जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों से नगरवासी परेशान, नारकीय जीवन जीने को विवश लोग; प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
कहलगांव (निज प्रतिनिधि): बिहार के ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी कहलगांव में स्वच्छता अभियानों के तमाम दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डों, मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक जगह-जगह कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिनसे उठने वाली भीषण दुर्गंध और सड़न ने नगरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि लोग नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। स्थानीय नागरिकों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति में कोई सुधार नहीं आ रहा है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्वच्छता के दावों की धज्जियां: शहर भर में बिखरा कचरा
सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत है:
मुख्य मार्गों और बाजारों का हाल: ऐतिहासिक कहलगांव के मुख्य बाजार, रेलवे स्टेशन रोड, अस्पताल रोड, पुरानी कचहरी और विभिन्न वार्डों की गलियों में कूड़ेदानों के अभाव और समय पर कचरा उठाव न होने के कारण सड़कों के किनारे ही कचरे के पहाड़ खड़े हो गए हैं।
सड़कों पर बहता गंदा पानी और कचरा: कई जगहों पर नालियों का गंदा पानी और कूड़ा-कचरा मिलकर सड़क पर फैल रहा है, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बीमारियों का मंडराता खतरा: मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप
जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों और जलजमाव के कारण कहलगांव में स्वास्थ्य संकट के बादल मंडराने लगे हैं:
संक्रामक रोगों की आशंका: कचरे के सड़ने से उत्पन्न होने वाली सड़ांध और बदबू के कारण लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है। इस कचरे पर भिनभिनाती मक्खियां और पनपते मच्छर मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, डायरिया और चर्म रोगों जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे बड़ा जोखिम: दूषित वातावरण का सबसे बुरा असर घरों के बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, जो आए दिन मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही, तो शहर में किसी बड़ी महामारी के फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
दुकानदारों और व्यापारियों का कारोबार प्रभावित
इस बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था का सीधा असर कहलगांव के स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों पर भी पड़ रहा है:
ग्राहकों की घटती संख्या: दुकानदारों का कहना है कि उनकी दुकानों के ठीक सामने या नजदीक कूड़े का ढेर लगा रहता है। इस कारण वहां आने वाले ग्राहक गंदगी और बदबू के चलते दुकानों के पास रुकने से कतराते हैं, जिससे उनका दैनिक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
व्यापारियों की नाराजगी: व्यापारियों का आरोप है कि वे नियमित रूप से नगर पंचायत को टैक्स और शुल्क का भुगतान करते हैं, इसके बदले उन्हें शहर में केवल गंदगी और उपेक्षा ही मिलती है।
नगर पंचायत प्रशासन की उदासीनता और खोखले दावे
कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र की इस दुर्दशा के लिए स्थानीय नागरिक सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं:
नियमित सफाई का अभाव: स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मियों की टीम रोस्टर के हिसाब से वार्डों में नहीं पहुंचती है। कागजों पर भले ही हर दिन सफाई का दावा किया जाता हो, लेकिन धरातल पर महीनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता है।
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की विफलता: नगर पंचायत द्वारा घर-घर से कचरा उठाने (Door-to-Door Collection) की जो योजना शुरू की गई थी, वह भी अधिकांश वार्डों में सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। मजबूरन लोगों को अपने घरों का कचरा सड़कों के किनारे या खाली प्लॉटों में फेंकना पड़ रहा है।
नगरवासियों की चेतावनी और प्रशासनिक जवाबदेही
कहलगांव की जनता अब इस व्यवस्था से आजिज आ चुकी है और प्रशासन के खिलाफ मुखर होने लगी है:
नियमित उठाव की मांग: नागरिकों ने मांग की है कि शहर के सभी वार्डों से रोजाना नियमित रूप से कूड़े का उठाव किया जाए।
ब्लीचिंग पाउडर और फॉगिंग का छिड़काव: तत्काल प्रभाव से सभी कचरे के ढेरों को साफ कर वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाए और मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए।
कड़ा आंदोलन: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नगर पंचायत प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो वे कहलगांव में व्यापक जनआंदोलन और तालाबंदी करने को बाध्य होंगे।
कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और उससे उत्पन्न गंदगी का साम्राज्य प्रशासन की संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है। एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शहर होने के बावजूद कहलगांव का इस तरह गंदगी से घिरना बेहद शर्मनाक है। जरूरत इस बात की है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपनी कुंभकर्णी नींद से जागें, धरातल पर उतरकर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करें और कहलगांव को स्वच्छ व सुंदर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि नगरवासी एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में सांस ले सकें।