सड़क निर्माण कार्य के चलते लगातार तीसरे दिन भी बंद रहा मायागंज अस्पताल का मुख्य द्वार; ओपीडी और इमरजेंसी आने वाले मरीजों को हुई भारी फजीहत, मुख्य गेट पर जमकर हुआ हंगामा

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: अंग क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH), जिसे आम बोलचाल में मायागंज अस्पताल कहा जाता है, से जुड़ी एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। अस्पताल के सर्जरी इमरजेंसी विभाग के सामने कंक्रीट की पक्की सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसके चलते अस्पताल का मुख्य द्वार (मेन गेट) लगातार तीसरे दिन भी पूरी तरह बंद रखा गया है। मुख्य गेट बंद रहने के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों, उनके तीमारदारों और एंबुलेंस चालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। व्यवस्था से परेशान होकर अस्पताल परिसर में सुबह-सुबह जमकर हंगामा भी देखने को मिला।

सड़क निर्माण के कारण बंद है मुख्य रास्ता

अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, मायागंज अस्पताल के सर्जरी इमरजेंसी और मुख्य ओपीडी क्षेत्र में लंबे समय से सड़क की स्थिति जर्जर थी। खराब सड़क होने के कारण गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर और ट्रॉली पर ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था:

कंक्रीट की नई सड़क का निर्माण: मरीजों की इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अस्पताल परिसर में मजबूत कंक्रीट की सड़क बनाने का काम शुरू किया गया है।

कच्ची सड़क के सूखने की मजबूरी: निर्माण कार्य के तहत ढाला गया कंक्रीट अभी पूरी तरह सूखा नहीं है और यदि उस पर वाहनों या इंसानों की आवाजाही शुरू हो जाए, तो सड़क के खराब होने का खतरा है। इसी तकनीकी कारण के चलते पिछले तीन दिनों से मुख्य द्वार को बंद रखा गया है।

जानकारियों के अभाव में भटके मरीज, मुख्य गेट पर काटा हंगामा

अस्पताल का मुख्य गेट बंद होने की पुख्ता जानकारी अधिकांश दूरदराज के मरीजों को नहीं मिल पाई थी, जिसके कारण सुबह से ही गेट के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई:

मरीजों का फूटा गुस्सा: सुबह जब ओपीडी का समय शुरू हुआ और लोग मुख्य द्वार से प्रवेश करने लगे, तो गार्ड द्वारा रास्ता रोके जाने पर मरीज उग्र हो गए। सुबह करीब 11 बजे नाराज मरीजों और उनके परिजनों ने मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया।

बांस की बैरिकेडिंग फांदने की मजबूरी: भारी दबाव और विरोध प्रदर्शन के बाद सुरक्षाकर्मियों ने केवल एक व्यक्ति के आने-जाने लायक संकरा रास्ता खोला। मरीजों को बांस की बैरिकेडिंग फांदकर और जोखिम उठाकर अंदर जाना पड़ा। कई बुजुर्ग और महिला मरीज इस दौरान गिरते-संभलते नजर आए।

पूर्वी गेट से हो रही आवाजाही, पर जानकारी का अभाव

अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में मरीजों और एंबुलेंस के प्रवेश के लिए बरारी थाने की तरफ स्थित अस्पताल के पूर्वी गेट को खुला रखा था:

लंबा चक्कर और भ्रम: अधिकांश मरीजों को पूर्वी गेट के डायवर्जन की सही जानकारी नहीं थी, जिस कारण वे मुख्य गेट पर पहुंचकर परेशान होते रहे। वाहन चालकों और गंभीर मरीजों को घूमकर दूसरे रास्ते से अंदर जाना पड़ा।

अव्यवस्था और समस्याएं: ओपीडी के टीबी जांच केंद्र के पास पहले से ही एक पेड़ के शेड पर गिरने के कारण रास्ता आंशिक रूप से बाधित है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष: "सोमवार से सुचारू हो जाएगा मुख्य मार्ग"

इस पूरे घटनाक्रम और मरीजों की परेशानी पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल के प्रबंधक सुनील गुप्ता ने बताया कि यह निर्माण कार्य भविष्य में मरीजों की सुविधा के लिए ही किया जा रहा है:

“सड़क खराब होने के कारण स्ट्रेचर और ट्रॉली पर मरीजों को ले जाने में काफी असुविधा होती थी। कंक्रीट की नई सड़क बनने के बाद आवागमन पूरी तरह सुगम हो जाएगा। कंक्रीट के सूखने के बाद सोमवार से मुख्य गेट को पूरी तरह खोल दिया जाएगा, जिसके बाद मरीजों और वाहनों का प्रवेश सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा। प्रबंधकों ने थोड़े समय की असुविधा के लिए खेद जताते हुए मरीजों से सहयोग की अपील की है।”

मायागंज अस्पताल के मुख्य द्वार के तीन दिनों से बंद रहने और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के प्रचार-प्रसार में कमी के कारण मरीजों को जिस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ा, वह स्वास्थ्य प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, कंक्रीट सड़क बनने से भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन निर्माण कार्यों के दौरान आम जनता और मरीजों के लिए वैकल्पिक मार्गों की स्पष्ट सूचना समय पर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए इस प्रकार की जिल्लत न उठानी पड़े।