दवाओं की बर्बादी रोकने के लिए 'एक्सपायरी' से पहले होगा अंतर-संस्थान स्थानांतरण

मुजफ्फरपुर: सरकारी अस्पतालों में दवाओं के एक्सपायर होने और करोड़ों रुपये के सरकारी धन की बर्बादी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक कड़ा और व्यावहारिक निर्णय लिया है। बिहार स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम निर्देशों के अनुसार, जिन दवाओं की एक्सपायरी तिथि में तीन महीने से कम का समय शेष है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मेडिकल कॉलेजों और उच्च खपत वाले स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जाएगा ताकि उनका समय रहते उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

विभाग की नई रणनीति: 'जल्द खपत, शून्य बर्बादी'

पूर्व में राज्य के कई जिलों के गोदामों में बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर होने की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तंत्र को सख्त कर दिया है। विभाग की नई नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

मेडिकल कॉलेजों को प्राथमिकता: चूंकि मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की संख्या अत्यधिक होती है, इसलिए वहां दवाओं की खपत बहुत तेज गति से होती है। जिन दवाओं की एक्सपायरी डेट पास आ रही है, उन्हें तुरंत ऐसे संस्थानों में भेजा जाएगा ताकि वे बेकार न हों।

अंतर-जिला और अंतर-संस्थान स्थानांतरण: यदि किसी जिले या अस्पताल में दवाओं की खपत कम है, तो सिविल सर्जन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी दवाओं को उन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया जाए जहां उनकी जरूरत अधिक है। यदि जिले के भीतर मांग नहीं है, तो उन्हें 'अंतर-जिला' स्थानांतरण के माध्यम से दूसरे जिलों में भेजा जाएगा।

डीवीडीएमएस (DVDMS) पोर्टल पर अनिवार्य प्रविष्टि: दवाओं के स्टॉक का प्रबंधन अब पूरी तरह से पारदर्शी होगा। हर जिले को डीवीडीएमएस पोर्टल पर दवाओं की उपलब्धता, समाप्ति तिथि और वितरण का अद्यतन विवरण देना अनिवार्य है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या गलत एंट्री पाए जाने पर संबंधित सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक जिम्मेदार होंगे।

नियमित समीक्षा: सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है कि वे हर माह की 1 से 5 तारीख के बीच अपने स्टॉक की समीक्षा करें और 10 तारीख तक इसकी रिपोर्ट बीएमएसआईसीएल (BMSICL) को भेजें।

क्यों आवश्यक था यह कदम?

आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य के पीएचसी और सीएचसी में दवाओं के एक्सपायर होने की दर सबसे अधिक रही है। कई बार गलत मांग पत्र या आपूर्ति-खपत में तालमेल की कमी के कारण दवाएं गोदामों में ही पड़ी रह जाती थीं। पिछले कुछ वर्षों में बिहार के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से करोड़ों रुपये की दवाओं के एक्सपायर होने के मामले सामने आए थे, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं।

जवाबदेही और निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि दवाओं का सही उपयोग सुनिश्चित करना अब स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों की पहली प्राथमिकता होगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते दवाओं का स्थानांतरण नहीं किया गया और वे एक्सपायर होती हैं, तो इसके लिए संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और सिविल सर्जन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खजाने से खरीदी गई दवाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े मरीज तक पहुंचे, न कि वे गोदामों में कचरा बनकर नष्ट हों। मुजफ्फरपुर सहित पूरे राज्य में इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।