नाबालिग लड़कियों के अश्लील वीडियो मामले में मुख्य आरोपित रेहान ने किया सरेंडर, गया पुलिस पटना से लाई हिरासत में; पूछताछ जारी
गया। गया जिले के बांकेबाजार थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़कियों के कथित अश्लील वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपित रेहान ने लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के बीच गुरुवार को पटना के फुलवारीशरीफ थाना में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया। सूचना मिलते ही गया पुलिस की टीम पटना पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपित को हिरासत में लेकर गया पहुंची, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य तकनीकी तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
लगातार दबाव के बाद किया आत्मसमर्पण
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना सामने आने के बाद से ही आरोपित की तलाश तेज कर दी गई थी। कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई और तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया गया।
लगातार बढ़ते दबाव और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई के बाद आरोपित ने अंततः पटना के फुलवारीशरीफ थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद गया पुलिस ने उसे अपनी अभिरक्षा में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
मोबाइल फोन की तलाश में जुटी पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को आरोपित का मोबाइल फोन बरामद नहीं हो सका है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है, क्योंकि उसी के माध्यम से कथित वीडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया अपलोड और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
पुलिस अब मोबाइल की बरामदगी के लिए अलग से प्रयास कर रही है। तकनीकी टीम भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जुटाने और डिजिटल ट्रेल की जांच में लगी हुई है।
पूछताछ में जुटी जांच टीम
गया लाए जाने के बाद आरोपित से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कथित वीडियो कब और कैसे बनाए गए, उन्हें किन माध्यमों से साझा किया गया और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यह एक अकेली घटना थी या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क अथवा संगठित गतिविधि का संबंध है।
सरेंडर के समय भाभी थी साथ
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब आरोपित ने फुलवारीशरीफ थाना में आत्मसमर्पण किया, उस समय उसकी भाभी भी उसके साथ मौजूद थीं। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक रूप से अधिक जानकारी साझा नहीं की है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।
दिल्ली में चल रही थी तलाश
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपित दिल्ली के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के जैतपुर इलाके में छिपा हुआ है। इसके बाद बांकेबाजार थाना पुलिस ने एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली में छापेमारी की।
बताया जाता है कि पुलिस की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद आरोपित दिल्ली से निकलकर अपनी भाभी के साथ पटना पहुंच गया। इसी दौरान पुलिस ने उसके भाई को दिल्ली से हिरासत में ले लिया।
भाई की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा दबाव
पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में भाई की गिरफ्तारी के बाद आरोपित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ा। इसके बाद उसने फरार रहने के बजाय आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
फिलहाल पुलिस आरोपित के भाई से भी आवश्यक पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फरारी के दौरान किसने उसकी सहायता की और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उसे छिपाने या जांच से बचाने में सहयोग दिया।
डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
मामला सोशल मीडिया और कथित अश्लील वीडियो से जुड़ा होने के कारण साइबर जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस डिजिटल उपकरणों, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य पूरे घटनाक्रम को समझने और आरोपों की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाती है। जांच के दौरान पीड़ितों की पहचान और गोपनीयता की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे मामले से संबंधित किसी भी अपुष्ट जानकारी, फोटो या वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा न करें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है और पीड़ितों के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
निष्पक्ष जांच का भरोसा
गया पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच कानून के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और डिजिटल प्रमाणों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जा रहा है।
लोगों से सहयोग की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई विश्वसनीय जानकारी है तो वह पुलिस को उपलब्ध कराए। साथ ही लोगों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और अफवाहों से बचने का भी आग्रह किया गया है।
इस मामले ने एक बार फिर यह आवश्यकता रेखांकित की है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने, नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए समाज और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। फिलहाल गया पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।