महंत अभिषेक पाठक और वार्ड पार्षद केपी पप्पू ने किया प्रधान कार्यालय का उद्घाटन; सावन मास में हर रविवार गूंजेगी हर-हर महादेव की गूंज

बिहार के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शहर मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में गुरु पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष बेहद खास और अनूठे अंदाज में मनाया गया। शहर के प्राचीन और ऐतिहासिक साहू पोखर (Sahu Pokhar) के प्रांगण में 'साहू पोखर सेवा दल' के तत्वावधान में एक भव्य और अलौकिक गंगा आरती (Ganga Aarti) का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान ने मुजफ्फरपुर के वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर साहू पोखर सेवा दल के नए प्रधान कार्यालय का भव्य उद्घाटन भी किया गया, जिसे शहर के जाने-माने संत महंत अभिषेक पाठक और स्थानीय लोकप्रिय वार्ड पार्षद केपी पप्पू (KP Pappu) ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर संपन्न किया। इस आयोजन के दौरान यह भी घोषणा की गई कि आगामी पवित्र सावन मास (Sawan Month) में हर रविवार को साहू पोखर पर भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिससे शहरवासियों को काशी और हरिद्वार जैसी सांस्कृतिक छटा मुजफ्फरपुर में ही देखने को मिलेगी। आइए मुजफ्फरपुर के साहू पोखर पर हुए इस भव्य आयोजन, इसके धार्मिक महत्व, कार्यालय के उद्घाटन और सावन मास के कार्यक्रमों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

गुरु पूर्णिमा पर साहू पोखर पर उमड़ी आस्था: गंगा आरती का भव्य आयोजन

गुरु पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और गुरुओं के प्रति वंदना का दिन होता है। इस पवित्र संध्या पर मुजफ्फरपुर के साहू पोखर के तट को दीपों और फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया था।

अलौकिक गंगा आरती: वाराणसी (काशी) के घाटों की तर्ज पर मुजफ्फरपुर में भी माँ गंगा और भगवान शिव की आराधना के लिए भव्य आरती का आयोजन किया गया। विशाल दीपों, कपूर और धूप की सुगंध के बीच जब पुजारियों ने एक साथ मिलकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती शुरू की, तो पूरा घाट 'हर-हर महादेव' और 'जय माँ गंगे' के जयकारों से गूंज उठा।

भक्तों का जनसैलाब: इस भव्य आरती के दर्शन के लिए मुजफ्फरपुर के कोने-कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु साहू पोखर के तट पर पहुंचे थे। जलती हुई दीपों की कतारों से जगमगाता पोखर का पानी एक अद्भुत और सम्मोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

प्रधान कार्यालय का उद्घाटन: महंत अभिषेक पाठक और केपी पप्पू की उपस्थिति

साहू पोखर सेवा दल के कार्यों को और अधिक सुचारू रूप से चलाने तथा सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों को गति देने के लिए एक नए प्रधान कार्यालय की स्थापना की गई है।

संयुक्त उद्घाटन: इस नए कार्यालय का उद्घाटन शहर के प्रतिष्ठित संत महंत अभिषेक पाठक और ऊर्जावान वार्ड पार्षद केपी पप्पू द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत सेवा दल के सदस्यों द्वारा अंग वस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर किया गया।

वक्ताओं के विचार: उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महंत अभिषेक पाठक ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। वहीं, वार्ड पार्षद केपी पप्पू ने साहू पोखर के विकास और सौंदर्यीकरण में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया और कहा कि यह स्थल मुजफ्फरपुर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।

सावन मास में हर रविवार होगी महाआरती: विशेष घोषणा

इस आयोजन के दौरान साहू पोखर सेवा दल द्वारा एक बहुत ही महत्वपूर्ण और आकर्षक घोषणा की गई, जिससे शहर के शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

हर रविवार विशेष आयोजन: समिति ने निर्णय लिया है कि आगामी पवित्र सावन मास के दौरान प्रत्येक रविवार की संध्या को साहू पोखर पर भव्य महाआरती का नियमित आयोजन किया जाएगा।

सावन की तैयारियां: सावन मास में मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ धाम आने वाले लाखों कांवड़ियों और शिव भक्तों को ध्यान में रखते हुए यह आयोजन शहर के धार्मिक पर्यटन और संस्कृति को एक नई दिशा देगा। लोग रविवार के दिन सपरिवार इस आरती में शामिल होकर पुण्य के भागी बन सकेंगे।

साहू पोखर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

मुजफ्फरपुर शहर के मध्य स्थित साहू पोखर यहाँ की पुरानी तहजीब और सांस्कृतिक आयोजनों का गवाह रहा है।

सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभार: पिछले कुछ वर्षों से साहू पोखर सेवा दल के प्रयासों से इस ऐतिहासिक स्थल का कायापलट हुआ है। यहाँ अब विभिन्न पर्व-त्योहारों पर सामूहिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे शहरवासियों को एक बेहतरीन सार्वजनिक मंच मिल रहा है।

मुजफ्फरपुर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर साहू पोखर सेवा दल द्वारा आयोजित गंगा आरती और प्रधान कार्यालय का उद्घाटन समारोह शहर के धार्मिक और सामाजिक जीवन में एक नया अध्याय जोड़ गया है। महंत अभिषेक पाठक और वार्ड पार्षद केपी पप्पू के कर-कमलों से हुआ यह शुभारंभ तथा सावन मास में हर रविवार महाआरती किए जाने की घोषणा ने मुजफ्फरपुर को पूरी तरह से शिवमय बना दिया है। यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और धार्मिक सद्भाव को भी मजबूत करती है।