खाकी पर लगा 'घूस और टॉर्चर' का बड़ा दाग! पारू थानाध्यक्ष पर कोर्ट में परिवाद दर्ज, युवक का आरोप—"थाने में बंद कर बेदम पीटा, 50 हजार लेकर छोड़ा"

 बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से पुलिसिया बर्बरता, अवैध हिरासत और वसूली का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। जिले के पारू थाना प्रभारी (SHO) पर एक युवक को बेवजह थाने की हाजत में बंद रखने, बेरहमी से मारपीट करने और छोड़ने के एवज में ₹50,000 की रिश्वत वसूलने का संगीन आरोप लगा है।

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब पीड़ित युवक ने न्याय के लिए सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय (Court) में दर्ज कराए गए इस परिवाद (Complaint Case) के बाद पुलिस महकमे के आला अधिकारियों में खलबली मच गई है। आरोपी कोई और नहीं बल्कि कानून के रखवाले पारू थानाध्यक्ष खुद हैं।

इस पूरे विवाद, कोर्ट में दर्ज कराई गई शिकायत और पीड़ित के साथ हुई आपबीती की पूरी विस्तृत और इनसाइड रिपोर्ट नीचे दी गई है।

 कौन है पीड़ित और क्या है पूरा मामला?

अवैध पुलिसिया कार्रवाई का शिकार हुआ यह युवक मुजफ्फरपुर जिले के पारू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रतवारा चंदन गांव का रहने वाला है।

पीड़ित की पहचान: मोहम्मद राजू, पिता का नाम— (रतवारा चंदन गांव, मुजफ्फरपुर)।

आरोपी: पारू थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) और उनके साथ शामिल कुछ अन्य पुलिसकर्मी।

मुख्य आरोप: बिना किसी पुख्ता कानूनी आधार या एफआईआर के जबरन हिरासत में रखना, हाजत के अंदर थर्ड-डिग्री टॉर्चर (मारपीट) देना और ₹50,000 की अवैध उगाही (रिश्वत) करने के बाद ही मुक्त करना।

 उस काली रात की इनसाइड स्टोरी: पीड़ित मो. राजू की आपबीती

कोर्ट में दाखिल किए गए परिवाद पत्र में मोहम्मद राजू ने पारू पुलिस की उस बर्बरता का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। राजू के मुताबिक:

जबरन उठा ले गई पुलिस : मोहम्मद राजू अपने गांव रतवारा चंदन में मौजूद था, तभी अचानक पारू थाने की पुलिस गाड़ी वहां पहुंची। बिना किसी वारंट, बिना किसी नोटिस या बिना किसी अपराध की जानकारी दिए, पुलिसकर्मियों ने राजू को जबरन गाड़ी में बिठा लिया और थाने ले आए।

हाजत की वो खौफनाक रात: थाने लाने के बाद राजू को सीधे हाजत (Lock-up) में ठूंस दिया गया। जब उसने अपने गुनाह के बारे में पूछा, तो थानाध्यक्ष और उनके गुर्गे भड़क गए। राजू का आरोप है कि उसे रात भर थाने में अवैध रूप से बंद रखा गया।

थर्ड-डिग्री टॉर्चर और बेरहमी से पिटाई : परिवाद के अनुसार, पारू थानाध्यक्ष ने खुद और अपने मातहत पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर राजू की लाठियों और पट्टों से बेदम पिटाई की। उसे इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके शरीर पर चोट के गहरे निशान बन गए और वह दर्द से चीखता रहा, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा।

 "50,000 रुपये दो, तभी छूटेगी जान"—खाकी का उगाही खेल

मारपीट और प्रताड़ना के बाद असली खेल शुरू हुआ पैसों की डिमांड का। मोहम्मद राजू ने कोर्ट को बताया कि पारू थानाध्यक्ष ने उसे साफ शब्दों में धमकी दी:

थानाध्यक्ष की कथित धमकी: > "अगर सलामत यहां से बाहर निकलना चाहते हो और कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्करों या किसी झूठे केस (जैसे शराब तस्करी या आर्म्स एक्ट) में फंसने से बचना चाहते हो, तो तुरंत ₹50,000 (पचास हजार रुपये) का इंतजाम करो। पैसा नहीं मिला, तो जेल भेज दिए जाओगे।"

