14 जुलाई को पटना जाने के दौरान तैलिया स्टेशन के पास मिले थे घायल, 23 जुलाई को इलाज के दौरान हुई दर्दनाक मौत; परिवार में मचा कोहराम

सहरसा/शाहजहांपुर/हिमाचल प्रदेश: देश के अलग-अलग हिस्सों से अक्सर दर्दनाक और रहस्यमय हादसों की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो पूरे परिवार को झकझोर कर रख देती हैं। ऐसा ही एक बेहद गंभीर, संदिग्ध और मर्माहत करने वाला मामला प्रकाश में आया है, जिसमें हिमाचल प्रदेश के बल्हमपुर वार्ड-04 के रहने वाले शशिभूषण कुमार की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतक शशिभूषण कुमार बीते 14 जुलाई को अपने घर से पटना के लिए निकले थे, लेकिन सफर के दौरान वे रहस्यमय तरीके से घायल अवस्था में तैलिया स्टेशन के पास पाए गए थे। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच कई दिनों तक संघर्ष करने के बाद आखिरकार 23 जुलाई को उनकी सांसें थम गईं।

इस घटना के सामने आने के बाद से न केवल मृतक के पैतृक और कर्मभूमि के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, बल्कि इस पूरी घटना के पीछे छिपे रहस्यों को लेकर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुआ यह रहस्यमय सफर?

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के बल्हमपुर वार्ड संख्या-04 के निवासी शशिभूषण कुमार किसी सिलसिले में अपने घर से पटना की यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यात्रा का यह सफर उनके और उनके परिवार के लिए जिंदगी का सबसे डरावना सपना बन जाएगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था।

14 जुलाई को पटना के लिए निकले थे: मृतक शशिभूषण कुमार 14 जुलाई को पटना जाने के लिए ट्रेन या अन्य माध्यम से सफर कर रहे थे। सफर के दौरान अचानक उनका संपर्क अपने परिजनों से कट गया और वे रास्ते में ही गायब हो गए। परिजन उनकी लगातार तलाश कर रहे थे और उनके फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

तैलिया स्टेशन के पास घायल अवस्था में मिलना: खोजबीन के दौरान यह जानकारी सामने आई कि वे उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के पास स्थित तैलिया रेलवे स्टेशन (या उसके आसपास के क्षेत्र) में रेलवे ट्रैक या सड़क के किनारे अत्यंत गंभीर एवं घायल अवस्था में पड़े हुए मिले थे। स्थानीय लोगों और रेलवे पुलिस (GRP/RPF) की मदद से उन्हें तुरंत इलाज के लिए शाहजहांपुर के एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी पहचान शशिभूषण कुमार के रूप में हुई।

अस्पताल में कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष, 23 जुलाई को हुई मौत

घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद शशिभूषण कुमार की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। उनके शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि या तो वे किसी भीषण रेल दुर्घटना का शिकार हुए हैं या फिर उनके साथ किसी प्रकार की आपराधिक घटना (आपराधिक साजिश या मारपीट) को अंजाम दिया गया है।

23 जुलाई को तोड़ा दम: डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद शशिभूषण कुमार की हालत में सुधार नहीं हो सका। सिर और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर लगी गंभीर चोटों के कारण अंततः 23 जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: जैसे ही शाहजहांपुर अस्पताल से शशिभूषण कुमार की मौत की खबर उनके पैतृक गांव बल्हमपुर (हिमाचल प्रदेश) और उनके संपर्क वाले अन्य ठिकानों पर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी, माता-पिता और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग तुरंत शाहजहांपुर के लिए रवाना हुए और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई।

हादसा या कोई सोची-समझी साजिश? पुलिस जांच पर टिकी उम्मीदें

चूंकि शशिभूषण कुमार पटना जाने के क्रम में शाहजहांपुर कैसे पहुंचे और तैलिया स्टेशन के पास वे किस परिस्थिति में घायल मिले, यह आज भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है, इसलिए इस मामले में हत्या और दुर्घटना, दोनों पहलुओं से चर्चाएं हो रही हैं।

रहस्यमय परिस्थितियों पर सवाल: परिजनों और स्थानीय शुभचिंतकों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती। आखिर कोई व्यक्ति ट्रेन से सफर करते हुए अपने गंतव्य स्थल (पटना) के बजाय उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर कैसे पहुंच गया और वहां पटरी या स्टेशन के पास घायल अवस्था में कैसे मिला? क्या उनके साथ किसी ने लूटपाट की और चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया, या इसके पीछे कोई अन्य आपराधिक षड्यंत्र है? इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढने की मांग परिजन कर रहे हैं।

पुलिस की जांच और कानूनी कार्रवाई: शाहजहांपुर की स्थानीय पुलिस और जीआरपी (GRP) इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-mortem Report) आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों (चोट लगने का सटीक कारण) का खुलासा हो सकेगा। इसके साथ ही पुलिस उनके मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), यात्रा के दौरान उनके सहयात्रियों के बयानों और घटनास्थल के आसपास के तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 14 जुलाई से 23 जुलाई के बीच उनके साथ असल में क्या-क्या घटित हुआ था।

शशिभूषण कुमार की इस संदिग्ध और असामयिक मौत ने एक बार फिर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और रेलवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लोग अब शासन-प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके और उन्हें न्याय मिल सके।