दूसरे का सर्टिफिकेट लेने पहुंचे जालसाज और दलाल, काउंटर पर पूछताछ के दौरान रंगे हाथ गिरफ्तार
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) का प्रशासनिक भवन अक्सर छात्र-छात्राओं की भीड़ और गहमागहमी के लिए जाना जाता है, लेकिन मंगलवार को यहां का माहौल उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब विश्वविद्यालय के सर्टिफिकेट काउंटर पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। किसी दूसरे छात्र के नाम का प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट) लेने पहुंचे एक युवक और उसके सहयोगी दलाल को विश्वविद्यालय के सतर्क कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने पूछताछ के दौरान धर दबोचा। इस घटना ने विश्वविद्यालय में सक्रिय 'सर्टिफिकेट माफिया' और दलालों के नेटवर्क की पोल खोल दी है।
घटना का ब्योरा: काउंटर पर खुली जालसाजी की पोल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे एक युवक काउंटर नंबर-4 पर पहुंचा। उसने खुद को संबंधित छात्र बताते हुए अपना आवेदन प्रस्तुत किया और अपनी डिग्री/सर्टिफिकेट की मांग की। हालांकि, काउंटर पर तैनात कर्मचारी की तत्परता और पुराने रिकॉर्ड की जांच के दौरान शक गहरा गया।
संदेह का कारण: आवेदन में जमा किए गए फोटो और संबंधित छात्र के वास्तविक विवरण में मामूली विसंगति पाई गई। जब कर्मचारी ने उससे कुछ बुनियादी सवाल पूछे—जैसे कि विभाग का नाम, सत्र (Session), और परीक्षा रोल नंबर—तो युवक हकलाने लगा और सवालों के गलत जवाब देने लगा।
दलाल की संलिप्तता: काउंटर कर्मचारी को युवक की घबराहट देख शक हुआ, जिसके बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा टीम को तुरंत सूचित किया गया। इसी बीच, परिसर के बाहर खड़ा एक संदिग्ध व्यक्ति, जो इस युवक का साथ दे रहा था, स्थिति भांपते हुए वहां से खिसकने की कोशिश करने लगा। सुरक्षाकर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया।
दलाल का नेटवर्क और विश्वविद्यालय की सुरक्षा में सेंध
पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि पकड़ा गया युवक खुद छात्र नहीं था, बल्कि उसे किसी अन्य ने सर्टिफिकेट निकलवाने के काम पर भेजा था। उसके साथ पकड़ा गया दूसरा व्यक्ति विश्वविद्यालय के बाहर का एक दलाल है, जो लंबे समय से ऐसे 'काम' करवाने का झांसा देकर छात्रों से मोटी रकम वसूलता रहा है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि:
फर्जी दस्तावेज: युवक के पास मौजूद आवेदन पत्र में कूटरचित (Forged) कागजात का उपयोग किया गया था।
दलालों का दखल: दलाल ने युवक को विश्वास दिलाया था कि वह विश्वविद्यालय के अंदर अपनी 'पहुंच' का उपयोग करके किसी भी छात्र का सर्टिफिकेट निकलवा सकता है।
वित्तीय लेनदेन: इस काम के एवज में दलाल ने उस युवक से हजारों रुपये की मांग की थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कड़ा रुख
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कुलपति और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल थाना पुलिस को बुलाकर दोनों आरोपियों को सौंप दिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में विश्वविद्यालय के अंदर का कोई कर्मचारी या कोई अन्य बाहरी व्यक्ति शामिल तो नहीं है।
कुलसचिव ने कहा, "यह विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने का एक घृणित प्रयास है। हम इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।"
छात्रों के लिए चेतावनी: दलालों के झांसे में न आएं
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि टीएमबीयू के काउंटर पर सक्रिय दलाल मासूम छात्रों को अपना शिकार बना रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है:
स्वयं आवेदन करें: कोई भी छात्र अपना सर्टिफिकेट लेने के लिए स्वयं उपस्थित हो। किसी बिचौलिये या दलाल के माध्यम से काम न कराएं।
आधिकारिक प्रक्रिया: विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दी गई प्रक्रिया का पालन करें। किसी भी व्यक्ति को कैश (नकदी) न दें।
शिकायत दर्ज करें: यदि कोई भी व्यक्ति विश्वविद्यालय परिसर में पैसे के बदले काम कराने का वादा करता है, तो तुरंत सुरक्षा अधिकारियों को सूचित करें।
यह घटना केवल एक जालसाजी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह टीएमबीयू प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। वर्षों से चल रहे इस 'दलाल-राज' को खत्म करने की दिशा में यह एक ठोस कदम हो सकता है। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की भीड़ का फायदा उठाने वाले ये तत्व न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि वास्तविक छात्रों के करियर को भी दांव पर लगा रहे हैं।
पुलिस की जांच के बाद उम्मीद है कि उन सभी चेहरों से नकाब उतरेगा जो इस फर्जीवाड़े के पीछे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अब सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का फैसला किया है। भविष्य में सर्टिफिकेट काउंटर पर बायोमेट्रिक या आईडी प्रूफ के सख्त सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया अनिवार्य की जा सकती है ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।