मजबूरी में दी गई रकम: लॉक-अप के अंदर पुलिस के खौफ और अपनी जान बचाने के लिए पीड़ित के परिजनों ने आनन-फानन में जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम किया।

पैसे मिलते ही छोड़ा: राजू का आरोप है कि जैसे ही पुलिसवालों के हाथ में ₹50,000 की मोटी रकम थमाई गई, पुलिस का रवैया बदल गया। कागजों पर बिना किसी गिरफ्तारी या रिहाई का जिक्र किए राजू को चुपचाप थाने से भगा दिया गया।

 जब खाकी से नहीं मिला इंसाफ, तो खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

थाने से छूटने के बाद मोहम्मद राजू और उसका परिवार पूरी तरह डरा और सहमा हुआ था। स्थानीय स्तर पर पुलिस के बड़े अधिकारियों से शिकायत करने पर केस को दबाए जाने के डर से, राजू ने कानून के सबसे बड़े मंदिर यानी कोर्ट की शरण ली।

न्यायालय में परिवाद दर्ज: मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में पारू थानाध्यक्ष के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत परिवाद पत्र दाखिल किया गया है।

इन धाराओं में फंस सकते हैं थानाध्यक्ष: इस शिकायत के आधार पर पुलिस अधिकारी के खिलाफ अवैध रूप से बंधक बनाने (Wrongful Confinement), मारपीट करने (Voluntarily Causing Hurt), पद का दुरुपयोग कर जबरन वसूली (Extortion) और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) देने जैसी संगीन धाराओं के तहत मामला चलाने की मांग की गई है।

मेडिकल जांच की मांग: कोर्ट में पीड़ित की तरफ से शरीर पर मौजूद चोट के निशानों की मेडिकल जांच रिपोर्ट (Injury Report) को भी साक्ष्य के रूप में पेश करने की तैयारी की जा रही है, जिससे पुलिसिया पिटाई की पुष्टि हो सके।

 जनता का फूटा गुस्सा: "रक्षक ही भक्षक बन गए!"

मोतीपुर और पारू इलाके में इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब इलाके के थाना प्रभारी ही इस तरह के 'वसूली गैंग' की तरह काम करने लगेंगे, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर किसके पास जाएगा?

आम जनता की शिकायतेंजमीनी हकीकत
अवैध हिरासत का खेलनिर्दोष युवाओं को उठाकर डराना और केस का खौफ दिखाकर पैसे वसूलना आम बात हो गई है।
मानवाधिकारों का हननसुप्रीम कोर्ट की 'डीके बसु गाइडलाइंस' के मुताबिक किसी को भी बिना वजह 24 घंटे से ज्यादा या बिना एंट्री के थाने में नहीं रखा जा सकता, जिसकी धज्जियां उड़ाई गईं।

 अब आगे क्या होगा? कानूनी प्रक्रिया पर नजर

कोर्ट में परिवाद दर्ज होने के बाद अब गेंद न्यायपालिका के पाले में है। आने वाले दिनों में इस मामले में निम्नलिखित कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं:

पीड़ित का बयान (Solem Affirmation): सबसे पहले अदालत पीड़ित मोहम्मद राजू का कोर्ट रूम में बयान दर्ज करेगी।

गवाहों की गवाही: राजू के परिजनों या उस वक्त पैसे देने वाले गवाहों के बयान दर्ज होंगे।

शो-कॉज या जांच के आदेश: कोर्ट इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को निर्देश दे सकती है या सीधे थानाध्यक्ष को समन (Samen) जारी कर जवाब तलब कर सकती है।

 मुजफ्फरपुर के पारू थाने का यह मामला बिहार पुलिस की 'मित्र पुलिस' वाली छवि पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। अगर मोहम्मद राजू के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे-सीधे वर्दी की आड़ में किया गया एक बड़ा अपराध है। अब पूरे जिले की निगाहें मुजफ्फरपुर कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस गरीब युवक को न्याय मिलेगा और क्या घूसखोर व अत्याचारी पुलिस अधिकारियों को उनकी सही जगह यानी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा या नहीं! इस मामले की पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ।