभार का हस्तांतरण: लिपिक मणि कमल त्रिमूर्ति को विद्यालय के कार्यालय प्रबंधन की पूर्ण जवाबदेही दी गई है, ताकि स्कूल के कागजी रिकॉर्ड और प्रशासनिक फाइलों का संधारण व्यवस्थित रूप से हो सके।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से विद्यालय में शिक्षकों पर शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ प्रशासनिक और लिपिकीय कार्यों का भारी दबाव था। शिक्षकों के कार्यालय के फाइलों और रिपोर्टिंग के काम में व्यस्त रहने के कारण कक्षा में पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इसी समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है कि विद्यालय का लिपिकीय कार्य पूरी तरह से एक प्रशिक्षित लिपिक द्वारा ही किया जाए, ताकि शिक्षकों का बहुमूल्य समय विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लग सके।

कार्यप्रणाली में आएगी पारदर्शिता

सजौर फतेहपुर इंटर स्तरीय विद्यालय में इस बदलाव को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक चर्चा है। जानकार लोगों का मानना है कि जब कार्यालय का कार्य लिपिक के पास होगा, तो विद्यालय की फाइलों, वेतन भुगतान, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं की रिपोर्ट समय पर तैयार हो सकेगी। मणि कमल त्रिमूर्ति के अनुभव का लाभ विद्यालय को मिलेगा, जिससे सरकारी कार्यवाहियों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रभारी प्रधानाध्यापक की जवाबदेही

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाध्यापक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि हस्तांतरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। सभी फाइलों का मिलान कर विधिवत प्रभार सौंपने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने को कहा गया है। विभागीय आदेश का पालन न करने की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

शिक्षकों और अभिभावकों में राहत

इस निर्णय से विद्यालय के शिक्षक वर्ग में काफी राहत महसूस की जा रही है। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमारा मूल काम बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन लिपिकीय कार्यों के दबाव में हम अक्सर कक्षा से दूर हो जाते थे। अब इस आदेश के बाद हम पूरी तन्मयता के साथ छात्रों के पाठ्यक्रम को पूरा करने पर ध्यान दे पाएंगे।"

वहीं, स्थानीय अभिभावकों ने भी इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में अगर शिक्षक पढ़ाने पर ध्यान देंगे, तो निश्चित रूप से वहां के शैक्षणिक स्तर में सुधार आएगा।

आगे की राह

शाहकुंड प्रखंड शिक्षा विभाग का यह कदम अन्य विद्यालयों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। भविष्य में अन्य स्कूलों में भी जहां शिक्षकों पर लिपिकीय कार्यों का बोझ है, वहां इसी तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, मणि कमल त्रिमूर्ति के प्रभार संभालने के बाद अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि विद्यालय की व्यवस्था में किस तरह के गुणात्मक सुधार देखने को मिलते हैं।

प्रशासनिक स्तर पर इस फेरबदल के साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की उम्मीद है कि स्कूल के सरकारी कार्यों की फाइलों में कोई त्रुटि न रहे और विद्यालय के छात्रों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं बिना किसी देरी के उन तक पहुंचें।