भूमि अधिग्रहण के विरोध में नौबतपुर प्रखंड परिसर में किसानों का जोरदार प्रदर्शन, मुआवजा बढ़ाने और अधिकारों की सुरक्षा की उठी मांग

पटना | संवाददाता

पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड परिसर में भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को किसानों का बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में क्षेत्र के सैकड़ों किसान, ग्रामीण, महिला किसान और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसानों ने सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, उचित मुआवजा देने तथा किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।

धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया, लेकिन किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों का कहना था कि उनकी पुश्तैनी जमीन केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। ऐसे में बिना संतोषजनक मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था के भूमि अधिग्रहण स्वीकार्य नहीं होगा।

सैकड़ों किसानों ने दर्ज कराई अपनी उपस्थिति

सुबह से ही नौबतपुर प्रखंड परिसर में विभिन्न पंचायतों के किसान जुटने लगे। कुछ ही घंटों में परिसर किसानों से भर गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। किसानों ने एकजुट होकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं और कहा कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों की आजीविका छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेती योग्य भूमि अधिग्रहित होने के बाद अधिकांश परिवारों के सामने रोजगार और आय का संकट खड़ा हो जाता है। इसलिए सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे विकास परियोजनाओं के साथ किसानों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके।

मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग

धरना-प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा भूमि के बदले मिलने वाले मुआवजे को लेकर था। किसानों का कहना था कि वर्तमान दर बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है। उनका आरोप है कि जमीन की वास्तविक कीमत लगातार बढ़ रही है, जबकि अधिग्रहण के समय मिलने वाला मुआवजा अपेक्षाकृत कम है।

किसानों ने मांग की कि मुआवजा वर्तमान बाजार दर के आधार पर तय किया जाए और उसमें समय-समय पर संशोधन की व्यवस्था भी हो। उनका कहना था कि उचित मुआवजा मिलने से प्रभावित परिवार नए सिरे से अपने जीवन और रोजगार की व्यवस्था कर सकेंगे।

समिति के सदस्यों ने उठाए कई सवाल

धरना को संबोधित करते हुए किसान समिति के सदस्यों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों की सहमति और उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार किसानों को पूरी जानकारी दिए बिना ही अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ा दी जाती है।

समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को किसानों के साथ नियमित संवाद स्थापित करना चाहिए और किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले प्रभावित परिवारों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उनका कहना था कि बातचीत के माध्यम से अधिकांश विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।

पुनर्वास और रोजगार की भी उठी मांग

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि पुनर्वास और रोजगार की भी मांग की। उनका कहना था कि जिन परिवारों की पूरी या अधिकांश कृषि भूमि अधिग्रहित हो जाती है, उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है।

किसानों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को रोजगार दिया जाए। साथ ही बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और वैकल्पिक आवास की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि केवल आर्थिक मुआवजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के समग्र पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के साथ प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

धरना समाप्त होने के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की समीक्षा, मुआवजे में वृद्धि, पारदर्शिता, पुनर्वास नीति और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित कई मांगें शामिल थीं।

किसानों ने उम्मीद जताई कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक निर्णय करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की और उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि सरकार की नीतियों के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और किसानों की ओर से दिए गए ज्ञापन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

हालांकि, किसानों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना था कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

विशेषज्ञों की राय

भूमि और कृषि मामलों के जानकारों का मानना है कि विकास परियोजनाओं और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि किसी भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में उचित मुआवजा, पारदर्शिता, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तो विवादों की संभावना काफी कम हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों का विश्वास जीतने के लिए सरकार को समय-समय पर संवाद स्थापित करना चाहिए और ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो विकास के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी मजबूत करें।

आगे की रणनीति पर विचार

धरना समाप्त होने के बाद किसान नेताओं ने बताया कि यदि सरकार जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न गांवों में बैठकों का आयोजन कर किसानों को एकजुट किया जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की जाएगी।

किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विकास परियोजना को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विकास की प्रक्रिया में किसानों के अधिकारों की अनदेखी न हो। उनका कहना है कि सरकार यदि संवाद और सहमति के आधार पर आगे बढ़ेगी तो समाधान निकालना संभव है।

नौबतपुर प्रखंड परिसर में हुआ किसानों का यह प्रदर्शन भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। किसानों की प्रमुख मांग उचित मुआवजा, पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया, प्रभावी पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा है। अब सभी की निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते किसानों की चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।