हर साल बाढ़ और बदहाल बुनियादी सुविधाओं के बीच जीने को मजबूर वासी

भागलपुर: शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित नगर निगम के वार्ड नंबर एक का 'चौकी नियामतपुर बंगाली टोला' मोहल्ला इन दिनों भीषण उपेक्षा का शिकार है। यहां के निवासियों के लिए हर साल मानसून एक ऐसी मुसीबत लेकर आता है, जो न केवल उनके घरों को जलमग्न कर देता है, बल्कि उनके दैनिक जीवन को भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर देता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह इलाका किसी टापू की तरह बन गया है, जहां विकास की रोशनी अभी तक नहीं पहुंच पाई है।

हर साल का वही पुराना मंजर: बाढ़ का दंश

इस मोहल्ले के निवासियों के लिए बाढ़ कोई आकस्मिक आपदा नहीं, बल्कि एक नियति बन चुकी है। हर साल बरसात के मौसम में यहां के लोगों को अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह शरण लेनी पड़ती है। स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि सड़कों पर चार से पांच फीट तक पानी जमा हो जाता है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि उन्हें करीब एक महीने तक घर से बाहर निकलने के लिए नाव या ऊंचे स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक, सब कुछ इस बाढ़ के कारण प्रभावित होता है।

बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव

बाढ़ के अलावा भी मोहल्ले की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यहाँ की समस्याएं बहुआयामी हैं:

जर्जर सड़कें: पाइप बिछाने के नाम पर सड़कों की खुदाई तो की गई, लेकिन उसके बाद उन्हें कभी मरम्मत नहीं किया गया। नतीजा यह है कि आज सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।

पेयजल का संकट: 'बुडको' द्वारा पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी है। विडंबना यह है कि लोग पीने का पानी दूर से ढोकर लाने या बाजार से खरीदने को मजबूर हैं।

जल निकासी की बदहाली: मोहल्ले में नालों की व्यवस्था या तो है ही नहीं, और जहां है, वहां उन पर ढक्कन तक नहीं हैं। पानी की निकासी न होने से गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है, जिससे महामारी फैलने का खतरा बना रहता है।

अंधेरे में मोहल्ला: अधिकांश बिजली के खंभों पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। रात के समय अंधेरे के कारण महिलाओं और बच्चों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है।

सरकार और प्रशासन से बड़ी मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अब और कितना कष्ट सहें? उन्होंने सरकार से ठोस और स्थायी समाधान की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में जमुनिया नदी पर तटबंध का निर्माण शामिल है, ताकि बाढ़ का पानी सीधे मोहल्ले में न घुसे। साथ ही, सड़कों की ऊंचाई को चार-पांच फीट तक बढ़ाकर बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।

मोहल्लेवासियों का कहना है कि सामुदायिक भवन के अभाव में बाढ़ के समय उनके लिए राहत शिविरों की व्यवस्था भी नहीं हो पाती है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।