परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव; 1 अगस्त से भागलपुर और पूर्णिया में लागू होगा 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS), अब ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कैमरे से कटेगा ऑटोमैटिक चालान
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को डिजिटल एवं हाई-टेक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार और परिवहन विभाग के निर्देशानुसार, आगामी 1 अगस्त से बिहार भर में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की औपचारिक शुरुआत की जा रही है। खास बात यह है कि इस अत्याधुनिक प्रणाली के पहले चरण में राज्य के जिन प्रमुख शहरों को शामिल किया गया है, उनमें भागलपुर और पूर्णिया का नाम सबसे ऊपर है। इस व्यवस्था के लागू होने से शहर के चौराहों और मुख्य मार्गों पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर पैनी नजर रखेंगे और स्वतः (Automated) चालान जनरेट कर वाहन मालिकों के पते या मोबाइल नंबर पर भेज देंगे।
क्या है इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और यह कैसे काम करेगा?
परिवहन विभाग की इस हाई-टेक योजना का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करवाना है:
ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे: शहर के प्रमुख चौराहों, ट्रैफिक सिग्नलों और संवेदनशील मार्गों पर अत्याधुनिक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे और रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन कैमरे लगाए गए हैं।
नियम उल्लंघन की स्वतः पहचान: यदि कोई वाहन चालक रेड लाइट जंप करता है, बिना हेलमेट के गाड़ी चलाता है, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता है, सीटबेल्ट नहीं लगाता है या ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार) करता है, तो ये कैमरे पलक झपकते ही वाहन की तस्वीर और नंबर कैप्चर कर लेंगे।
सीधे घर पहुंचेगा ई-चालान (E-Challan): कैमरे द्वारा पकड़े गए उल्लंघन का डेटा सीधे कंट्रोल रूम और वाहन पोर्टल से सिंक्रनाइज़ हो जाएगा। इसके बाद वाहन मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर चालान का मैसेज पहुंच जाएगा, जिसका भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
भागलपुर और पूर्णिया को पहले चरण में क्यों चुना गया?
राज्य के अन्य जिलों के मुकाबले भागलपुर और पूर्णिया जैसे महानगरों में वाहनों की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या एक बड़ी चुनौती बन गई है:
बढ़ता ट्रैफिक दबाव: सिल्क सिटी के रूप में मशहूर भागलपुर में पिछले कुछ वर्षों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। व्यस्त बाजारों और चौराहों पर अक्सर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण हादसे और जाम की स्थिति बनती है।
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता: प्रशासन का मानना है कि मैनुअल चेकिंग (पुलिस द्वारा गाड़ियों को रोककर जांच करना) की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन 24 घंटे सक्रिय रहने वाला यह डिजिटल सिस्टम हर एक वाहन पर नजर रखेगा, जिससे सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी आएगी और लोगों में ट्रैफिक सेंस विकसित होगा।
कंट्रोल रूम से होगी पल-पल की मॉनिटरिंग
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष रूप से तकनीकी नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किए गए हैं:
सेंट्रलाइज्ड कमांड: भागलपुर में पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग के समन्वय से एक डेडिकेटेड कमांड सेंटर बनाया गया है, जहां से शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे कैमरों की फीड लाइव देखी जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही: अधिकारियों का कहना है कि इस प्रणाली के आने से पुलिस और आम जनता के बीच चालान काटने को लेकर होने वाली बहस या विवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, क्योंकि हर कार्रवाई डिजिटल सबूत (तस्वीर और वीडियो) के आधार पर होगी।
आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए जरूरी निर्देश
1 अगस्त से लागू हो रही इस नई व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहर के तमाम वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपनी ड्राइविंग आदतों में सुधार लाएं:
दस्तावेज और फिटनेस दुरुस्त रखें: वाहन चालक गाड़ी चलाते समय हमेशा हेलमेट और सीटबेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। साथ ही, अपने वाहनों के कागजात (इंश्योरेंस, प्रदूषण, आरसी आदि) पूरी तरह अपडेट रखें।
नियमों का सम्मान करें: रेड लाइट होने पर जेब्रा क्रॉसिंग से पहले रुकें और निर्धारित गति सीमा का पालन करें, क्योंकि अब कैमरे की नजर से बचना मुमकिन नहीं होगा।
1 अगस्त से भागलपुर और पूर्णिया में लागू होने जा रहा इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) बिहार की यातायात व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। यह तकनीक न केवल अनुशासनहीन वाहन चालकों पर नकेल कसेगी, बल्कि आम नागरिकों के लिए सड़क यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाएगी। शहरवासियों को अब अपनी पुरानी आदतों को बदलकर एक जिम्मेदार नागरिक की तरह पूरी सतर्कता के साथ सड़कों पर चलना होगा।