महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामला: मुंबई क्राइम ब्रांच ने मुजफ्फरपुर और वैशाली से विजेंद्र गुप्ता और इंद्रजीत सिंह को किया गिरफ्तार, देशव्यापी नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता को तार-तार करने वाले परीक्षा माफियाओं और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ अब केंद्रीय और अन्य राज्यों की पुलिस भी पूरी तरह सख्त हो गई है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (Maharashtra TET - 2021 Paper Leak Case) में एक बहुत बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने बिहार के मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले से दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विजेंद्र गुप्ता और इंद्रजीत सिंह के रूप में हुई है। हालांकि इनका मुख्य ठिकाना और जड़ें समस्तीपुर से जुड़ी हुई हैं, लेकिन इन्हें पुलिस ने वैशाली क्षेत्र से दबोचा। इस कार्रवाई से परीक्षा लीक कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोहों में हड़कंप मच गया है।
कैसे बिछाया गया जाल? (गिरफ्तारी की पूरी पृष्ठभूमि)
महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद से ही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इसकी तह तक जाने में जुटी थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस पूरे सिंडिकेट के तार महाराष्ट्र से बाहर कई अन्य राज्यों, विशेषकर बिहार से जुड़े हुए हैं।
तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance): मुंबई क्राइम ब्रांच की विशेष टीम पिछले कुछ दिनों से बिहार में डेरा डाले हुए थी। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी माध्यमों से इन शातिर आरोपियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
समस्तीपुर कनेक्शन और वैशाली में दबिश: गिरफ्तार दोनों आरोपी विजेंद्र गुप्ता और इंद्रजीत सिंह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला था कि वे फिलहाल वैशाली और मुजफ्फरपुर के सीमावर्ती इलाकों में छिपे हुए हैं।
संयुक्त छापेमारी: स्थानीय पुलिस और मुजफ्फरपुर-वैशाली के प्रशासनिक सहयोग से मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त ऑपरेशन के तहत दोनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद से ही इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक घोटाला क्या है?
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के दौरान बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उत्तरपुस्तिकाएं बदलने और प्रश्नपत्र पहले ही लीक कर देने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ था। इस घोटाले में केवल छोटे स्तर के दलाल ही नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ बड़े अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल पाए गए थे।
पैसों का बड़ा खेल: पेपर लीक कराने के एवज में अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए थे।
अंतरराज्यीय सिंडिकेट: जांच में यह बात पहले ही साफ हो चुकी थी कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ शातिर सॉल्वर गैंग और मास्टरमाइंड इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के पेपर लीक घोटालों में सक्रिय रूप से संलिप्त हैं। विजेंद्र गुप्ता और इंद्रजीत सिंह इसी अंतरराज्यीय रैकेट के अहम मोहरे बताए जा रहे हैं।
पुलिस अब खंगाल रही पूरा नेटवर्क
मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, विजेंद्र गुप्ता और इंद्रजीत सिंह की गिरफ्तारी इस मामले में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। पूछताछ के दौरान दोनों से यह उगलवाने का प्रयास किया जा रहा है कि:
इस सिंडिकेट का सरगना (Mastermind) कौन है?
बिहार और महाराष्ट्र के अलावा किन-किन अन्य राज्यों में इस गिरोह के तार फैले हुए हैं?
अब तक कितने अभ्यर्थियों को इस अवैध तरीके से पास कराया गया है और इस काले कारोबार से कितनी संपत्ति अर्जित की गई है?
पुलिस अब इनके अन्य सहयोगियों की धरपकड़ के लिए मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और वैशाली के विभिन्न ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा बिहार से दो आरोपियों की यह गिरफ्तारी यह साबित करती है कि परीक्षा माफियाओं का जाल कितना फैला हुआ है। हालांकि, पुलिस की यह कार्रवाई देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। कानून के लंबे हाथ अब राज्यों की सीमाओं से परे जाकर इन अपराधियों तक पहुंच रहे हैं, और उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े सभी चेहरों को जल्द ही बेनकाब कर दिया जाएगा।