मुजफ्फरपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा एक्शन: वार्ड में पेवर ब्लॉक लगवाने के एवज में 25 हजार घूस लेते नगर परिषद के कनीय अभियंता अमन कुमार गिरफ्तार
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में विशेष निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit - SVU) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर नगर परिषद के कनीय अभियंता (Junior Engineer) अमन कुमार को रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। कनीय अभियंता पर वार्ड संख्या 12 में पेवर ब्लॉक लगवाने की एवज में 25 हजार रुपये घूस मांगने और लेने का गंभीर आरोप था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी से नगर परिषद कार्यालय और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना की पृष्ठभूमि एक विकास कार्य से जुड़ी हुई है। मुजफ्फरपुर नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड संख्या 12 में विकास योजनाओं के तहत पेवर ब्लॉक (Paver Block) लगाने का कार्य स्वीकृत हुआ था। इस कार्य को सुचारू रूप से पूरा कराने और उसका प्राक्कलन (Estimate) पास करने व भुगतान सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के कनीय अभियंता अमन कुमार के कंधों पर थी।
घूस की मांग: नियमों के मुताबिक विकास कार्यों को पूरा कराना सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है, लेकिन कनीय अभियंता अमन कुमार ने इस कार्य की एवज में अपनी अवैध कमाई का रास्ता निकाल लिया। उन्होंने ठेकेदार या संबंधित व्यक्ति से पेवर ब्लॉक लगवाने के काम के बदले 25,000 रुपये रिश्वत (Bribe) की मांग की।
परेशान होकर निगरानी इकाई से संपर्क: घूस की मांग से परेशान होकर पीड़ित या संबंधित संवेदक ने कनीय अभियंता की इस हरकत के खिलाफ चुप बैठने के बजाय सीधे विशेष निगरानी इकाई (SVU) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने सबूत के साथ निगरानी अधिकारियों को बताया कि अधिकारी बिना रिश्वत लिए काम की फाइल आगे नहीं बढ़ा रहा है।
विशेष निगरानी इकाई का सफल ट्रैप ऑपरेशन
विशेष निगरानी इकाई की टीम ने पीड़ित की शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया और इसका गोपनीय सत्यापन (Verfication) कराया। सत्यापन के दौरान कनीय अभियंता द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई, जिसके बाद एसवीयू ने एक विशेष छापेमारी दल (Trap Team) का गठन किया।
19 फरवरी को हुई कार्रवाई: तय योजना के अनुसार, 19 फरवरी को विशेष निगरानी इकाई की टीम ने मुजफ्फरपुर में जाल बिछाया। कनीय अभियंता अमन कुमार को जैसे ही 25 हजार रुपये की रिश्वत की रकम दी गई, पहले से मुस्तैद निगरानी टीम ने उन्हें रंगेहाथों दबोच लिया।
छापेमारी और जब्ती: गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने कनीय अभियंता के पास से घूस के वे 25 हजार रुपये भी बरामद कर लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से कनीय अभियंता को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने उनके कार्यालय और अन्य ठिकानों पर भी कागजी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी इस तरह के कितने मामलों में अवैध वसूली की है।
प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप
नगर परिषद के एक जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी के इस तरह भ्रष्टाचार के दलदल में फंसने के बाद विभाग के अन्य कर्मियों और अधिकारियों में भी खौफ का माहौल है। आम तौर पर शहर के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की शिकायतें आम जनता द्वारा अक्सर की जाती हैं, लेकिन निगरानी विभाग द्वारा इस प्रकार की गई सीधी कार्रवाई ने भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य अधिकारियों को भी कड़ा संदेश दिया है।
कार्यालय में चर्चा का विषय: घटना के बाद नगर परिषद कार्यालय में दिनभर इसी बात की चर्चा होती रही कि कैसे एक छोटे से काम के लिए इंजीनियर साहब ने अपनी कुर्सी और पद का दुरुपयोग किया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी निगरानी विभाग की इस कार्रवाई की सराहना की है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और सख्त संदेश
गिरफ्तारी के बाद विशेष निगरानी इकाई की टीम आरोपी कनीय अभियंता अमन कुमार को अपने साथ पटना स्थित निगरानी न्यायालय में पेश करने के लिए ले गई। एसवीयू के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
संपत्तियों की भी हो सकती है जांच: निगरानी सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपी अधिकारियों के आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के एंगल से भी जांच की जा सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अपनी सेवाकाल के दौरान अवैध तरीके से कितनी संपत्ति अर्जित की है।
मुजफ्फरपुर में हुई यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर आम जनता या ठेकेदारों से अवैध वसूली की कोशिश करेगा, तो कानून का शिकंजा उस पर कसना तय है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की दिशा में एक सख्त कदम साबित किया है।