श्रावणी मेले के उद्घाटन पर ऐतिहासिक घोषणा; डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सुल्तानगंज का नाम बदलकर 'अजगैवीनाथ धाम' करने का किया ऐलान, रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन को लेकर भी उठी मांग
भागलपुर, विशेष संवाददाता: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के पावन अवसर पर सिल्क सिटी भागलपुर और सुल्तानगंज की धरती से एक बेहद अहम और बहुप्रतीक्षित घोषणा सामने आई है। श्रावणी मेले के भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए ऐतिहासिक नगरी सुल्तानगंज का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर 'अजगैवीनाथ धाम' करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से न सिर्फ स्थानीय निवासियों और शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह है, बल्कि धार्मिक गलियारों में भी इस निर्णय की सराहना की जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने मंच से ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी दस्तावेजों और पत्राचार में अब इसी नए नाम का उल्लेख सुनिश्चित करें।
क्यों पड़ी सुल्तानगंज का नाम 'अजगैवीनाथ धाम' करने की आवश्यकता?
सुल्तानगंज केवल एक प्रशासनिक शहर नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का महातीर्थ है:
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व: सुल्तानगंज उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर बसा वह पवित्र स्थान है, जहां से कांवरिए गंगाजल भरकर अपनी कठिन 'बोल बम' की यात्रा शुरू करते हैं। यहां स्थित भगवान अजगैवीनाथ का मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान का मुख्य केंद्र है।
सांस्कृतिक अस्मिता की बहाली: स्थानीय लोगों, संतों और जनप्रतिनिधियों की यह लंबे समय से मांग रही थी कि गुलामी के दौर या मुगल काल से जुड़ी पहचान वाले नाम के स्थान पर इस पावन भूमि को उसकी मूल पौराणिक और आध्यात्मिक पहचान 'अजगैवीनाथ धाम' के नाम से जाना जाए। उपमुख्यमंत्री द्वारा यह घोषणा इसी जनभावना का सम्मान करते हुए की गई है।
समारोह के दौरान अधिकारियों को कड़े निर्देश
श्रावणी मेले के उद्घाटन के पावन मौके पर उमड़ी भारी भीड़ और साधु-संतों की उपस्थिति के बीच डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने प्रशासनिक अमले को स्पष्ट निर्देश जारी किए:
सरकारी दस्तावेजों में बदलाव: मंच से घोषणा करते हुए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से सरकारी कागजातों, बोर्डों और पत्राचार में सुल्तानगंज के स्थान पर 'अजगैवीनाथ धाम' नाम का प्रयोग शुरू करें।
मेला प्रशासन की सक्रियता: इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने भी इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है ताकि इस नाम परिवर्तन को प्रशासनिक और कानूनी रूप से पूर्ण जामा पहनाया जा सके।
सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की उठी जोरदार मांग
इस बड़ी घोषणा के बाद अब क्षेत्रीय जनता और रेल यात्रियों के बीच एक और मुख्य मांग तेजी से उठने लगी है:
स्टेशन का नाम भी हो परिवर्तित: स्थानीय लोगों और कांवरियों का कहना है कि जब प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से इस शहर का नाम 'अजगैवीनाथ धाम' कर दिया गया है, तो रेलवे बोर्ड और पूर्व मध्य रेल (ECR) को भी बिना देर किए सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन (Sultanganj Railway Station) का नाम बदलकर 'अजगैवीनाथ धाम जंक्शन' या 'अजगैवीनाथ धाम स्टेशन' कर देना चाहिए।
यात्रियों की भावनाएं: ट्रेन से देश के कोने-कोने से आने वाले शिवभक्तों का पहला पड़ाव यही रेलवे स्टेशन होता है। ऐसे में स्टेशन का नाम बदलने से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक विशेष जुड़ाव महसूस होगा। लोग जल्द ही इस संबंध में रेल मंत्रालय को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
श्रावणी मेले पर इसका क्या होगा प्रभाव?
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया से कांवरिए सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं:
श्रद्धालुओं में हर्षोल्लास: मेले के उद्घाटन पर इस ऐतिहासिक घोषणा से कांवरियों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। 'हर हर महादेव' के जयकारों के बीच शिवभक्त इस निर्णय को भगवान भोलेनाथ के दरबार से जुड़ा एक बहुत बड़ा उपहार मान रहे हैं।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से इस नामकरण से अजगैवीनाथ धाम की वैश्विक पहचान और अधिक मजबूत होगी, जिससे भविष्य में यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है।
श्रावणी मेले के उद्घाटन के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा सुल्तानगंज का नाम 'अजगैवीनाथ धाम' करने की घोषणा क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ गई है। हालांकि अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर इस आदेश को कितनी जल्दी अमलीजामा पहनाया जाता है और साथ ही रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग पर केंद्र सरकार या रेल मंत्रालय द्वारा क्या कदम उठाया जाता है। फिलहाल, इस घोषणा ने पूरे भागलपुर और सुल्तानगंज क्षेत्र में उत्सव का माहौल पैदा कर दिया है।