इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज धंसने का मामला विधानसभा में गूंजा, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

पटना/बक्सर: बक्सर जिले के इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के धंसने का मामला मंगलवार को बिहार विधानसभा में जोरदार ढंग से उठाया गया। सदर विधायक आनंद मिश्र ने इस घटना को गंभीर बताते हुए सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का इस तरह क्षतिग्रस्त होना न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया मुद्दा

विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान विधायक आनंद मिश्र ने कहा कि लगभग 26.4 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा धंस गया है। इस कारण पुल पर आवागमन बाधित हो गया है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद रेलवे फाटक भी बंद कर दिया गया है, जिससे इटाढ़ी और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हुई है। लोगों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।

हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित

विधायक ने सदन को बताया कि इस पुल के बंद होने से सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों को हो रही है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को समय पर विद्यालय पहुंचने में कठिनाई हो रही है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। वहीं व्यापारियों के लिए माल की ढुलाई भी प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन दोनों पर इसका व्यापक असर पड़ेगा।

स्कूली बच्चों और किसानों की बढ़ी परेशानी

आनंद मिश्र ने कहा कि पुल बंद होने से स्कूली बच्चों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को समय पर स्कूल पहुंचने में दिक्कत हो रही है।

इसी तरह किसान भी अपनी कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। अतिरिक्त दूरी तय करने के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित

इटाढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों पर भी पुल बंद होने का असर देखा जा रहा है। छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग लंबा होने के कारण समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुल जल्द चालू नहीं हुआ तो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब 26.4 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज का एक हिस्सा धंसने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष और स्थानीय लोगों ने यह जानने की मांग की है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी मानकों का कितना पालन किया गया।

विधायक आनंद मिश्र ने कहा कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी खामी या लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग

विधायक ने सरकार से मांग की कि यदि जांच में निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में घटिया निर्माण कार्य किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई जरूरी है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

आनंद मिश्र ने केवल निर्माण एजेंसी ही नहीं, बल्कि परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के दौरान निरीक्षण में लापरवाही हुई है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

उनका कहना था कि जवाबदेही तय किए बिना सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

विधायक ने पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुल का हिस्सा किन कारणों से धंसा, क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी और क्या निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई।

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बहाल हो सके।

सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से आग्रह किया है कि पुल की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। साथ ही तब तक लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।

विशेषज्ञों की राय

सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पुल के धंसने की घटना अत्यंत गंभीर होती है। ऐसे मामलों में विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक होती है ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। यदि डिजाइन, निर्माण सामग्री या निर्माण प्रक्रिया में कोई कमी पाई जाती है तो उसे भविष्य की परियोजनाओं में सुधार के लिए भी उपयोग किया जाना चाहिए।

जनता की उम्मीद

इटाढ़ी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द से जल्द इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगी। उनका कहना है कि पुल का शीघ्र पुनर्स्थापन और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो

इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज के धंसने का मामला अब केवल एक निर्माण परियोजना की विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। विधानसभा में उठी मांगों के बाद अब सबकी निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाती है और पुल की शीघ्र मरम्मत सुनिश्चित होती है, तो इससे जनता का विश्वास मजबूत होगा और भविष्य की परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।