श्रावणी मेले में तैनात सूचना केंद्र बना बिछड़े अपनों का सहारा; लाउडस्पीकर की गूंज और त्वरित पहल से सैकड़ों बिछड़े कांवरियों को उनके जत्थों से कराया गया मिलाप
सुलतानगंज (भागलपुर), विशेष संवाददाता: देवघर की कठिन और पवित्र कांवर यात्रा के दौरान सुल्तानगंज में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक श्रावणी मेले में इस बार एक ऐसी व्यवस्था ने अनगिनत परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है, जिसने प्रशासन की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को प्रखर रूप से सामने रखा है। मेले की विशाल भीड़, अपार जनसैलाब और पांव-पांव चलने वाले कांवरियों के इस सफर में कई बार बुजुर्ग, महिलाएं या बच्चे अपने परिजनों और साथियों से बिछड़ जाते हैं। ऐसे में सुलतानगंज मेला क्षेत्र में सक्रिय सूचना एवं सहायता केंद्र (Information Center) किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। यहां तैनात कर्मचारियों की मुस्तैदी और ध्वनि विस्तारक यंत्र (माइक्रोफोन) के जरिए दी जाने वाली लगातार सूचनाओं ने बिछड़े हुए अपनों को एक-दूसरे से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भीड़ के इस समंदर में अपनों का बिछड़ना आम बात
सुलतानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट से लेकर कच्ची कांवरिया पथ की शुरुआत तक हर तरफ लाखों की संख्या में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है:
अथाह जनसमूह: कांवरियों की इस भारी भीड़ में कई बार वृद्ध माता-पिता अपने युवा बच्चों से या छोटे बच्चे अपने परिजनों की उंगली छूट जाने के कारण मेले की आपाधापी में अलग हो जाते हैं।
घबराहट और अनिश्चितता: अपनों से बिछड़ जाने के बाद मोबाइल नेटवर्क फेल हो जाना, बैटरी डिस्चार्ज होना या अत्यधिक भीड़ के कारण संपर्क न हो पाना श्रद्धालुओं के लिए भारी मानसिक तनाव और घबराहट का कारण बन जाता है। ऐसी स्थिति में उन्हें समझ नहीं आता कि वे मदद के लिए किससे संपर्क करें।
सूचना केंद्र बना उम्मीद की किरण
इस तरह की आपात और तनावपूर्ण परिस्थितियों में सुलतानगंज मेला क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा स्थापित सूचना केंद्र संकटमोचक की भूमिका निभा रहा है:
त्वरित घोषणाएं (Announcements): जैसे ही कोई व्यक्ति अपने परिजन के खोने की सूचना लेकर केंद्र पर पहुंचता है, वहां तैनात कर्मचारी बिना एक पल गंवाए तुरंत एक्शन में आ जाते हैं।
ध्वनि विस्तारक यंत्र का कमाल: लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार बिछड़े हुए व्यक्ति का नाम, पहनावा, उम्र और उसके पैतृक जिले या जत्थे की जानकारी पूरे मेला क्षेत्र में प्रसारित की जाती है। यह गूंज दूर-दूर तक फैले टेंटों और शिविरों तक पहुंचती है, जिससे तुरंत परिणाम सामने आते हैं।
कर्मचारियों की संवेदनशीलता और दिन-रात की मेहनत
सूचना केंद्र में ड्यूटी पर तैनात प्रशासनिक कर्मियों और पुलिस बल के जवानों का काम सिर्फ घोषणा करना ही नहीं, बल्कि अपनों से बिछड़े सहमे हुए लोगों को ढांढस बंधाना भी है:
काउंसलिंग और तात्कालिक राहत: जब कोई रोता हुआ बच्चा या परेशान बुजुर्ग केंद्र पर पहुंचता है, तो कर्मचारी सबसे पहले उन्हें पानी पिलाकर शांत कराते हैं, उनकी पूरी जानकारी नोट करते हैं और तब तक उनकी देखभाल करते हैं जब तक उनके परिजन उन तक नहीं पहुंच जाते।
24 घंटे सक्रियता: मेला अवधि के दौरान यह सूचना केंद्र चौबीस घंटे (24x7) काम कर रहा है। रात हो या दिन, कर्मठ कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहकर हर एक पुकार को गंभीरता से सुन रहे हैं।
भावुक कर देने वाले मिलन के पल
सूचना केंद्र के माध्यम से कई ऐसे वाकये सामने आए हैं जब बिछड़े हुए लोग अपनों से मिलकर भावुक हो उठे:
हाल ही में एक बुजुर्ग ग्रामीण अपने जत्थे से बिछड़कर बुरी तरह घबरा गए थे। उनके पास न तो मोबाइल था और न ही उन्हें किसी का नंबर याद था। सूचना केंद्र की बदौलत जब कुछ ही मिनटों में उनके बेटे तक माइक से संदेश पहुंचा, तो बेटा दौड़ते हुए केंद्र पर पहुंचा। पिता-पुत्र के मिलने पर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
इसी प्रकार, कई छोटे बच्चे जो अपने माता-पिता की भीड़ में तलाश करते-करते थक चुके थे, उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों के हवाले किया गया।
प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी सहयोग की सराहना
जिला प्रशासन द्वारा इस बार सूचना केंद्रों पर आधुनिक पीए सिस्टम (Public Address System) और वॉलेंटियर्स की विशेष तैनाती की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं:
सोशल मीडिया और लोकल नेटवर्क का तालमेल: पारंपरिक लाउडस्पीकर के साथ-साथ पुलिस के वॉकी-टाकी सेट और स्थानीय सेवा शिविरों के नेटवर्क का भी पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि सूचना तुरंत फैल सके।
तीर्थयात्रियों की प्रतिक्रिया: देश के विभिन्न राज्यों से आ रहे कांवरियों ने प्रशासन की इस व्यवस्था की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उनका कहना है कि इस प्रकार की पुख्ता और मानवीय व्यवस्था होने से उन्हें अपनी यात्रा के दौरान एक आंतरिक सुरक्षा का अहसास होता है।
सुलतानगंज के श्रावणी मेले में स्थापित सूचना केंद्र केवल एक प्रशासनिक काउंटर भर नहीं है, बल्कि यह उन हजारों श्रद्धालुओं के लिए आत्मीयता का केंद्र बन गया है जो मेले की भीड़ में अपनों को खोकर असहज हो जाते हैं। कर्मचारियों की संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और लाउडस्पीकर के माध्यम से दी जाने वाली समय पर सूचना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची जनसेवा और प्रशासनिक मुस्तैदी से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान आसानी से निकाला जा सकता है। यह पहल श्रावणी मेले को न केवल सुरक्षित बना रही है, बल्कि इसे मानवीय संवेदनाओं का एक जीवंत उदाहरण भी पेश कर रही है।