बिहार में 'जमीन क्रांति'! पटना, सासाराम, पूर्णिया और कटिहार के लाखों लोगों को मिलेगा खासमहाल का मालिकाना हक

 बिहार के शहरी इलाकों में दशकों से रह रहे लाखों परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। नीतीश सरकार राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा 'भूमि सुधार' करने जा रही है। पटना, सासाराम, पूर्णिया, कटिहार समेत बिहार के 12 जिलों में 'खासमहाल' (Khasmahal) की जमीन पर बसे लोगों को अब बहुत जल्द अपनी ही जमीन का असली मालिकाना हक (Absolute Ownership) मिलने वाला है।

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने पटना के सूचना भवन में एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इसका आधिकारिक एलान कर दिया है। सरकार इस पूरी जमीन को 'फ्री-होल्ड' करने की तैयारी में है।

 'मिशन 15 अगस्त': सरकार सीधे जनता से करेगी महा-विमर्श

मंत्री दिलीप जायसवाल ने साफ कर दिया है कि जो लोग पिछले 60-70 वर्षों से खासमहाल की जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे हैं, उनकी अनिश्चितता को अब हमेशा के लिए खत्म किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने पूरा टाइमलाइन सेट कर दिया है:

पब्लिक मीटिंग्स: आगामी 15 अगस्त के ठीक बाद राजस्व विभाग के आला अधिकारी खासमहाल के भूखंड होल्डर्स (Lease Holders) के साथ सीधे जिलों में बैठकें करेंगे।

रेट और शर्तें होंगी तय: इस मीटिंग में सरकार सीधे जनता से पूछेगी कि वे किस व्यावहारिक रेट या किन शर्तों पर इस जमीन को अपने नाम (फ्री-होल्ड) करवाना चाहते हैं।

बाजार मूल्य का फॉर्मूला: जनता की राय मिलने के बाद सरकार यह तय करेगी कि वर्तमान सरकारी बाजार मूल्य (सर्किल रेट) का कितना प्रतिशत शुल्क (Conversion Fee) लेकर मालिकाना हक ट्रांसफर कर दिया जाए।

 क्या है 'खासमहाल' का पेंच और क्यों फंसा था मामला?

जिन लोगों को इस जमीन का गणित नहीं पता, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि यह पूरा विवाद आखिर था क्या:

खासमहाल क्या है? यह मूल रूप से ब्रिटिश काल की सरकारी भूमि (Government Estate) है। अंग्रेजी हुकूमत और बाद में बिहार सरकार ने इस जमीन को लोगों को 30, 66 या 99 वर्षों की लीज (पट्टे) पर रहने या बिजनेस करने के लिए दिया था।

समस्या क्या थी? बिहार के 12 जिलों में लगभग 4,193 एकड़ खासमहाल जमीन है। अकेले पटना के कदमकुआं, मीठापुर, चिरैयाटांड़ और छज्जूबाग जैसे पॉश इलाकों में 137 एकड़ भूमि पर 10,000 से ज्यादा परिवार बसे हैं। चूंकि अधिकांश की 99 साल की लीज खत्म हो चुकी थी, इसलिए पीढ़ियों से रह रहे इन लोगों के पास जमीन बेचने, ट्रांसफर करने या उस पर बैंक से होम लोन लेने का कोई कानूनी हक नहीं था। सरकार के इस फैसले से यह सारी कानूनी अड़चनें खत्म हो जाएंगी।

 'प्लान-बी' भी तैयार: खाली जमीनों पर बनेंगी बहुमंजिला इमारतें

मंत्री ने प्रेस वार्ता में भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों को भी कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार खासमहाल की जमीनों को लेकर टू-वे स्ट्रैटेजी (Two-Way Strategy) पर काम कर रही है:

जहां जनता बसी है: वहां लोगों को पैसे लेकर मालिकाना हक दे दिया जाएगा।

जो जमीन खाली या अतिक्रमित है: उस खासमहाल जमीन को सरकार पूरी तरह अपने कब्जे में लेगी और वहां गरीबों के लिए बहुमंजिला इमारतें (Multi-storey Buildings) और सरकारी फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

 सिर्फ खासमहाल ही नहीं... बिहार भूमि सुधार के 4 और बड़े धमाके!

राजस्व मंत्री ने विभाग का पूरा प्रोग्रेस कार्ड सामने रखते हुए कई और बड़े ऐलान किए हैं, जो बिहार के जमीन से जुड़े सिस्टम को पूरी तरह बदल देंगे:

 'अभियान बसेरा-3' और 30 हजार गरीबों को पर्चा

इस साल 15 अगस्त को राज्य के 30,000 अत्यंत गरीब और भूमिहीन परिवारों को सरकार 3-3 डिसमिल वासभूमि का 'पर्चा' (स्वामित्व प्रमाण पत्र) सौंपेगी। इसके अलावा 'अभियान बसेरा-3' के तहत उन लोगों को जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाया जाएगा, जिन्हें पहले पर्चा तो मिला था लेकिन दबंगों के कारण वो जमीन पर बैठ नहीं पाए थे।

 'लैंड सर्वे' की डेडलाइन तय

बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) को लेकर मंत्री ने कहा कि अगले 2 से 3 सालों में पूरे बिहार का डिजिटल सर्वे पूरा हो जाएगा। इसके तहत अरवल, जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर और सुपौल जैसे 5 जिलों में इसी साल 15 अगस्त तक 100% सर्वे खत्म करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।

दलालों का 'गेम ओवर', 100% ऑनलाइन रसीद

विभाग में बिचौलियों के सिंडिकेट को खत्म करने के लिए अब मैनुअल रसीद काटना पूरी तरह बंद कर दिया गया है। दाखिल-खारिज (Mutation) और परिमार्जन प्लस की सेवाएं अब पूरी तरह डिजिटल हैं। हाल ही में लगे 'सहयोग शिविरों' में आए 81,371 दाखिल-खारिज विवादों में से 68,242 का ऑन-द-स्पॉट निपटारा किया जा चुका है।

 लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज

काम में कोताही बरतने वाले 144 अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है और 124 से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने सस्पेंड चल रहे कर्मचारियों को घर बैठे सैलरी देने के बजाय उनसे 'लैंड सर्वे' का काम लेने का अनोखा नियम बनाया है।

 बेरोजगारों के लिए बंपर ऑफर: 8,819 पदों पर बहाली!

जमीन के इन बड़े कामों को रफ्तार देने के लिए विभाग बड़े पैमाने पर मैनपावर बढ़ाने जा रहा है:

राजस्व कर्मचारी: 8,054 पदों पर बहाली के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को अधियाचना भेजी जा चुकी है।

अमीन (Surveyors): 765 रिक्त पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है।

डाटा एंट्री ऑपरेटर: हर हल्का और ग्राम कचहरी के स्तर पर कार्यपालक सहायकों की तर्ज पर डाटा एंट्री ऑपरेटर्स की तैनाती की जाएगी ताकि लोगों को ब्लॉक के चक्कर न काटने पड़ें।

 बिहार सरकार का खासमहाल जमीन को 'फ्री-होल्ड' करने का यह फैसला दशकों पुराने भूमि विवादों को खत्म करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अगस्त के बाद होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि जमीन की कीमत क्या होगी, लेकिन इतना साफ है कि अब लाखों बिहारवासियों को अपनी ही छत का असली हक मिलने वाला है!